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सारे पत्ते हमारे पास, एक भी पैसा नहीं मिलेगा... शांति समझौते पर ईरान को जेडी वेंस की दो टूक

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पर जेडी वेंस ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक वह सभी परमाणु पाबंदियों को पूरी तरह नहीं मानता, उसे अमेरिका से कोई आर्थिक मदद नहीं मिलेगी.

सारे पत्ते हमारे पास, एक भी पैसा नहीं मिलेगा... शांति समझौते पर ईरान को जेडी वेंस की दो टूक
  • ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने किए साइन
  • अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान को डील पूरी तरह मानने तक कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा
  • वेंस ने बताया कि ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमता पूरी तरह तबाह हो चुकी है

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता हो चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने समझौते पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं. इस डील के बाद अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि ईरान जब तक डील को पूरी तरह नहीं मानता, तब तक उन्हें इसका फायदा नहीं मिलेगा. अमेरिका से ईरान को एक पैसा नहीं मिलेगा. सारे पत्ते हमारे पास हैं, पूरी तरह पालन न करने तक ईरान को इसका कोई फायदा नहीं होगा.

'ईरान की सैन्य क्षमता तबाह'

जेडी वेंस ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमता तबाह हो चुकी है. वेंस ने समझौते के शुरुआती फायदे गिनाते हुए कहा कि इस डील का अमेरिकी लोगों को असली फायदा हुआ है. बीती रात 12.5 मिलियन बैरल तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा. यह जंग शुरू होने के बाद से सबसे ज्यादा है. तेल की कीमतें लगभग युद्ध से पहले के लेवल पर आ गई हैं. युद्ध के बाद पहली बार आज गैस की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ गईं. तेल की कीमतें अभी और गिरेंगी.हैं.

'यह डील 2015 से समझौते से अलग'

ईरान को चेतावनी देते हुए वेंस ने कहा कि ईरान या तो व्यवहार बदले या फिर आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर बना रहे. समझौते में दिए गए 60 दिनों के अल्टीमेटम को लेकर उन्होंने कहा कि 60 दिनों की घड़ी शुरू हो गई है. ईरान को निरीक्षण और परमाणु पाबंदियां मानना पड़ेगा. वेंस ने दावा किया कि यह समझौता 2015 के समझौते से अलग है. खाड़ी देश इस बार ट्रंप के समझौते के साथ हैं.

उन्होंने कहा कि सैन्य स्तर पर कुछ बातें हमेशा सच रहेंगी. चाहे ईरानी बाकी डील मानें या नहीं. लेकिन उनका न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से तबाह हो गया है.उनकी एनरिचमेंट कैपेसिटी और न्यूक्लियर फैसिलिटी खत्म हो गई हैं. उनकी कन्वेंशनल मिलिट्री भी खत्म हो गई है. अपने पड़ोसियों को धमकाने की उनकी क्षमता काफी हद तक खत्म हो गई है. अब हम देखेंगे कि वे इस शांति समझौते के कितने पॉइंट्स को मानने को तैयार हैं.

'शर्तें नहीं मानेंगे तो एक भी पैसा ईरान को नहीं मिलेगा'

वेंस ने कहा कि इस MOU का जो हिस्सा मीडिया के कुछ हिस्सों ने सबसे ज्यादा गलत तरीके से दिखाया है, वह यह है कि ईरानियों को ये सारे फायदे मिलेंगे. आप 300 बिलियन डॉलर या 24 बिलियन डॉलर जैसे नंबर सुनेंगे. सीधी सी बात यह है कि ईरानियों को ये सारे रिसोर्स तभी मिलेंगे, जब वे डील की सारी शर्तों को मानेंगे और अपना बर्ताव बदलेंगे. जब तक वो ऐसा नहीं करेंगे तब तक अमेरिका एक भी पैसा ईरान को नहीं देगा. यह अमेरिकी लोगों और राष्ट्रपति के लिए एक जीत है.

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लेखक के बारे में
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अनुभव शाक्य
Chief sub editor
NDTV इंडिया में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. पिछले करीब 5 वर्षों से मेनस्ट्रीम की पत्रकारिता में सक्रिय हैं. इस दौरान ज़ी न्यूज़, नवभारत टाइम्स और ह... और पढ़ें
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