अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने का ऑर्डर दिया था, तब उनके दिमाग में जो 'आगे क्या होगा' वाली तस्वीर बनी होगी, वो आज की जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाती होगी. ट्रंप ने ईरान को जितने हल्के में लिया था, वो उससे कहीं मजबूत खिलाड़ी साबित हुआ है. जंग शुरू हुए तीन हफ्ते होने वाली है लेकिन ईरान ने बैकफुट से ही सही, अमेरिका-इजरायल के हर हमले का जवाब दिया है, उन्हें और खाड़ी में मौजूद उनके सहयोगी देशों को बड़े डेंट दिए हैं. अब आलम यह है कि जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप अपनी रणनीति बदलते नजर आ रहे हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य अभियान को मजबूत करने के लिए हजारों अमेरिकी सैनिकों को भेजने पर विचार कर रही है.
रिपोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी और इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने यह जानकारी दी है. उनका कहना है कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ अपने अभियान के अगले कदमों की तैयारी कर रही है. इन सैनिकों की तैनाती से डोनाल्ड ट्रंप को और विकल्प मिल सकते हैं, क्योंकि वह अभी यह सोच रहे हैं कि अमेरिका के सैन्य अभियान को और बढ़ाया जाए या नहीं.
ट्रंप चाहते क्या हैं?
रिपोर्ट में लिखा है कि सूत्रों के अनुसार ट्रंप के सामने मौजूद इन विकल्पों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना भी शामिल है. यह काम मुख्य रूप से हवाई सेना और नौसेना के जरिए किया जाएगा. लेकिन इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अमेरिकी सैनिकों को ईरान के तट (समुद्र किनारे) पर भी तैनात करना पड़ सकता है. चार सुत्रों ने यह बात रॉयटर्स से कही, जिनमें दो अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हैं.
बता दें कि अमेरिका ने 13 मार्च को इस द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे और डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण तेल ढांचे पर भी हमला करने की धमकी दी थी. हालांकि सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था में इस द्वीप की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए इसे नष्ट करने की बजाय उस पर नियंत्रण करना बेहतर विकल्प माना जा सकता है.
ट्रंप के सामने बड़ा रिस्क
यदि अमेरिका ईरान में जमीनी सैनिकों का इस्तेमाल करता है, चाहे सीमित मिशन के लिए ही क्यों न हो, तो यह डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक जोखिम बन सकता है. इसका कारण यह है कि अमेरिकी जनता में ईरान के खिलाफ इस अभियान के लिए समर्थन कम है, और डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी वादों में कहा था कि वह अमेरिका को मध्य पूर्व के नए युद्धों में नहीं फंसाएंगे. वैसे भी अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण (नेशनल लोन) बुधवार को रिकॉर्ड 39 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया, जो एक मील का पत्थर है.
डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के अधिकारियों ने यह संभावना भी चर्चा की है कि अमेरिकी सेना को ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करने के लिए भेजा जाए. इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने यह बताया.
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