ब्रिटेन ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Deal) को सुरक्षित करने में मदद करने के लिए नेट माइग्रेशन (Immigration Plan) में बदलाव नहीं करने की बात कही है. प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak)के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि ब्रिटेन की भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को सुरक्षित करने में मदद करने के लिए Net Migration को कम करने के लिए अपने दृष्टिकोण को बदलने की कोई योजना नहीं है. G20 समिट में शिरकत करने के लिए सुनक भारत आ रहे हैं. वह 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में रहेंगे.
समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, G20 समिट के लिए भारत जा रहे ऋषि सुनक ने इस सप्ताह अपने मंत्रियों से कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन वह केवल एक दृष्टिकोण पर सहमत होंगे जो पूरे ब्रिटेन के लिए काम करे.
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जून में व्यापार मंत्री केमी बडेनोच ने कहा कि ब्रिटेन व्यापार वार्ता के हिस्से के रूप में अस्थायी व्यापार वीजा पर चर्चा करेगा, लेकिन व्यापक आप्रवासन प्रतिबद्धताओं या भारतीय श्रमिकों के लिए ब्रिटेन के श्रम बाजार तक पहुंच पर चर्चा नहीं करेगा.
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री का मानना है कि माइग्रेशन का मौजूदा स्तर बहुत ज्यादा है. स्पष्ट रूप से कहूं तो इस मुक्त व्यापार समझौते को हासिल करने के लिए हमारी माइग्रेशन पॉलिसी में बदलाव की कोई योजना नहीं है. इसमें स्टूडेंट वीजा भी शामिल हैं. गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने पिछले साल व्यापार वार्ता में भारतीय प्रवासियों के संभावित प्रभाव के बारे में टिप्पणी करके विवाद खड़ा कर दिया था, जिसमें उन्होंने “भारत के साथ किसी भी खुली सीमा प्रवासन नीति” और वीजा से अधिक समय तक रहने वालों के साथ चिंता व्यक्त की थी.
हालांकि, ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोरियास्वामी ने कहा कि ब्रिटिश प्रेस में यह धारणा थी कि भारत अधिक वीजा चाहता है, लेकिन भारतीय मीडिया में नहीं. उन्होंने टाइम्स रेडियो से कहा, ‘हमने कभी नहीं कहा कि वीजा हमारी मांग का हिस्सा है.'
उन्होंने कहा कि इसके बजाय भारत ने कंपनियों के लिए ब्रिटेन और भारतीय नागरिकों को एक देश से दूसरे देश में ले जाने के लिए आसान रास्ते तलाशे. “हम प्रवासियों से यहां आने में सक्षम होने के लिए नहीं कह रहे हैं.”
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