- कांग्रेस ने पंजाब के नेताओं चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं की है.
- संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पंजाब के विभिन्न नेताओं से मुलाकात कर कांग्रेस आलाकमान की रणनीति स्पष्ट की.
- अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष और चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है.
कांग्रेस में पंजाब को लेकर माथापच्ची अंत तक जारी रही. कांग्रेस आलाकमान के फैसले से नाराज बताए जा रहे चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी, दोनों ने मुलाकात नहीं की. आखिरकार दोनों नेताओं को संगठन महासचिव से ही मिलना पड़ा. इसके एक दिन पहले पंजाब के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल, जो पांच दिनों से चंडीगढ़ में थे और सभी धड़ों के नेताओं से मुलाकात कर चुके थे, अपनी रिपोर्ट के.सी. वेणुगोपाल को सौंपकर छत्तीसगढ़ लौट चुके हैं. कांग्रेस आलाकमान चन्नी और रंधावा से कितना नाराज है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि खरगे और राहुल गांधी ने उनसे मिलना भी मुनासिब नहीं समझा.
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने एक-एक कर पंजाब के नेताओं से मुलाकात की. मुलाकात करने वालों में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरजीत राणा, पूर्व ओलंपियन और विधायक परगट सिंह शामिल थे. बाद में विजय इंदर सिंगला भी के.सी. वेणुगोपाल से मिलने पहुंचे.
कांग्रेस आलाकमान की रणनीति साफ है. जाट सिख चेहरे के तौर पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष, दलित चेहरे चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष, सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का प्रमुख और हिंदू चेहरे विजय इंदर सिंगला को मेनिफेस्टो कमेटी का चेयरमैन बनाया गया. वहीं, परगट सिंह, अमर सिंह और राणा गुरजीत सिंह को भी अलग-अलग कमेटियों में जगह दी गई.
चन्नी और रंधावा नहीं माने और शक्ति प्रदर्शन किया
लेकिन इसके बाद भी चन्नी और रंधावा नहीं माने और चंडीगढ़ में बैठक बुलाकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया. चन्नी की इस बैठक में कुछ विधायक, कई पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री जैसे नेताओं ने शिरकत की. इसके बाद पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को चंडीगढ़ रवाना किया गया, जहां उन्होंने पांच दिनों तक नेताओं से मुलाकात करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी. नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर उन्होंने कहा कि "यह गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है."
हम पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहते : चरणजीत सिंह चन्नी
बैठक के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, "ऑल इज वेल. हम राहुल गांधी के सिपाही हैं. आलाकमान जो भी फैसला लेगा, वह हमें मंजूर होगा. इन सभी चीजों का मीडिया ट्रायल हुआ है, जो नहीं होना चाहिए. हम पार्टी को शर्मिंदा नहीं करना चाहते हैं." कुल मिलाकर, चन्नी से राहुल गांधी नहीं मिले और ऐसा लगता है कि कांग्रेस आलाकमान ने भी अपना फैसला वापस नहीं लिया है. हालांकि, इस पूरी बैठक और घटनाक्रम पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
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