US Iran War and Donald Trump Politics: आज से लगभग 3 हफ्ते पहले जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जंग शुरू करने का ऑर्डर अपनी सेना को दिया था, उनके आंखों के पीछे हसीन सपने थे- ईरान में सत्ता परिवर्तन, इस्लामिक सरकार की जगह अमेरिका की पसंद की सरकार बनेगी. लेकिन आज जमीनी हकीकत इससे ठीक उलट है. तेहरान में अपने मुताबकि सरकार बैठाने निकले ट्रंप को खुद वाशिंगटन में विरोध झेलना पड़ रहा है. डोनाल्ड ट्रंप अब खुद सवालों के घेरे में हैं कि क्या उन्होंने झूठ बोलकर ईरान पर हमला किया. ट्रंप सरकार में आतंकनिरोधी दस्ता के चीफ के पद से इस्तीफा देने वाले जो केंट ने दावा किया है कि ईरान परमाणु बम बनाने के करीब नहीं था. जबकि यही बात बोलकर तो ट्रंप ने जंग की शुरुआत की थी. इतना ही नहीं शनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने ऐसा बयान दिया है जो ट्रंप को अंदर तक चुभ रही होगी.
आतंकनिरोधी दस्ता के पूर्व चीफ ने क्या कहा?
जंग के बीच जो केंट ने डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आतंकनिरोधी दस्ते के चीफ के पद से इस्तीफा दिया है. उन्होंने इस्तीफे के पीछे ईरान में जंग को लेकर अपने विरोध को वजह बताया है. इस्तीफे के एक दिन बाद जो केंट ने इजरायल को इस संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए दोषी ठहराया और दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बिल्कुल करीब नहीं था. केंट ने नेशनल काउंटरटेररिज़्म सेंटर के डॉयरेक्टर के रूप में काम किया था. अब उन्होंने अपने हाई-प्रोफाइल पद से इस्तीफा देने के फैसले पर चर्चा करने के लिए राइटविंग पॉडकास्टर टकर कार्लसन को एक विस्तृत इंटरव्यू दिया.
इस इंटव्यू में केंट ने कहा, “इजरायलियों ने इस कार्रवाई का फैसला आगे बढ़ाया, जबकि हमें पता था कि इससे घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू होगी, जिसका मतलब है कि ईरानी जवाबी कार्रवाई करेंगे.” उन्होंने दावा किया कि इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को “हौसला मिल गया था” कि वे युद्ध शुरू कर सकते हैं और अमेरिका को “बस प्रतिक्रिया देनी पड़ेगी.”
उन्होंने आगे कहा, “नहीं. जब यह शुरू हुआ तब तीन हफ्ते पहले भी वे उस स्थिति में नहीं थे, और जून में भी नहीं थे.” यह कहते हुए उन्होंने जून 2025 में अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर की गई बमबारी का जिक्र किया. केंट ने कहा कि 2004 से ईरान की इस्लामी सरकार के पास एक फतवा, यानी आदेश, मौजूद है जो उन्हें परमाणु हथियार विकसित करने से रोकता है. केंट ने कहा, “हमारे पास ऐसा कोई खुफिया इनपुट नहीं था कि उस फतवे की अवहेलना की जा रही थी.”
तुलसी गबार्ड का बड़ा बयान: 'ईरान का शासन अब भी बरकरार'
सिर्फ जो केंट का इस्तीफा ही नहीं अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड का यह बयान भी ट्रंप को चोट पहुंचा रहा है कि ईरानी शासन कमजोर हुआ है, लेकिन खत्म नहीं हुआ है. दरअसल अमेरिकी इंटेलिजेंस अधिकारियों ने सीनेटरों (अमेरिकी सांसदों) को बताया कि हाल के अमेरिकी अभियानों से ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताएं काफी कम हो गई हैं, लेकिन सरकार अभी बनी हुई है और अमेरिकी हितों और इलाके की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है.
तुलसी गबार्ड ने सीनेट सिलेक्ट इंटेलिजेंस कमेटी को बताया, "IC (इंटेलिजेंस कम्युनिटी) का अंदाजा है कि ईरान में सैन्य क्षमताओं पर हमलों की वजह से यह काफी हद तक कमजोर हो गया है. इसकी पारंपरिक सैन्य शक्ति दिखाने की क्षमता काफी हद तक खत्म हो गई है, जिससे विकल्प कम रह गए हैं." लेकिन साथ ही अधिकारियों ने चेतावनी दी कि तेहरान के पास समय के साथ अपनी सैन्य ताकत को फिर से बनाने का इरादा और क्षमता दोनों हैं.
उन्होंने कहा, "IC का अंदाजा है कि अगर कोई दुश्मन शासन (ईरानी सरकार) बचता है, तो वह शायद अपनी सैन्य, मिसाइलों और यूएवी फोर्स को फिर से बनाने के लिए सालों तक चलने वाली कोशिश शुरू करेगा."
ट्रंप बनाम इंटेलिजेंस
राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध को 'आसन्न खतरे' (Imminent Threat) से निपटने के लिए जरूरी बताया था, लेकिन गबार्ड ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह निष्कर्ष निकालना राष्ट्रपति का अपना फैसला है. उन्होंने खुद इस खतरे की पुष्टि नहीं की. गबार्ड ने कहा: "यह तय करना खुफिया एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है कि आसन्न खतरा क्या है और क्या नहीं. यह राष्ट्रपति पर निर्भर है."
उन्होंने कहा, "नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर का ऑफिस सभी खुफिया जानकारियों को कॉर्डिनेट और जमा करने में मदद करने के लिए जिम्मेदार है, ताकि राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ को उनके फैसलों के लिए सबसे अच्छी उपलब्ध जानकारी दी जा सके."
गबार्ड ने कहा, "अपने सामने मौजूद सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ईरान में मौजूद इस्लामी शासन हमारे लिए एक खतरा है. उन्होंने इसी निष्कर्ष के आधार पर कार्रवाई की."
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