कोलंबो:
श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने पूर्व सेना प्रमुख सरत फोंसेका की रिहाई का आदेश दिया। इससे दो साल से कारावास में बंद फोंसेका की रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया। राष्ट्रपति के प्रवक्ता बंडुला जयशेखरा ने संवाददाताओं से कहा कि राजपक्षे ने कतर रवाना होने से पहले फोंसेका की रिहाई आदेश संबंधी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया।
दस्तावेजों को राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ गामिनी सेनारथ को सौंप दिया गया, ताकि न्याय मंत्रालय को कल सौंपा जा सके, जिससे फोंसेका की रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की जा सकेंगी। राजपक्षे शनिवार की रात कतर की राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए। फोंसेका फिलहाल तीन साल के कारावास की सजा काट रहे हैं। उन्हें हाई कोर्ट ने ‘व्हाइट फ्लैग’ मामले में दोषी ठहराया है।
फोंसेका की रिहाई की उम्मीद उस वक्त बढ़ गई थी, जब उनकी पत्नी अनोमा फोंसेका ने कहा था कि राजपक्षे ने सेना प्रमुख को रिहा करने की इच्छा जताई है। फोंसेका को इस हफ्ते उस मामले में जमानत मिल गई, जिसमें उनपर सैन्य भगोड़ों को शरण देने का आरोप लगाया गया था।
लिट्टे के साथ लड़ाई में सरकारी बलों को मिली जीत का श्रेय तत्कालीन सेना प्रमुख फोंसेका को दिया जाता है। हालांकि, लड़ाई खत्म होने के तुरंत बाद उनका सेना के कमांडर-इन-चीफ से मतभेद हो गया था। राजपक्षे ने फोंसेका को हिरासत में लेने का आदेश 2010 के राष्ट्रपति चुनाव में पूर्व सेना प्रमुख को हराने के तुरंत बाद दिया था।
दस्तावेजों को राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ गामिनी सेनारथ को सौंप दिया गया, ताकि न्याय मंत्रालय को कल सौंपा जा सके, जिससे फोंसेका की रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की जा सकेंगी। राजपक्षे शनिवार की रात कतर की राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए। फोंसेका फिलहाल तीन साल के कारावास की सजा काट रहे हैं। उन्हें हाई कोर्ट ने ‘व्हाइट फ्लैग’ मामले में दोषी ठहराया है।
फोंसेका की रिहाई की उम्मीद उस वक्त बढ़ गई थी, जब उनकी पत्नी अनोमा फोंसेका ने कहा था कि राजपक्षे ने सेना प्रमुख को रिहा करने की इच्छा जताई है। फोंसेका को इस हफ्ते उस मामले में जमानत मिल गई, जिसमें उनपर सैन्य भगोड़ों को शरण देने का आरोप लगाया गया था।
लिट्टे के साथ लड़ाई में सरकारी बलों को मिली जीत का श्रेय तत्कालीन सेना प्रमुख फोंसेका को दिया जाता है। हालांकि, लड़ाई खत्म होने के तुरंत बाद उनका सेना के कमांडर-इन-चीफ से मतभेद हो गया था। राजपक्षे ने फोंसेका को हिरासत में लेने का आदेश 2010 के राष्ट्रपति चुनाव में पूर्व सेना प्रमुख को हराने के तुरंत बाद दिया था।
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