- ईरान में लगातार बिगड़ते मानवाधिकार हालात पर UNHRC का विशेष सत्र आज शाम (IST 6.30 बजे से) जिनेवा में होगा.
- 21 सदस्य और 30 पर्यवेक्षक देशों ने बैठक का समर्थन किया. इस विशेष सत्र को बेहद अहम माना जा रहा है.
- बैठक के केंद्र में महिलाओं, प्रदर्शनकारियों और मीडिया अधिकारों की स्थिति पर चिंता. कड़े कदम उठाने का अनुमान.
ईरान में लगातार बिगड़ते मानवाधिकार हालात पर अब पूरी दुनिया की नजर टिक गई है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने 23 जनवरी 2026 यानी आज ईरान पर एक खास आपात सत्र बुलाने का फैसला किया है. ये बैठक जिनेवा स्थित पैले दे नेशन्स में भारतीय समयानुसार शाम साढ़े छह बजे शुरू होगी जिसका सीधा प्रसारण संयुक्त राष्ट्र की सभी आधिकारिक भाषाओं में किया जाएगा. इस विशेष सत्र की मांग 20 जनवरी को आइसलैंड ने जर्मनी, नॉर्थ मैसेडोनिया, मोल्डोवा और ब्रिटेन के साथ मिलकर रखी थी.
नियम के मुताबिक, UNHRC के 47 सदस्य देशों में से कम से कम 16 का समर्थन जरूरी होता है, लेकिन इस बार अब तक 21 सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया है. इनमें फ्रांस, जापान, इटली, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड्स और स्पेन जैसे देश शामिल हैं.
इतना ही नहीं, परिषद में मौजूद 30 पर्यवेक्षक देशों ने भी इस कदम का समर्थन किया है. कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे, स्वीडन, जर्मनी और यूक्रेन जैसे देशों के समर्थन से साफ है कि ईरान के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता काफी गहरी हो चुकी है.

Photo Credit: AFP
ईरान पर 2022 में भी हुई थी आपात बैठक
UNHRC अधिकारियों के मुताबिक, यह परिषद का 2006 में गठन होने के बाद 39वां विशेष सत्र होगा. इससे पहले 24 नवंबर 2022 को भी ईरान में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की स्थिति को लेकर आपात बैठक हुई थी. उस समय महसा अमीनी की मौत के बाद उठे प्रदर्शनों और सरकारी कार्रवाई ने वैश्विक स्तर पर भारी चिंता पैदा की थी.
इस बार की बैठक ऐसे वक्त हो रही है जब ईरान में विरोध प्रदर्शन करने वालों की गिरफ्तारियां, मीडिया पर सख्ती, महिलाओं के अधिकारों पर पाबंदियां और अल्पसंख्यकों के साथ कथित भेदभाव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि ईरान में हिरासत के दौरान यातना, जबरन स्वीकारोक्ति और निष्पक्ष सुनवाई से इनकार जैसी घटनाएं बढ़ी हैं.
कूटनीतिक हलकों में इस विशेष सत्र को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए परिषद ईरान से जवाब मांग सकती है, स्वतंत्र जांच की सिफारिश कर सकती है या फिर नए निगरानी तंत्र बनाने पर विचार कर सकती है. हालांकि ईरान पहले भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगाए गए आरोपों को खारिज करता रहा है और इन्हें अपने आंतरिक मामलों में दखल बताता रहा है.
फिलहाल इतना तय है कि 23 जनवरी को जिनेवा में होने वाली यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक चर्चा नहीं होगी, बल्कि यह तय करेगी कि ईरान में मानवाधिकार हालात पर वैश्विक समुदाय आगे कूटनीतिक दबाव, जांच या किसी नए अंतरराष्ट्रीय कदम की दिशा में क्या रुख अपनाता है.
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