- ईरान युद्ध के कारण सुई, थर्मामीटर से लेकर बीपी मॉनिटर वगैरा के दाम 20 फीसदी तक बढ़ चुके हैं
- ईरान के पिस्ता, आलू बुखारा, किशमिश, अंजीर, खजूर, मामरा जैसे सूखे मेवों के दाम 30-40% तक बढ़ चुके हैं
- CTI चेयरमैन ने कहा कि युद्ध जारी रहा तो दिल्ली के उद्योग जगत का 5000 करोड़ का व्यापार प्रभावित हो सकता है
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग की तपिश अब रोजमर्रा की चीजों तक पहुंचने लगी है. कच्चे तेल की सप्लाई चेन बाधित होने का सीधा असर मेडीकल सेक्टर पर दिखने लगा है, जहां इलाज में इस्तेमाल होने वाली सुई, थर्मामीटर से लेकर बीपी मॉनिटर जैसी डिवाइस के दाम 20 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. आम इस्तेमाल की दवाओं का कच्चा माल महंगा होने से इनकी कीमतों में इजाफा हो सकता है. असर सिर्फ मेडिकल उपकरणों और दवाओं तक सीमित नहीं है. ड्राई फ्रूट्स के दामों में 30-40 पर्सेंट की तेजी आ गई है. ऑटो पार्ट्स भी महंगे हो गए हैं. युद्ध की वजह से दिल्ली के व्यापारियों और उद्योग जगत को 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार प्रभावित होने की आशंका सता रही है.
इंजेक्शन से BP मशीन तक 20% हुई महंगी
NDTV की टीम दिल्ली के सबसे बड़े दवा बाजार और मेडीकल उपकरणों के थोक मार्केट भागीरथ पैलेस पहुंची तो व्यापारियों और संगठनों में साफ चिंता नजर आई. ऑल इंडिया मेडिकल सर्जिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश भसीन ने बताया कि इंजेक्शन की सुई से लेकर बीपी मशीन तक की थोक कीमतों में 5 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है. हालांकि आम आदमी तक इसका प्रभाव आने में कुछ वक्त लग सकता है.
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फिलहाल थोक व्यापारियों पर असर
कीमतों में बढ़ोतरी की वजह बताते हुए मुकेश भसीन ने कहा कि दवाओं की पैकेजिंग और मेडिकल उपकरण में प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है, इसी की वजह से दामों पर असर दिख रहा है. मेडीकल उपकरणों के डीलर विनय पंगासा बताते हैं कि जब से युद्ध शुरु हुआ है, तभी से प्लास्टिक के दाने के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसका सीधा असर थर्मामीटर, सिरिंज और अन्य उपकरणों की लागत पर पड़ रहा है. मुकेश भसीन कहते हैं कि फिलहाल इस बढ़ोतरी का असर थोक व्यापारियों पर पड़ा है. आम आदमी अब भी इसके असर से दूर है, लेकिन अगर ये संकट बढ़ता है तब रिटेल सेक्टर पर भी इसकी आंच महसूस होगी.
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आम इस्तेमाल की दवाएं भी महंगी
पश्चिम एशिया संकट का असर दवाओं पर भी पड़ा है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन ब्रजेश गोयल बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में आम इस्तेमाल की दवाओं में शामिल पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत करीब 47 प्रतिशत तक बढ़ गई है. इसके अलावा दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनेक में 54 प्रतिशत, डाइक्लोफेनेक पोटेशियम में 33 प्रतिशत, अमॉक्सिसिलिन ट्राईहाइड्रेट में 45 प्रतिशत और सिप्रोफ्लॉक्सासिन की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत तक की तेजी आई है.

ड्राई फ्रूट्स के दामों में 30-40% का उछाल
इस युद्ध का असर केवल मेडीकल सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्राई फ्रूट्स से लेकर ऑटो पार्ट्स तक काफी महंगे हो गए हैं. ईरान के पिस्ता, आलू बुखारा, किशमिश, अंजीर, खजूर, मामरा जैसे सूखे मेवों के दाम 30-40% तक बढ़ चुके हैं. बहुत सारे जरूरी कच्चे माल, केमिकल कंपोनेंट, प्लास्टिक और एल्यूमिनियम की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर दवा कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है क्योंकि टैबलेट और सिरप के निर्माण के साथ-साथ उनकी पैकेजिंग में भी प्लास्टिक और एल्यूमिनियम का काफी उपयोग होता है.
व्यापारियों को 5000 करोड़ के नुकसान का डर
इसके अलावा निर्यातकों में भी चिंता है. UAE के प्रमुख शहर दुबई से होते हुए पश्चिमी एशिया के साथ यूरोप के देशों को भारतीय उत्पादों का निर्यात होता है. सप्लाई चेन संकट की वजह से चांदनी चौक, खारी बावली, भागीरथ प्लेस, कश्मीरी गेट, सदर बाजार जैसे मार्केट्स के व्यापारियों में चिंता है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि अगर युद्ध आगे भी जारी रहता है तो दिल्ली के व्यापार और उद्योग जगत का 5000 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार प्रभावित हो सकता है.
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