अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 3 दिन की यात्रा पर बुधवार को चीन पहुंच गए हैं. उनकी इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें हैं. लेकिन एक देश है, जिसका इस यात्रा को लेकर दिल जोर-जोर से धड़क रहा है. ये देश है ताइवान. ताइवान पर चीन की लंबे अरसे से नजर है. अब ताइवान को डर सता रहा है कि ट्रंप अपनी डील करने के लिए कहीं चीन से ऐसा कोई समझौता न कर लें, जो उसकी सुरक्षा और संप्रभुता को दांव पर लगा दे.
चीन यात्रा पर पहुंचे ट्रंप का क्या है इरादा?
ट्रंप 9 साल में अपनी दूसरी चीन यात्रा पर पहुंचे हैं. इस दौरान दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के प्रमुखों की 7वीं बार आमने-सामने की बातचीत होगी. वैसे तो इस यात्रा का मकसद व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और टैरिफ को लेकर चले रहे तनाव को खत्म करना बताया जा रहा है. लेकिन पर्दे के पीछे कई और अहम मुद्दे चर्चा में हैं.
The arrival everyone has waited for. 🇺🇸🇨🇳 pic.twitter.com/B1DTgI9HKR
— The White House (@WhiteHouse) May 13, 2026
ताइवान पर लंबे समय से चीन की नजर
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग लंबे समय से ताइवान को अपना बनाने का सपना देखते रहे हैं. वह कह चुके हैं कि ताइवान को चीन का हिस्सा बनने से कोई नहीं रोक सकता, भले ही इसके लिए सैन्य कार्रवाई क्यों न करनी पड़े. चीन की वन चाइना पॉलिसी में ताइवान को उसका हिस्सा बताया जाता है. अमेरिका चीन की वन चाइना पॉलिसी को स्वीकार करता है, लेकिन आधिकारिक रूप से ताइवान पर चीन के अधिकार को उसने कभी मंजूरी नहीं दी है.
ताइवान Vs ताइवान Vs चीन
अमेरिका के ताइवान से गहरे संबंध हैं. ताइवान की सुरक्षा इस बात पर टिकी है कि चीन में यह डर बना रहे कि अगर हमला किया तो अमेरिका बीच में आ जाएगा. हालांकि इसे लेकर अमेरिका का कोई साफ रुख नहीं है. ट्रंप ने पिछले साल कहा था कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे वादा किया है कि जब तक वह (ट्रंप) सत्ता में हैं, चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा. सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से आशंका जताई है कि यह मुद्दा इस बार ट्रंप और जिनपिंग की बैठक में उठ सकता है.
ताइवान पर सौदेबाजी कर सकता है चीन
ताइवान के अधिकारी वैसे तो कह रहे हैं कि उन्हें अमेरिका से अपने मजबूत संबंधों पर पूरा भरोसा है. हालांकि कई नेता खासकर विपक्षी नेताओं को डर है कि चीन ट्रंप से बातचीत के दौरान ताइवान डील को सौदेबाजी के हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है. उन्हें लग रहा है कि ट्रंप ताइवान पर चीन से कुछ समझौता न कर लें.

ताइवान के कई नेताओं को डर है कि अगर ट्रंप ने ईरान से युद्ध खत्म कराने में चीन की मदद मांगी तो वह बदले में ताइवान को लेकर सौदेबाजी कर सकता है. चीन अपनी बात मनवाने के लिए ताइवान के हितों से समझौता करने का दबाव डाल सकता है. ये लगभग तय माना जा रहा है कि ट्रंप से मुलाकात के दौरान जिनपिंग ताइवान का मुद्दा जरूर उठाएंगे और उस पर अपना हक जताएंगे.
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अमेरिका-ताइवान बड़ी आर्म्स डील
एक चिंता अमेरिका और ताइवान के बीच पिछले साल हुई 11 बिलियन डॉलर की बड़ी आर्म्स डील को लेकर भी है. इस डील में 82 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम, 420 आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम, 60 होवित्जर तोपें, जेवलिन व TOW मिसाइल, हार्पून मिसाइल किट के अलावा इनके उपकरण और अन्य हथियार शामिल हैं.

इस डील को लेकर चीन ने सख्त आपत्ति जताई थी, जो ताइवान को वन चाइना पॉलिसी के तहत अपना हिस्सा बताता है. ताइवान को डर है कि चीन के साथ कोई डील करने के चक्कर में ट्रंप इस हथियार सौदे ठंडे बस्ते में न डाल दें. वैसे भी अभी तक अमेरिका ने डील के तहत हथियारों की सप्लाई शुरू नहीं की है.
अमेरिका का इनकार, पर ट्रंप का भरोसा नहीं!
सीएनएन के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी हालांकि ताइवान को लेकर अपनी नीतियों में किसी तरह के बदलाव से इनकार कर रहे हैं. अमेरिका के लिए ताइवान वैसे भी कई मायने में बहुत अहम हैं. लेकिन ऐसी आशंकाएं हैं कि ट्रंप जाने-अनजाने में, बड़बोलेपन में या अपने काम बनाने के लिए कोई ऐसा कदम न उठा लें जो ताइवान के हितों को दांव पर लगा दे. ट्रंप के पल-पल बदलते रुख को देखते हुए पहले से कुछ कहना मुश्किल है.
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