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पाकिस्तान की सबसे बड़ी कॉपर और गोल्ड खदान के बंद होने का खतरा: रिपोर्ट

इस खतरे से पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी बड़ा झटका लग सकता है. इस खदान को चीन ही चला रहा है. अब अगर ये खदान बंद हो जाती है तो साफ हो जाएगा कि बलूचिस्तान चीन और पाकिस्तान के हाथ से निकल गया है.

पाकिस्तान की सबसे बड़ी कॉपर और गोल्ड खदान के बंद होने का खतरा: रिपोर्ट
सैंदक खदान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है. (फोटो क्रेडिट-सोशल मीडिया)
  • पाकिस्तान की सबसे बड़ी कॉपर और गोल्ड खदान सैंदक में विद्रोह के कारण उत्पादन रुकने का खतरा पैदा हो गया है
  • चीन की सरकारी कंपनी MCC सैंदक खदान को 2001 से 2037 तक लीज पर संचालित कर रही है और तांबा- सोना निर्यात करती है
  • पिछले साल सैंदक खदान से तांबे के निर्यात से पाकिस्तान को लगभग 750 मिलियन डॉलर की आय हुई थी

पाकिस्तान की सबसे बड़ी कॉपर और गोल्ड खदान के एक महीने के भीतर बंद होने का खतरा पैदा हो गया है. Mining.com के विश्लेषण के मुताबिक, पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय को भेजे गए एक पत्र में चेतावनी दी गई है कि बलूचिस्तान में उग्रवादी विद्रोह से सैंदक कॉपर-गोल्ड खदान का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अगर सुरक्षा हालात में सुधार नहीं हुआ, तो उत्पादन रुकने की आशंका है.

सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश

रिपोर्ट में कहा गया है कि खदान तक सामान पहुंचाने का मुख्य जरिया यानी सड़क मार्ग अब और भी असुरक्षित हो गया है. ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रांत में अलगाववादी उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों, बुनियादी ढांचे और विदेशी प्रोजेक्ट्स पर हमले बढ़ा दिए हैं. इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि प्रांतीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को माइनिंग साइट्स, कर्मचारियों, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन के लिए सुरक्षा मजबूत करने का निर्देश दिया गया है.

चीन के पास है लीज पर खदान

खनिजों से भरपूर बलूचिस्तान में स्थित सैंदक खदान को 2001 से चीन की सरकारी कंपनी 'मेटालर्जिकल कॉरपोरेशन ऑफ चाइना' (MCC) चला रही है. यह लीज 2037 तक के लिए है. इस खदान से निकलने वाले ज्यादातर तांबे और सोने का निर्यात चीन को किया जाता है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले साल इस खदान से तांबे के निर्यात से पाकिस्तान को लगभग 750 मिलियन डॉलर की कमाई हुई थी.

दूसरे प्रोजेक्ट पर भी मंडराया खतरा

सुरक्षा चिंताओं ने बैरिक माइनिंग के प्रस्तावित 9 बिलियन डॉलर के 'रेको डिक' कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट पर भी असर डाला है. यह प्रोजेक्ट सैंदक से लगभग 50 किलोमीटर दूर है और कंपनी आगे बढ़ने से पहले इलाके में सुरक्षा से जुड़े जोखिमों की समीक्षा कर रही है. चीन ने 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के तहत पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया है, जिसमें कई इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग प्रोजेक्ट बलूचिस्तान में हैं.

हालांकि, चीनी नागरिकों और संपत्तियों पर बार-बार हुए हमलों ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है और बीजिंग ने इस्लामाबाद पर अपने प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा मजबूत करने का दबाव डाला है. यह ताजा चेतावनी पाकिस्तान की ओर से अपने विशाल खनिज भंडारों को विकसित करने की कोशिशों के सामने आ रही बढ़ती चुनौतियों को उजागर करती है, क्योंकि बलूचिस्तान में दुनिया के कुछ सबसे बड़े तांबे और सोने के भंडार मौजूद हैं.

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