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'पाकिस्तान तो चीन का क्लाइंट है': ईरान वार्ता में मुनीर-शहबाज की भूमिका पर अमेरिका के पूर्व NSA ने उठाए सवाल

US- Iran Talks and Pakistan Role: इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरे दौर आधिकारिक रूप से रद्द हो गया है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर को आगे बढ़ा दिया है.

'पाकिस्तान तो चीन का क्लाइंट है':  ईरान वार्ता में मुनीर-शहबाज की भूमिका पर अमेरिका के पूर्व NSA ने उठाए सवाल
US- Iran Talks and Pakistan Role: ईरान वार्ता में मुनीर-शहबाज की भूमिका पर अमेरिका के पूर्व NSA ने उठाए सवाल

US- Iran Talks and Pakistan Role: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकमास्टर ने ईरान से जुड़ी कूटनीतिक कोशिशों में पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पाकिस्तान को चीन का “क्लाइंट” बताते हुए उसकी मध्यस्थता पर संदेह जताया. IANS को दिए एक विशेष इंटरव्यू में मैकमास्टर ने कहा कि पाकिस्तान को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का करीबी सहयोगी माना जाना चाहिए; उनका मानना है कि ऐसे में ईरान-अमेरिका वार्ता में उसकी भूमिका को निष्पक्ष नहीं माना जा सकता. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता के दूसरे दौर को रद्द कर दिया.

मैकमास्टर ने चीन की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि बीजिंग की दिलचस्पी ईरान में मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने में है. “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक को सत्ता में बनाए रखने के लिए बेताब है,” उन्होंने कहा. उनके अनुसार, चीन का यह रुख क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अपने आर्थिक हितों से जुड़ा है.

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान की ओर से मध्यस्थता की पेशकश पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हो सकती. “इन वार्ताओं में मध्यस्थ बनने की पेशकश के पीछे कोई न कोई छिपा हुआ उद्देश्य हो सकता है,” मैकमास्टर ने कहा. पाकिस्तान की सुरक्षा नीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को “निराशाजनक” बताया. उनके अनुसार, पाकिस्तान अक्सर दोहरी नीति अपनाता है- एक तरफ वह आतंकवाद विरोधी सहयोग की बात करता है, वहीं दूसरी ओर विरोधी तत्वों को समर्थन देता है.

मैकमास्टर ने कहा कि भारत द्वारा लंबे समय से उठाए जा रहे ये मुद्दे नए नहीं हैं. “पाकिस्तान 1940 के दशक के अंत से ही आतंकवादी संगठनों को अपनी विदेश नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करता रहा है,” उन्होंने कहा. उन्होंने चीन-ईरान संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि बीजिंग की आर्थिक मदद तेहरान के लिए अहम है। “चीन ईरान के तेल का करीब 90 प्रतिशत खरीदता है, जिससे वहां की सरकार को वित्तीय सहारा मिलता है,” उन्होंने कहा. उनके मुताबिक, इससे ईरान अपनी क्षेत्रीय गतिविधियों को जारी रखने में सक्षम रहता है.

मैकमास्टर ने निष्कर्ष में कहा कि इन सभी कारकों को देखते हुए पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका को चीन की व्यापक रणनीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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