अमेरिकी और चीनी राष्ट्राध्यक्षों डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच चीन के बीजिंग में हुई हाई प्रोफाइल मुलाकात में ईरान युद्ध, यूक्रेन संकट, व्यापार, टेक्नोलॉजी जैसे बड़े मुद्दों के बीच कुछ ऐसे पल भी आए जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया.
बैठक की शुरुआत में ट्रंप ने शी जिनपिंग की जमकर तारीफ की और बोले कि दोनों एक दूसरे को लंबे समय से जानते हैं और मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी साथ मिलकर रास्ता निकालते रहे हैं.
ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, “आपका दोस्त होना मेरे लिए सम्मान की बात है.”
फिर वे बोले कि फोन पर हम दोनों बातें करते रहते हैं और हमारे बीच संबंध शानदार रहे हैं.
लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि शी जिनपिंग ने ट्रंप की तरह गर्मजोशी वाला भाव नहीं दिखाया. जिनपिंग साफ लहजों में बोले- अमेरिका और चीन को प्रतिद्वंद्वी नहीं साझेदार बनना चाहिए.
जानकारों के मुताबिक यह चीन की ओर से एक संतुलित और नियंत्रित संदेश था.
जिनपिंग विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपने सबसे करीबी दोस्त पहले ही बता चुके हैं.
🇨🇳 🇺🇸 🇹🇼 Trump and Xi hold high-stakes talks in China
— AFP News Agency (@AFP) May 14, 2026
US President Donald Trump and Chinese counterpart Xi Jinping met in Beijing for a closely watched summit that covered thorny issues including Taiwan, but yielded few concrete outcomes in its opening phase. Trump's trip to… pic.twitter.com/9Fy1CTJsvx
ट्रंप को नहीं मिला ‘बिग फैट हग'
ट्रंप ने अप्रैल में सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में कहा था कि बीजिंग पहुंचने पर शी जिनपिंग उन्हें 'गर्मजोशी भरा बड़ा हग' करेंगे.
लेकिन गुरुवार को जो हुआ, वह बिल्कुल अलग था.
बीजिंग पहुंचने पर ट्रंप को सिर्फ एक लंबा और औपचारिक हैंडशेक मिला. करीब 10 सेकंड तक चले इस हैंडशेक में ट्रंप ने शी की बांह थपथपाई, लेकिन चीनी राष्ट्रपति पूरी तरह संयमित और औपचारिक दिखे.
यह दृश्य दोनों नेताओं की अलग-अलग राजनीतिक शैली का प्रतीक माना गया. एक तरफ ट्रंप का खुला और नाटकीय अंदाज, दूसरी तरफ शी जिनपिंग की बेहद नियंत्रित और शांत बॉडी लैंग्वेज.
जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात में हर मुस्कान, हर हैंडशेक और हर बयान एक राजनीतिक छिपाए हुए है. अमेरिका और चीन के रिश्ते फिलहाल व्यापार, टेक्नोलॉजी, ताइवान, युद्ध और वैश्विक प्रभुत्व जैसे मुद्दों से तनावपूर्ण बने हुए हैं. ऐसे में ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात आने वाले वर्षों की वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती है.
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