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शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने पर ट्रंप ने पिल्लै की आलोचना करने वाले पोस्ट को रीपोस्ट किया

इस पोस्ट में पिल्ले को "नफरत करने वाला" बताया गया और नोबेल पुरस्कार का भी अपमान किया गया है. ये पोस्ट डेविड शोएन की तरफ से किया गया, जो एक अमेरिकी वकील हैं.

शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने पर ट्रंप ने पिल्लै की आलोचना करने वाले पोस्ट को रीपोस्ट किया
ट्रंप को इस बार नोबेल पीस प्राइज मिलने की बहुत उम्मीद थी, लेकिन वो पूरी नहीं हुई. (स्रोत-एनडीटीवी)
  • नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के तुरंत बाद उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के साथ इसे शेयर करने की बात कही
  • पोस्ट में पिल्लै पर अमेरिका और इजरायल से नफरत करने तथा आतंकवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया था
  • ट्रंप ने इस साल नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की उम्मीद भी जताई थी

नवी पिल्लै के लिए बज रही तालियां अभी थमी भी नहीं थीं कि उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता के तौर पर अपनी पहली बात कही. ये बात डोनाल्ड ट्रंप के बारे में थी. एमनेस्टी इंटरनेशनल के सेक्रेटरी जनरल द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में, जिसमें उनके लिए तालियां बज रही थीं, पिल्लै ने कहा, "अगर आप थोड़ी और तालियां बजाएंगे, तो हो सकता है कि मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ बांट लूं!" अब इस पर ट्रंप की प्रतिक्रिया आई है, मगर वह बिल्कुल भी हल्के-फुल्के अंदाज में नहीं है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट री-पोस्ट किया. इस पोस्ट में पिल्ले को "नफरत करने वाला" बताया गया और नोबेल पुरस्कार का भी अपमान किया गया है. ये पोस्ट डेविड शोएन की तरफ से किया गया, जो एक अमेरिकी वकील हैं और फ़ेडरल क्रिमिनल डिफ़ेंस और सिविल राइट्स लॉ के विशेषज्ञ हैं. उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे सीनेट महाभियोग ट्रायल के दौरान उनकी बचाव टीम का हिस्सा रहने के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है. 

क्या लिखा है पोस्ट में

पोस्ट में लिखा है, 'आज नोबेल कमिटी ने UN की नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार देकर खुद को बुरी तरह शर्मिंदा किया है और कभी बहुत सम्मानजनक रहे इस पुरस्कार का अपमान किया है. पिल्लै खुलेआम अमेरिका और इजरायल से नफरत करती हैं. अपने पद पर रहते हुए उन्होंने आतंकवादियों का समर्थन किया और हमास को बढ़ावा दिया. उन्होंने एक झूठी "जांच" की, जिसमें दावा किया गया कि इजरायल ने नरसंहार किया है और उन पर मुकदमा चलाने की मांग की. किसी भी सामान्य दायरे में उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है और उन्होंने शांति को बढ़ावा देने के लिए कभी कुछ नहीं किया. बल्कि इसके ठीक उल्टा किया है, लेकिन उस कमिटी से और क्या उम्मीद की जा सकती है, जिसने पहले कभी बहुत प्रतिष्ठित रहे शांति पुरस्कार को यासर अराफात को दिया था?'

इसके बाद पोस्ट में लिखा था, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने हमें अब्राहम समझौते दिए, जिनके बारे में दुनिया कहती थी कि यह असंभव है, और अब वह उन्हें आगे बढ़ा रहे हैं! जब सब कुछ निराशाजनक लग रहा था, तब वह बंधकों को सुरक्षित वापस लाए! वह रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजक ईरान को रोकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, और आतंकवादियों की कब्जा करने की तमाम कोशिशों के बावजूद वह गाजा को फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसी और भी कई बातें हैं. नोबेल शांति पुरस्कार का मकसद इन्हीं तरह के कामों को पहचानना और उनके लिए सम्मान देना था!!!' 

ट्रंप ने खुद तो पिल्लै पर कुछ नहीं लिखा मगर इस पोस्ट को री-पोस्ट कर ये बता दिया कि वो इन बातों से सहमत हैं.

ट्रंप को इस बार थी पुरस्कार की पूरी उम्मीद

शांति के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा से पहले ट्रंप ने बुधवार रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, 'अब समय आ गया है. लेकिन पिछली बार इसे पाने वाले व्यक्ति से इसे अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करके मुझे बहुत सम्मान महसूस हुआ था. उन्होंने कहा था कि इतिहास में राष्ट्रपति ट्रंप से ज्यादा इसका कोई और हकदार नहीं है.' दरअसल, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने जनवरी 2026 में अपना 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रंप को सौंप दिया था. वेनेजुएला में अमेरिकी मदद के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने ऐसा किया था. 
पिछले साल जनवरी में पद संभालने के बाद से ट्रंप अक्सर कहते हैं कि 'आठ संघर्षों को रुकवाने में उनकी अहम भूमिका रही है और इसलिए उन्हें यह पुरस्कार मिलना चाहिए.'

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