- रजा पहलवी ने कहा कि ईरान में लड़ाई अवैध कब्जे और स्वतंत्रता के बीच है, और वह नेतृत्व के लिए लौटेंगे
- ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर देश को बर्बाद करने और असहमति दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया
- अली खामेनेई ने अमेरिकी और इजरायली साजिशों को विफल बताया और ट्रंप को दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराया
ईरान के निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी ने पोस्ट किया, "आज ईरान में जो लड़ाई चल रही है ,वह अवैध कब्जे और स्वतंत्रता के बीच है. ईरानी जनता ने मुझे नेतृत्व करने के लिए बुलाया है. मैं ईरान लौटूंगा." इससे पहले फॉक्स न्यूज से खास इंटरव्यू में निर्वासित प्रिंस पहलवी से सवाल किया गया कि पहले वह ईरान में अमेरिका के सैन्य दखल का विरोध करते रहे हैं तो अब क्यों उनके विचार बदल गए हैं? इस पर पहलवी ने कहा कि जब कोई सरकार अपनी ही जनता का नरसंहार करने लगे, अपने ही लोगों के खिलाफ जंग छेड़ दे, निहत्थे नागरिकों पर सेना से गोलीबारी कराए तो कोई भी मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहेगा.
Iran's exiled crown prince Reza Pahlavi posts,
— Press Trust of India (@PTI_News) January 18, 2026
"The battle in Iran today is between occupation and liberation. The Iranian people have called for me to lead.
I will return to Iran." pic.twitter.com/Nrwgl32ccq
पहलवी ने आगे कहा कि ईरान के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय भूमिका को लेकर रजा पहलवी ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का भी संकेत देते हुए कहा कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों और हथियारों से लैस सेना के बीच कोई बराबरी नहीं है. ऐसे में उस दमनकारी ताकत को बेअसर करने के लिए बाहरी मदद की जरूरत है. पहलवी ने अमेरिकी हस्तक्षेप को राष्ट्र के लोगों द्वारा खुद को आजाद करने में मदद करार दिया और स्पष्ट किया कि वो ईरान पर किसी विदेशी हमले के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि ईरानी जनता को सशक्त बनाने के लिए अतिरिक्त सहायता मांग रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब केवल निंदा करने के बजाय ईरान में ठोस कदम उठाने की जरूरत है.
नई लीडरशिप का समय: ट्रंप
ईरान में गहराते संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दशकों लंबे शासन को समाप्त करने की मांग की और कहा कि लगातार जारी जन आंदोलन और असंतोष के बीच इस मुल्क को नए नेतृत्व की जरूरत है. ट्रंप ने कहा, "ईरान में नई लीडरशिप खोजने का समय आ गया है." उन्होंने यह टिप्पणी इस्लामिक देश में हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद कही. ये प्रदर्शन राजनीतिक दमन, आर्थिक कठिनाइयों और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर लोगों के गुस्से के कारण हो रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "उन्होंने जो सबसे अच्छा फैसला लिया, वह यह था कि दो दिन पहले 800 से ज्यादा लोगों को फांसी नहीं दी." अमेरिकी राष्ट्रपति ने तर्क दिया कि ईरान की मौजूदा लीडरशिप सत्ता में बने रहने के लिए दमन पर निर्भर है. ट्रंप ने अयातुल्ला अली खामेनेई पर देश को पूरी तरह से बर्बाद करने और असहमति को दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
ट्रंप ने कहा, "भले ही देश बहुत निचले स्तर पर ही क्यों न हो, लीडरशिप को अपने देश को ठीक से चलाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि कंट्रोल बनाए रखने के लिए हजारों लोगों को मारना चाहिए." इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपना स्वयं का एक उदाहरण दिया. उन्होंने आगे कहा कि नेतृत्व सम्मान पर आधारित होता है, डर और मौत पर नहीं. ट्रंप ने खामेनेई को एक 'बीमार व्यक्ति' बताते हुए कहा कि ईरान की बुरी हालत उसकी मौजूदा लीडरशिप का नतीजा है. उन्होंने कहा कि ईरान के शासकों की वजह से ही यह देश 'कहीं भी रहने के लिए सबसे खराब जगह' बन गया है.
खामेनेई का दावा, अमेरिकी साजिश समाप्त
वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने कहा है कि ईरान ने एक बार फिर संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल को मात दी है. उनका कहना था कि वॉशिंगटन और तेल अवीव की ओर से भड़काई गई साजिश को ईरान ने पूरी तरह समाप्त कर दिया है. एक धार्मिक अवसर पर दिए गए भाषण में खामेनेई ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने ईरान में अशांति फैलाने की योजना बनाई थी, ताकि वह ईरान को अपने नियंत्रण में ले सके. न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान में हाल के दंगों में हुई हत्याओं और तबाही के लिए जिम्मेदार "अपराधी" बताया. खामेनेई के अनुसार ट्रंप ने खुले तौर पर बयान दिए, दंगाइयों का समर्थन किया और यहां तक कि सैन्य मदद देने की बात भी कही. खामेनेई ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन देश के भीतर और बाहर अशांति फैलाने वालों को सज़ा देने से पीछे भी नहीं हटेगा.
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