- ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के खिलाफ सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने का ऐलान किया है
- ईरान ने शांति वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिससे अमेरिका-ईरान बातचीत रुकी हुई है
- ट्रंप ने कहा कि होर्मुज में अमेरिका की नाकाबंदी जारी रहेगी, जबकि सीजफायर के दौरान सशस्त्र संघर्ष रोका जाएगा
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत तो हो नहीं पाई लेकिन थोड़ी राहत भरी खबर जरूर आ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर को बढ़ाने का ऐलान किया है. उन्होंने यह ऐलान तब किया जब पाकिस्तान में शांति वार्ता के दूसरे दौर के लिए आने से ईरान ने इनकार कर दिया और दो हफ्ते के सीजफायर को खत्म होने में सिर्फ एक दिन बाकी था. इस ऐलान से अमेरिका और ईरान की लड़ाई फिर से शुरू होने का खतरा फिलहाल टल गया है.
ट्रंप ने सीजफायर तब बढ़ाया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के दूसरे दौर की तैयारी पाकिस्तान कर रहा था. लेकिन ईरान की बेरुखी की वजह से बातचीत नहीं हो पाई. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद निकलने वाले थे, लेकिन ऐन मौके पर उनका दौरा भी टल गया.
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ट्रंप ने अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया सीजफायर
सीजफायर की घोषणा करते हुए ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया किया कि होर्मुज पर अमेरिका की नाकाबंदी जारी रहेगी.
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'ईरान की सरकार बुरी तरह से बंटी हुई है और इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपना हमला तब तक रोककर रखें जब तक कि उनके नेता या प्रतिनिधि कोई एक राय वाला प्रस्ताव लेकर नहीं आ जाते.'

उन्होंने आगे कहा कि 'इसलिए मैंने अपनी सेना को निर्देश दिया है कि वह नाकेबंदी जारी रखे और बाकी सभी मामलों में तैयार रहे. इसलिए मैं सीजफायर को तब तक बढ़ा रहा हूं, जब तक कि उनका प्रस्ताव नहीं आ जाता और बातचीत किसी न किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाती.'
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ट्रंप ने बताया- नाकाबंदी क्यों जारी रहेगी?
ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर को भले ही अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है लेकिन होर्मुज में नाकाबंदी अभी भी जारी रहेगी. बातचीत के लिए ईरान के न आने की सबसे बड़ी वजह यही नाकाबंदी है.
सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने बताया है कि सीजफायर के बावजूद उन्होंने नाकाबंदी क्यों नहीं हटाई. उन्होंने दावा करते हुए कहा, 'ईरान नहीं चाहता कि होर्मुज स्ट्रेट बंद हो. वे चाहते हैं कि यह खुला रहे ताकि वे रोजाना 500 मिलियन डॉलर कमा सकें और अगर यह बंद होता है तो उन्हें इतना ही नुकसान होगा. वे सिर्फ यह कहते हैं कि वे इसे बंद करना चाहते हैं, क्योंकि मैंने इसे पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया है. इसलिए वे बस अपनी 'इज्जत बचाना' चाहते हैं.'

ट्रंप ने आगे दावा किया, 'चार दिन पहले कुछ लोग मेरे पास आए और कहा- सर ईरान तुरंत होर्मुज को खुलवाना चाहता है. लेकिन अगर हम ऐसा करते हैं तो ईरान के साथ कभी कोई समझौता नहीं हो पाएगा, जब तक कि हम उनके बाकी पूरे देश को उनके नेताओं समेत उड़ा न दें.'
शहबाज ने ट्रंप का किया शुक्रिया
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत करवाने की भरपूर कोशिश की. लेकिन ईरान ने बातचीत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया था. इसके बाद जेडी वेंस का इस्लामाबाद दौरा भी रद्द हो गया.
हालांकि, ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के कुछ देर बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, 'अपनी और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तरफ से मैं राष्ट्रपति ट्रंप का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने हमारी उस गुजारिश को मान लिया, जिसमें हमने सीजफायर को आगे बढ़ाने की बात कही थी, ताकि चल रही कूटनीतिक कोशिशें अपना काम कर सकें.'
On my personal behalf and on behalf of Field Marshal Syed Asim Munir, I sincerely thank President Trump for graciously accepting our request to extend the ceasefire to allow ongoing diplomatic efforts to take their course.
— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) April 21, 2026
With the trust and confidence reposed in, Pakistan…
शहबाज शरीफ ने कहा, 'हम पर जताए गए भरोसे और विश्वास के साथ पाकिस्तान इस झगड़े को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपनी पूरी कोशिशें जारी रखेगा.'
उन्होंने आगे कहा, 'मुझे पूरी उम्मीद है कि दोनों पक्ष सीजफायर का पालन करते रहेंगे और इस झगड़े को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत के दूसरे दौर में एक पूरा शांति समझौता कर पाएंगे.'
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ईरान का क्या है कहना?
ट्रंप के एकतरफा सीजफायर ऐलान पर ईरान ने कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ के एडवाइजर ने कहा कि ट्रंप के सीजफायर का 'कोई मतलब नहीं' है.
वहीं, ईरानी सांसद महमूद नबावियन ने X पर कहा है कि अब से अमेरिका के साथ बातचीत करना पूरी तरह से 'नुकसानदेह और बेतुका' होगा. महमूद नबावियन उस प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा थे, जो इस्लाबाद में अमेरिका से बातचीत के लिए गया था.
ईरान की टॉप मिलिट्री कमांड खातम अल-अनबिया के प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर कोई हमला होता है तो ईरानी सेना पहले से तय लक्ष्यों पर हमला करके अमेरिका और इजरायल को और भी कड़ा सबक सिखाएगी.
नबावियन की पोस्ट और खातम अल-अनबिया के बयान में सीजफायर का कोई जिक्र नहीं था. अभी तक तक ईरान के विदेश मंत्रालय या उसके अधिकारियों की ओर से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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