विज्ञापन

अमेरिका आज 65 देशों के साथ करेगा आतंकवाद के '3 चेहरों' पर महत्वपूर्ण मीटिंग, भारत ने भी खोल रखा है मोर्चा

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस मीटिंग के लिए 70 से ज्यादा देशों को निमंत्रण भेजा गया. माना जा रहा है कि इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार भी इसमें शामिल होंगे. इसका मकसद आपसी तालमेल बढ़ाना, जानकारी साझा करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून लागू करने वाले तंत्र को मजबूत करना है.

अमेरिका आज 65 देशों के साथ करेगा आतंकवाद के '3 चेहरों' पर महत्वपूर्ण मीटिंग, भारत ने भी खोल रखा है मोर्चा
ट्रंप प्रशासन अब आतंकवाद को सभी स्तर पर समाप्त करने पर काम करना चाह रहा है. (फोटो क्रेडिट-AFP)
  • मार्को रुबियो 65 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के साथ आतंकवाद-विरोधी रणनीति पर महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं
  • ट्रंप प्रशासन ने 2026 की रणनीति में इस्लामी आतंकवाद, ड्रग कार्टेल और अति-वामपंथी आतंकवाद को मुख्य खतरा माना है
  • इस बैठक का उद्देश्य देशों के बीच तालमेल बढ़ाना, जानकारी साझा करना और कानून प्रवर्तन तंत्र को मजबूत बनाना है

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज एक बहुत महत्वपूर्व मीटिंग करने जा रहे हैं. इसमें 65 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. यह ट्रंप प्रशासन की एक मुख्य प्राथमिकता है. प्रशासन ने अपनी आतंकवाद-विरोधी रणनीति में तर्क दिया है कि ड्रग कार्टेल और इस्लामी आतंकवादी समूहों के साथ-साथ हिंसक वामपंथी चरमपंथी भी अमेरिका के लिए सबसे बड़ा आतंकवादी खतरा हैं. भारत इन तीनों पर पहले से काम कर रहा है. अब अमेरिका और ग्लोबल समर्थन मिलने से इस पर काम और तेज हो सकता है.

हिंसक वामपंथ पर अमेरिका कैसे हुए सख्त

ट्रंप प्रशासन की 2026 की आतंकवाद-विरोधी रणनीति में तीन मुख्य खतरों की पहचान की गई है. ये खतरे इस्लामिक आतंकवाद, नार्को आतंकवाद और अति-वामपंथी आतंकवाद हैं. रणनीति में कहा गया है कि वामपंथियों की तीसरी श्रेणी को पारंपरिक रूप से नजरअंदाज किया गया है. इसमें यह भी बताया गया है कि सितंबर 2025 में चार्ली किर्क की हत्या एक ऐसे कट्टरपंथी ने की थी, जो ट्रांसजेंडर से जुड़ी चरम विचारधाराओं को मानता था. 

किन्हें बुलाया गया है?

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस मीटिंग के लिए 70 से ज्यादा देशों को निमंत्रण भेजा गया. माना जा रहा है कि इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार भी इसमें शामिल होंगे. इसका मकसद आपसी तालमेल बढ़ाना, जानकारी साझा करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून लागू करने वाले तंत्र को मजबूत करना है. यह समिट इस साल की शुरुआत में हुई कई छोटी बैठकों के बाद हो रही है, जिनमें हेग में कानून लागू करने वाले अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक भी शामिल है. 

अति-वामपंथी आतंकवाद क्या है?

इस शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर सरकारें उन आंदोलनों के लिए करती हैं, जिन पर हिंसा का आरोप होता है और जो मार्क्सवाद, समाजवाद या अराजकतावाद जैसी वामपंथी विचारधाराओं से प्रेरित होते हैं. ऐसे आंदोलन आमतौर पर खुद को पूंजीवाद-विरोधी और साम्राज्यवाद-विरोधी बताते हैं. कोल्ड वॉर (शीत युद्ध) के दौरान लैटिन अमेरिका में कई वामपंथी सशस्त्र आंदोलन हुए. इनमें से कई ने लंबे समय तक राजनीतिक हिंसा के अभियान चलाए, जैसे कोलंबिया का 'रिवोल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेस ऑफ कोलंबिया' (FARC), अल साल्वाडोर का 'फाराबुंडो मार्टी नेशनल लिबरेशन फ्रंट' (FMNL) और उरुग्वे का 'तुपामारोस'. 20वीं सदी के दौरान, वाशिंगटन ने बार-बार ऐसी कट्टर दक्षिणपंथी सरकारों का समर्थन किया, जो पूरे लैटिन अमेरिका में वामपंथी आंदोलनों का विरोध करती थीं.

भारत लंबे समय से नक्सलियों से लड़ रहा

भारत लंबे समय से नक्सली विद्रोह से जूझ रहा है. यह एक अति-वामपंथी माओवादी आंदोलन है, जो 1960 के दशक में शुरू हुआ था और ग्रामीण आबादी के लिए लड़ने का दावा करता है. इस समूह को भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक माना जाता है. साल 2000 के आसपास, जब यह विद्रोह अपने चरम पर था, तब नक्सली संघर्ष के कारण हजारों लोग मारे गए थे. हाल ही में भारत सरकार ने इस पर लगभग पूरी तरह से काबू पा लिया है. इसी तरह भारत ने ड्रग कार्टेल के खिलाफ भी पूरी तरह मोर्चा खोल दिया है. वहीं इस्लामिक आतंकवाद से भारत कश्मीर में वर्षों से लड़ता आया है.

यह भी पढ़ें-

पाकिस्तान की सबसे बड़ी कॉपर और गोल्ड खदान के बंद होने का खतरा: रिपोर्ट

ईरान ने कुवैत पर किया ड्रोन हमला, दूर-दराज के क्षेत्रों तक सुनाई दी धमाकों की आवाज

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Terrorism, US Terror Report, Marco Rubio, Left Activists, World Hindi News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com