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यूपी पंचायत चुनाव में देरी के पीछे वजह क्या? हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार से तलब किए रिकॉर्ड

UP Panchayat Election:बेंच ने राज्य सरकार से रिकॉर्ड तलब किए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौजूदा पंचायत चुनाव पांच वर्ष की अवधि समाप्त होने से पहले क्यों नहीं कराए जा सके.

यूपी पंचायत चुनाव में देरी के पीछे वजह क्या? हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार से तलब किए रिकॉर्ड
यूपी पंचायत चुनाव में देरी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी.
  • यूपी पंचायत चुनाव में देरी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्ती दिखाई है
  • लखनऊ बेंच ने योगी सरकार से इसे लेकर पूरा रिकॉर्ड मांगा है
  • कोर्ट ने कहा कि अगली बार पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया कार्यकाल खत्म होने से दो साल पहले शुरू की जानी चाहिए
लखनऊ:

उत्तर प्रदेश में  त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हो रही देरी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार से पूरा रिकॉर्ड मांगा है. बेंच ने पंचायत चुनाव समय से कराने की प्रक्रिया में हुई देरी पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगली बार पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया कार्यकाल खत्म होने से कम से कम दो साल पहले शुरू की जानी चाहिए. बता दें कि यूपी की पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था. 

पंचायत चुनाव पहले क्यों नहीं कराए गए?

पीठ ने राज्य सरकार से रिकॉर्ड तलब किए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौजूदा पंचायत चुनाव पांच वर्ष की अवधि समाप्त होने से पहले क्यों नहीं कराए जा सके. कोर्ट ने कहा कि वह यह भी देखना चाहता है कि चुनाव कराने में देरी के पीछे राज्य सरकार के नियंत्रण से बाहर की कोई परिस्थिति थी या फिर सरकार ने समय पर चुनाव कराने के अपने दायित्व का निर्वहन नहीं किया.

कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना जरूरी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है. इसके समाप्त होने से पहले नए चुनाव कराना आवश्यक है. पीठ ने कहा कि इस संवैधानिक व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव प्रक्रिया पर्याप्त समय पहले शुरू करना जरूरी है.

11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

पीठ ने यह भी कहा कि उसने चुनाव प्रक्रिया में देरी से संबंधित कुछ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड देखे हैं. इन रिकॉर्ड को अगली सुनवाई पर फिर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए. अदालत इन रिकॉर्ड के आधार पर यह भी जांचेगी कि मई-2025 में प्रक्रिया शुरू किए जाने के बावजूद चुनाव समय पर क्यों नहीं कराए जा सके. मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी.

पहले मई-जून में प्रस्तावित थे यूपी पंचायत चुनाव

यूपी पंचायत चुनाव पहले मई-जून में प्रस्तावित थे, लेकिन फाइनल वोटर लिस्ट तैयार ही नहीं थी. यह लिस्ट 10 जून को जारी की गई. इसके अलावा ओबीसी आयोग जिलेवार पिछड़ा वर्ग की आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन की समीक्षा कर रहा था, ताकि जिलावार आरक्षण की सिफारिश की जा सके. 

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