नंदीग्राम को ममता बनर्जी की 'कर्मभूमि' के रूप में जाना जाता है. उन्होंने नंदीग्राम से ही अपनी राजनीतिक पहचान बनाई. नंदीग्राम एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और बीजेपी के बीच दिलचस्प मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है. तृणमूल कांग्रेस ने इस हाई प्रोफाइल सीट पर बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके ही पूर्व करीबी सहयोगी पवित्र कर को अपना उम्मीदवार बनाया है. चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में नंदीग्राम की राजनीति किस दिशा में जा रही है? एनडीटीवी ने 'परिवर्तन' के इस केंद्र का जायजा लिया.
पिछले कुछ दशकों में नंदीग्राम ने बंगाल की राजनीति के कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं. चाहे वामपंथी शासन का दौर हो या पिछला विधानसभा चुनाव, यहां ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. इस बार यहां के लोग क्या सोच रहे हैं? क्या नंदीग्राम फिर से बदलाव लाने की ओर देख रहा है, जबकि बीजेपी एक और 'परिवर्तन' को लेकर आश्वस्त है?
नंदीग्राम के 'महासंग्राम' में TMC ने सुवेंदु के करीबी पबित्र कर पर ही खेला बड़ा दांव
— NDTV India (@ndtvindia) March 19, 2026
पश्चिम बंगाल की विधानसभा सीट नंदीग्राम एक बार फिर सियासी हलचल का केंद्र बन गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कर्मभूमि मानी जाने वाली इस सीट पर आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है.… pic.twitter.com/f7zuLtXaX3
हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश
बुधवार की सुबह नंदीग्राम के बोयाल इलाके में हालात सामान्य नहीं थे.सुवेंदु अधिकारी के पूर्व समर्थक पवित्र कर का चुनाव से पहले तृणमूल में वापसी करना और नंदीग्राम से उनका उम्मीदवार बनना, दोनों ही खेमों के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा रहा है. कर बुधवार को बोयाल-1 के मतदाताओं के बीच घूमते और स्थानीय 'सेतला पूजा' में हिस्सा लेते हुए नजर आए.'सेतला पूजा' बंगाल का एक पारंपरिक लोक उत्सव है, जो फरवरी-मार्च में मनाया जाता है. कर, पहले बीजेपी के पंचायत प्रमुख थे. वो सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी रह चुके हैं. उन्होंने 2021 में बीजेपी के आधार को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई थी.
पवित्र कर पहले 'हिंदू समहति' नाम के संगठन से जुड़े थे. बाद में उन्होंने 'सनातनी सेना' नामक संगठन बनाया. नंदीग्राम में पिछले चुनाव से ही धार्मिक ध्रुवीकरण साफ नजर आ रहा है. टीएमसी ने पवित्र को उम्मीदवार बनाकर हिंदू वोटरों को निर्णायक बनाने की कोशिश की है.
एनडीटीवी से क्या बोले पवित्र कर
उन्होंने कहा, ''पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया है. हर राजनीतिक व्यक्ति की आकांक्षा होती है कि वह राष्ट्र निर्माण में भाग ले. मैंने तृणमूल कांग्रेस जॉइन की है और पार्टी को विश्वास है कि मैं नंदीग्राम में जीत हासिल करुंगा.'' बीजेपी छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, ''
काफी समय से मेरे और बीजेपी के बीच मानसिक दूरी बन गई थी. संगठन के नेताओं से मेरा तालमेल नहीं बैठ पा रहा था. वहीं, विकास कार्यों के मामले में ममता बनर्जी अपने वादों को पूरा करती हैं. पिछले चुनाव में बीजेपी के सभी वादे खोखले साबित हुए.''
इस बार नंदीग्राम का आम मतदाता क्या सोच रहा है? इसे समझने के लिए हम तंगुआ बाजार पहुंचे. इसी बाजार में 2021 चुनाव के अंतिम दिन ममता बनर्जी, अमित शाह और मिथुन चक्रवर्ती के रोड शो एक घंटे के भीतर हुए थे. यह जगह स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों से भरी रहती है.यहां की राजनीति की नब्ज समझने के लिए यह बाजार अहम जगह माना जाता है.
नंदीग्राम में क्या होगा खेला
तंगुआ बाजार में एक बुजुर्ग ई-रिक्शा चालक ने कहा,''खेला एबारो होबे! (इस बार भी खेल होगा). नंदीग्राम में आखिरी फैसला सुवेंदु बाबू का ही होगा. हमें लगता है कि सुवेंदु अधिकारी इस बार भी जीतेंगे.'' वहीं एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, ''जब ममता बनर्जी जैसी मजबूत उम्मीदवार यहां हार गईं, तो पवित्र कर तो बहुत कमजोर उम्मीदवार हैं. इस बार ममता ने नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ा क्योंकि उन्हें फिर हार का डर था.'' तंगुआ बाजार में ज्यादातर स्थानीय लोग यह मानते दिखे कि इस बार बंगाल में बीजेपी सरकार बना सकती है. हालांकि 60 साल के एक व्यक्ति अतिआर रहमान की राय अलग थी. उन्होंने कहा,''इस बार नंदीग्राम में स्थिति दीदी के पक्ष में है. टीएमसी जीतेगी और सुवेंदु अधिकारी 20-30 हजार वोटों से हारेंगे.''
हमने और गहराई से लोगों की नब्ज पकड़ने की कोशिश की, खासकर उस इलाके में जिसने वाममोर्चा की सरकार में हिंसा हुई थी. इस इलाके में 14 मार्च 2007 को भूमि अधिग्रहण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कम से कम 14 ग्रामीण पुलिस फायरिंग में मारे गए थे. उस समय कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ता पुलिस की वर्दी पहनकर गांवों में घुसे थे. आज, जब राजनीतिक दल अतीत को पीछे छोड़ने की बात कर रहे हैं, तो क्या नंदीग्राम के लोग उस घटना को भूल पाएंगे?
नंदीग्राम में ममता बनर्जी के आंदोलन पर क्या है लोगों की राय
टेखाली ब्रिज पर अब काफी बदलाव दिखता है. ममता सरकार आने के बाद इसे नीले-सफेद रंग में रंगा गया है, जो सरकार का आधिकारिक रंग है. हुगली नदी के किनारे दिनबंधुपुर घाट पर हमें 28 साल के सौरव जना मिले. वो रोजगार के लिए बाहर गए थे और अभी हाल ही में लौटे हैं. उन्होंने कहा,''हमें काम के लिए गांव छोड़ना पड़ता है. मैं चुनाव के लिए लौटा हूं. हम चाहते हैं कि नंदीग्राम में उद्योग लगे, चाहे छोटे हों या बड़े. 2007 में जो हुआ, वह गलत था. आज बंगाल के 99 फीसदी युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं.''
वहीं तीन बच्चों की मां लक्ष्मी रानी जना ने कहा, ''अगर यहां उद्योग लगेंगे तो आमदनी बढ़ेगी और हमें अपने बेटों को बाहर नहीं भेजना पड़ेगा. अब लगता है कि औद्योगीकरण का विरोध करना गलती थी.'' वहीं एक अन्य महिला उर्मिला पात्रा ने कहा, ''सिर्फ 'लक्ष्मी भंडार' योजना से काम नहीं चलेगा. सभी के पास खाने के लिए पर्याप्त होना चाहिए. हिंसा नहीं होनी चाहिए. हमारे बच्चे बेरोजगार हैं, ऐसा लगता है जैसे लोग शरणार्थी बनते जा रहे हैं.''
नंदीग्राम में 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी बीजेपी के शुवेंदु अधिकारी से 1,956 वोटों से हार गई थीं. वहीं उनकी पार्टी ने राज्य में जीत हासिल की थी. साल 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, इस सीट पर बीजेपी को 8,200 वोटों की बढ़त मिली थी. नंदीग्राम में मतदान 23 अप्रैल को होना है. उसी दिन यह तय होगा कि इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में जीत किसकी होती है.
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