
कोलंबो:
श्रीलंकाई विदेश मंत्री जीएल पेइरिस ने कहा है कि देश संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में पेश होने वाले अमेरिका समर्थित प्रस्ताव के अंतिम मसौदे को खारिज करेगा जिसमें कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए देश को ‘अपमानित’ करके उसे ‘अलग-थलग’ करने की मांग की गई है।
पेइरिस ने प्रस्ताव पर श्रीलंका का रुख पेश करते हुए सदस्य देशों को भेजे संदेश में कहा, ‘‘श्रीलंका की स्थिति की ओर असंगत ध्यान आकर्षित करना और देश को अपमानित करने और उसे अलग-थलग करने के लिए प्रस्ताव पेश करना श्रीलंका की वर्तमान सुलह समझौता प्रक्रिया के लिए अनुपयोगी और प्रतिकूल है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जैसे श्रीलंका मानवाधिकार परिषद के पिछले प्रस्ताव को मान्यता नहीं देता वैसे ही वह नये प्रस्ताव को भी खारिज करता है। श्रीलंका का इरादा है कि मानवाधिकार परिषद में 21 मार्च 2013 को प्रस्ताव का मसौदा पेश किए जाने पर वह मतदान कराने का अनुरोध करेगा।’’
श्रीलंका ने गत वर्ष भारत के समर्थन से पारित प्रस्ताव को खरिज कर दिया था। पेइरिस ने कहा, ‘‘श्रीलंका चाहता है कि मानवाधिकार परिषद के सदस्य देश इस प्रस्ताव पर अपनी समझ मतदान के समय व्यक्त करें।’’ उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव से विघटनकारी ताकतों को लाभ होगा जो श्रीलंका में कड़ी मेहनत से प्राप्त शांति को अस्थिर करना चाहते हैं।
पेइरिस ने चेतावनी दी कि ‘‘श्रीलंका पर अमेरिका समर्थित प्रस्ताव जैसे दखल देने वाली, पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित कार्रवाइयों की परंपरा से आगे जाकर सभी देशों के लिए खतरा उत्पन्न होगा।
अमेरिका समर्थित प्रस्ताव का ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, इटली, नार्वे, ब्रिटेन और कनाडा जैसे यूरोपीय संघ के सदस्य देश सहसमर्थन कर रहे हैं।
अमेरिका ने ‘यूनीवर्सल पीरियोडिक रिव्यू’ सिफारिशों को श्रीलंका द्वारा खारिज किये जाने पर निराशा जतायी थी, जिसमें श्रीलंका से आह्वान किया गया था कि वह स्वयं के सुलह समझौता समूह ‘लेसंस लन्र्ट एंड रिकांसिलिएशल कमीशन’ की सिफारिशों को लागू करे।
इस बीच श्रीलंकाई अधिकारियों ने यहां आज कहा कि संभावना है प्रस्ताव को कमजोर किया जाएगा ताकि भारत का समर्थन प्राप्त किया जा सके।
पेइरिस ने प्रस्ताव पर श्रीलंका का रुख पेश करते हुए सदस्य देशों को भेजे संदेश में कहा, ‘‘श्रीलंका की स्थिति की ओर असंगत ध्यान आकर्षित करना और देश को अपमानित करने और उसे अलग-थलग करने के लिए प्रस्ताव पेश करना श्रीलंका की वर्तमान सुलह समझौता प्रक्रिया के लिए अनुपयोगी और प्रतिकूल है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जैसे श्रीलंका मानवाधिकार परिषद के पिछले प्रस्ताव को मान्यता नहीं देता वैसे ही वह नये प्रस्ताव को भी खारिज करता है। श्रीलंका का इरादा है कि मानवाधिकार परिषद में 21 मार्च 2013 को प्रस्ताव का मसौदा पेश किए जाने पर वह मतदान कराने का अनुरोध करेगा।’’
श्रीलंका ने गत वर्ष भारत के समर्थन से पारित प्रस्ताव को खरिज कर दिया था। पेइरिस ने कहा, ‘‘श्रीलंका चाहता है कि मानवाधिकार परिषद के सदस्य देश इस प्रस्ताव पर अपनी समझ मतदान के समय व्यक्त करें।’’ उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव से विघटनकारी ताकतों को लाभ होगा जो श्रीलंका में कड़ी मेहनत से प्राप्त शांति को अस्थिर करना चाहते हैं।
पेइरिस ने चेतावनी दी कि ‘‘श्रीलंका पर अमेरिका समर्थित प्रस्ताव जैसे दखल देने वाली, पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित कार्रवाइयों की परंपरा से आगे जाकर सभी देशों के लिए खतरा उत्पन्न होगा।
अमेरिका समर्थित प्रस्ताव का ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, यूनान, इटली, नार्वे, ब्रिटेन और कनाडा जैसे यूरोपीय संघ के सदस्य देश सहसमर्थन कर रहे हैं।
अमेरिका ने ‘यूनीवर्सल पीरियोडिक रिव्यू’ सिफारिशों को श्रीलंका द्वारा खारिज किये जाने पर निराशा जतायी थी, जिसमें श्रीलंका से आह्वान किया गया था कि वह स्वयं के सुलह समझौता समूह ‘लेसंस लन्र्ट एंड रिकांसिलिएशल कमीशन’ की सिफारिशों को लागू करे।
इस बीच श्रीलंकाई अधिकारियों ने यहां आज कहा कि संभावना है प्रस्ताव को कमजोर किया जाएगा ताकि भारत का समर्थन प्राप्त किया जा सके।
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