- अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते सऊदी अरब के तेल उत्पादन में तीन दशकों में सबसे गंभीर गिरावट देखी गई है
- खाड़ी क्षेत्र के बाहर के देशों ने उत्पादन बढ़ाकर वैश्विक तेल सप्लाई में कमी को कुछ हद तक पूरा किया है
- होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के प्रवाह में भारी कमी आई है और मध्य पूर्व के बाहर के देशों की भूमिका बढ़ी है
अमेरिका-ईरान संघर्ष के असर के केंद्र में सऊदी अरब आ गया है. दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश अपने तेल सेक्टर में भारी रुकावटों का सामना कर रहा है, और कच्चे तेल का उत्पादन तीन दशकों से भी ज्यादा समय में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है.
फरवरी 2026 में संघर्ष शुरू होने के बाद, सऊदी अरब के कच्चे तेल के उत्पादन में युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में 3.86 मिलियन बैरल प्रति दिन (mb/d) की गिरावट आई. नवंबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच उत्पादन लगभग 10.1 mb/d पर स्थिर था, लेकिन मार्च में यह गिरकर 7.76 mb/d हो गया और अगस्त में और घटकर 6.24 mb/d पर आ गया, जो 1990 के बाद से सबसे निचला स्तर है.
सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हो रहे हमलों के बीच यह गिरावट आई है. सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) ने हाल ही में बताया कि हूती मिलिशिया लगातार सऊदी अरब के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय संपत्तियों को निशाना बना रहे हैं. एक अलग बयान में, सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (जो पूर्वी सऊदी अरब से रेड सी तक कच्चा तेल ले जाती है) पर 10 सितंबर को हमला किया गया था.
तो कहां से आ रही सप्लाई
इस रुकावट ने ग्लोबल ऑयल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि सऊदी अरामको ने कुछ भारतीय रिफाइनरियों को सप्लाई रोक दी है और कई यूरोपीय ग्राहकों के लिए आवंटन कम कर दिया है, जिससे सऊदी अरब की एक्सपोर्ट क्षमता पर दबाव का पता चलता है. हालांकि, जहां खाड़ी क्षेत्र के उत्पादक सप्लाई में रुकावट से जूझ रहे हैं, वहीं इस क्षेत्र के बाहर के तेल उत्पादकों ने इस कमी को कुछ हद तक पूरा करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं.
खाड़ी देशों का दबदबा कम हुआ
टकराव शुरू होने के छह महीने बाद भी, खाड़ी देशों से तेल का उत्पादन और निर्यात काफी सीमित बना हुआ है. अगस्त में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह औसतन सिर्फ 7.6 mb/d रहा, जो युद्ध से पहले के स्तर से लगभग 13.1 mb/d कम है. हालांकि, असल सप्लाई की कमी उतनी नहीं है जितनी निर्यात में आई गिरावट से पता चलती है.
IEA के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में 2.2 mb/d और तीसरी तिमाही में 1.7 mb/d की कमी रहने का अनुमान है. चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग मुश्किल होती जा रही थी, इसलिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने जितना हो सके उतना कच्चा तेल ऐसे रास्तों से भेजा, जो इस मुश्किल रास्ते से होकर नहीं गुजरते. खाड़ी देशों में उत्पादन पर दबाव बना हुआ है, इसलिए ग्लोबल ऑयल मार्केट में संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी अब मध्य पूर्व से दूर के उत्पादक देशों पर ज्यादा आ रही है.
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