- रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने मुस्लिमों के खिलाफ विवादित बयान दिया, कहा कुत्तों और मुसलमानों में चुनाव आसान
- फाइन के इस बयान पर डेमोक्रेट नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आलोचना करते हुए उनका विरोध जताया
- कैलिफोर्निया के गवर्नर और हाउस के अल्पसंख्यक नेता ने फाइन से इस्तीफा और पार्टी से कार्रवाई की मांग की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी यानी रिपब्लिकन के सांसद रैंडी फाइन की मुस्लिम विरोधी टिप्पणियों पर बवाल खड़ा हो गया है. रैंडी फाइन ने रविवार को कहा था कि “कुत्तों और मुसलमानों में से किसी एक को चुनना हो, तो यह कोई मुश्किल फैसला नहीं है.” अब कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट के नेताओं ने इसपर कड़ी आलोचना की है और अपना विरोध जताया है.
यह पहली बार नहीं है जब फाइन ने सीमा लांघते हुए मुसलमानों के खिलाफ बयान दिया है. वो लगातार ऐसे विवादों में रहे हैं. इस बार भी उन्होंने आलोचना को खारिज कर दिया है और सोशल मीडिया पर अपने बयान को और दोहराया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस ने पिछले साल फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद फाइन को मुस्लिम विरोधी कट्टरपंथी बताया था.
रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में फाइन ने कहा, “अगर हमें मजबूर किया जाए, तो हमारे लिए कुत्तों और मुसलमानों के बीच में से किसी एक को चुनना मुश्किल नहीं होगा.” खबर लिखे जाने तक इस पोस्ट को 4.25 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है.
If they force us to choose, the choice between dogs and Muslims is not a difficult one.
— Congressman Randy Fine (@RepFine) February 15, 2026
बयान पर मचा है बवाल
कई बड़े डेमोक्रेट नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम ने फाइन से इस्तीफा देने की मांग की, जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ्रीज ने फाइन को “इस्लामोफोबिक, घिनौना और बिना पछतावे वाला कट्टरपंथी” कहा है. जेफ्रीज ने यह भी कहा कि कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत रखने वाली रिपब्लिकन पार्टी को फाइन के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.
फाइन बार-बार ऐसी बाते करते हैं. उनने पुराने बयानों में अमेरिका से सभी मुसलमानों को बड़े पैमाने पर निकालने की मांग, मुसलमानों को “आतंकवादी” कहने और गाजा में फिलिस्तीनियों की भूख और मौत का मजाक उड़ाना भी शामिल है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हाल के वर्षों में अमेरिका में इस्लामोफोबिया बढ़ा है. इसके पीछे सख्त इमिग्रेश पॉलिसी, श्वेत वर्चस्ववादी बयानों का चलन और इजरायल-गाजा युद्ध का अमेरिकी समाज पर पड़ा असर जैसे कई कारण हैं.
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