- ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन किया था, लेकिन बच्चे इसका उल्लंघन कर रहें
- पैरेंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर क्यूस्टोडियो के आंकड़ों के अनुसार, बैन के बाद सोशल मीडिया उपयोग पहले की तरह बढ़ रहा
- 13 से 15 वर्ष के लगभग 26 प्रतिशत बच्चे टिकटॉक का उपयोग कर रहे हैं, जो प्रतिबंध से पहले के स्तर के समान है
आप भले नियम-कानून बना लो, लेकिन अगर हमें वह मंजूर नहीं तो हम नहीं मानेंगे... यह तेवर ऑस्ट्रेलिया के जेन अल्फा बच्चों ने दिखा दिए हैं. ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दुनिया में सबसे सख्त माने जाने वाले सोशल मीडिया बैन लगाए गए थे. लेकिन इसके बावजूद ये बच्चे इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे ऐप का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार पैरेंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर बनाने वाली एक कंपनी के आंकड़ों से बुधवार, 25 अगस्त को यह जानकारी सामने आई.
ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर में ऐसा कानून लागू किया था, जिसके तहत बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था. इसके बाद ब्रिटेन, फ्रांस और कुछ अन्य देशों ने भी ऐसे कदम उठाए.
पहले तो कम हुआ, अब बच्चों ने कानून ताक पर रख दिए
पैरेंटल कंट्रोल ऐप क्यूस्टोडियो के आंकड़ों के मुताबिक, जब यह कानूनी रोक पहली बार लागू हुई थी, तब बच्चों का सोशल मीडिया इस्तेमाल सभी प्लेटफॉर्म पर कम हो गया था. लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया का इस्तेमाल फिर बढ़ने लगा. कुछ ऐप के मामले में यह बैन लगने से पहले के स्तर के करीब पहुंच गया है. क्यूस्टोडियो के आंकड़ों के अनुसार, 10 से 12 साल और 13 से 15 साल के बच्चों में टिकटॉक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट का इस्तेमाल बढ़ रहा है.
क्यूस्टोडियो की ग्लोबल ऑनलाइन सेफ्टी एक्सपर्ट यास्मिन लंदन ने कहा कि हो सकता है कि बच्चे VPN के जरिए इन प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहे हों या अपनी उम्र छिपा रहे हों. उन्होंने कहा, "लेकिन यह भी बहुत आसान वजह हो सकती है कि बच्चे इन ऐप का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि ये पाबंदियां काम नहीं कर रही हैं."
आंकड़ों में यह भी सामने आया कि बच्चे तेजी से मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप (WhatsApp) का इस्तेमाल कर रहे हैं. व्हाट्सऐप इस बैन के दायरे में नहीं आता है. ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों का कहना है कि इस बैन का मकसद बच्चों को ऑनलाइन बुलिंग और 'बच्चों को निशाना बनाने वाले एल्गोरिदम' से बचाना है. हालांकि, जून में भी छपी एक स्टडी में ऑस्ट्रेलिया के रिसर्चर्स की एक टीम ने कहा कि इस बात के बहुत कम सबूत मिले हैं कि बैन के कारण बच्चों ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली है.
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