Parenting Trends China: चीन के हेनान प्रांत में एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिल रहा है, जहां एक ब्लॉगर हाथ में लाउडस्पीकर लिए गलियों में घूमता है और जिद्दी बच्चों को 'रीसाइकिल' (second-hand brat recycling) करने की बात कहता है. सोशल मीडिया पर 'अंकल ए जून' (Uncle A Jun) के नाम से फेमस 39 साल के यान झेंगजुन (Yan Zhengjun) का ये अंदाज आजकल चीनी पेरेंट्स का सबसे पसंदीदा पैंतरा बन चुका है. जब बच्चे फोन की लत, खाना न खाने या दांत न साफ करने की जिद करते हैं, तो पेरेंट्स उन्हें 'अंकल ए जून' के वीडियो दिखाकर डराते हैं. ये तरीका इतना फेमस हो चुका है कि इंटरनेट पर लोग इन्हें शराती बच्चों का 'दुश्मन' कहने लगे हैं. वहीं दूसरी ओर बच्चों के मेंटल हेल्थ पर इसके असर को लेकर बहस भी शुरू हो गई है.

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जिद्दी बच्चों को 'रीसाइकिल' करने की कोशिश (Unique Initiative to Recycle Naughty Kids)
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के मुताबिक, यान का ये सफर तब शुरू हुआ जब उनके एक दोस्त ने अपने बच्चे की कहना न मानने वाली आदत से तंग आकर मजाक में कहा कि, 'काश कोई इसे कुछ दिनों के लिए ले जाकर समझा पाता.' इसी बात को पकड़कर यान ने पुराना ओवरकोट पहना, एक रेहड़ी ली और लाउडस्पीकर पर ऐलान करना शुरू कर दिया कि, अगर कोई बच्चा फोन गेम का आदी है या रोता-धोता है, तो उसे 'रीसाइकिल' के लिए भेज दें. इस वीडियो सीरीज के बाद उनके लगभग 16 लाख फॉलोअर्स बन गए हैं और पेरेंट्स कमेंट्स में अपने बच्चों की नई-नई शिकायतें भेजकर ऐसे ही वीडियो बनाने की मांग करने लगे हैं.

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इंटरनेट पर छिड़ी बहस (Chinese blogger recycling videos)
जहां एक तरफ पेरेंट्स के लिए ये वीडियो कम खर्च में राहत पाने (बच्चों को समझाने) का जरिया बन गए हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने बच्चों के मेंटल हेल्थ को लेकर चिंता जताई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने बच्चों को डराने के कारण यान के वीडियो पर कुछ समय के लिए रीच भी घटा दी थी, जिसके बाद उन्होंने नए वीडियो बनाना बंद कर दिया था. इस पर सिचुआन प्रांत की एक प्राइमरी स्कूल टीचर का मानना है कि, ये तरीका पेरेंट्स को मेंटल पीस तोदेता है, लेकिन ये कभी भी पेरेंट्स की अपनी समझ और प्यार भरी सीख का विकल्प नहीं हो सकता.
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समय के साथ बदला तरीका (Changing Approach with Time)
यान का कहना है कि वे अपने इस अकाउंट से कोई कमाई नहीं करते और न ही कोई विज्ञापन बेचते हैं, उनका ये काम सिर्फ पार्ट टाइम है. समय बीतने के साथ जो बच्चे बचपन में इन वीडियो से डरते थे, अब बड़े होकर समझ चुके हैं कि यह सब सिर्फ एक एंटरटेनमेंट का हिस्सा था. अब यान बच्चों को अस्पताल में इंजेक्शन लगवाते वक्त रोने की छूट देने जैसे वीडियो बनाकर पॉजिटिव मैसेज भी दे रहे हैं, ताकि बच्चों का डर खत्म हो सके.
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