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This Article is From Apr 14, 2026

साउथ अफ्रीका ने जिम्बाब्वे को 8 नरकंकाल और पत्थर की चिड़िया क्यों वापस किए? जानिए इसकी वजह

दक्षिण अफ्रीका ने जिम्बाब्वे को 8 नरकंकाल और एक पवित्र पत्थर की चिड़िया वापस किए हैं. यह कदम औपनिवेशिक काल के दौरान हुई सांस्कृतिक लूट को सुधारने की दिशा में उठाया गया.

साउथ अफ्रीका ने जिम्बाब्वे को 8 नरकंकाल और पत्थर की चिड़िया क्यों वापस किए? जानिए इसकी वजह

साउथ अफ्रीका ने जिम्बाब्वे को 8 नरकंकाल और पत्थर की चिड़िया (Zimbabwe Bird) वापस किए हैं.  ज़िम्बाब्वे पक्षी वहां का राष्ट्रीय निशान है, जिसे जिम्बाब्वे के लोग पवित्र मानते हैं. जिम्बाब्वे पक्षी की सदियों पुरानी पत्थर की नक्काशी 100 साल से भी पहले औपनिवेशिक दौर में ली गई थी. यह केवल ऐतिहासिक चीजों की वापसी नहीं है, बल्कि यह औपनिवेशिक विरासत को सुधारने की एक बड़ी कोशिश है.

इन प्रतीकों की होगी स्टडी

केप टाउन म्यूजियम में हैंडओवर के लिए एक इवेंट में जिम्बाब्वे के झंडे में लिपटे आठ ताबूत रखे गए थे और इसमें दोनों देशों के अधिकारी शामिल हुए थे. अधिकारियों ने कहा कि इंसानी अवशेषों के बारे में बहुत कम जानकारी थी, सिवाय इसके कि उन्हें रिसर्च के लिए गलत तरीके से खोदकर निकाला गया था. जिम्बाब्वे सरकार के प्रतिनिधि रेवरेंड पॉल डमासाने ने कहा कि जिम्बाब्वे वापस आने के बाद उनकी और स्टडी की जाएगी और उन्हें जहां वे हैं, वहीं लौटा दिया जाएगा.

19वीं सदी में ब्रिटिश खोजकर्ता ले गए थे

अधिकारियों ने कहा कि जिम्बाब्वे के पक्षी की सोपस्टोन नक्काशी, 11वीं से 13वीं सदी में बने ग्रेट जिम्बाब्वे के पुराने कॉम्प्लेक्स के पत्थर के खंडहरों से लूटी गई कई मूर्तियों में से पहली थी. 19वीं सदी के आखिर में एक ब्रिटिश खोजकर्ता ने इसे इसके आधार से उखाड़कर ब्रिटिश माइनिंग के बड़े नाम सेसिल जॉन रोड्स को बेच दिया था, जो 1890-1896 तक केप कॉलोनी के प्रधानमंत्री थे.

साउथ अफ्रीका के संस्कृति मंत्रालय ने कहा, 'पहली मूर्ति को सेसिल जॉन रोड्स को बेचे जाने के लगभग 140 साल बाद, वही मूर्ति आखिरकार अपने घर लौट रही है.' अधिकारियों ने कहा कि साउथ अफ्रीका में जो दूसरी मूर्तियां थीं, उन्हें 1980 में पुरानी ब्रिटिश कॉलोनी की आजादी के अगले साल लौटा दिया गया था. असली पक्षियों की ऊंचाई करीब 13 इंच होती है और ज्यादातर एक मीटर से ज्यादा ऊंचे पत्थर के खंभों पर बैठे होते थे.

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