इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर 'अल नीनो' का सबसे ज्यादा दक्षिण भारत के राज्यों पर पड़ा है. भारत मौसम विभाग के मुताबिक, 18 सितम्बर तक सबसे कम बारिश दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में दर्ज की गई है, जहां जून से अब तक औसत से 28% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. शुक्रवार को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों की रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस में प्रभावित राज्यों के साथ इस विषय पर विस्तार से चर्चा के बाद कहा कि इस साल अल नीनो का इफेक्ट कई जगह दिखाई दे रहा है. विशेषकर साउथ जोन में अल नीनो का प्रभाव बाकी देश के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है. कई हमारे राज्य ऐसे हैं, जो प्रभावित हुए हैं. साउथ में कुल मिलकर 143 जिले हैं. उनमें से 104 में बारिश कम रिकॉर्ड हुई है. 37 डिस्ट्रिक्ट्स में नॉर्मल रेस है और सिर्फ दो जिले ऐसे हैं, जहां बारिश एक्सेस हुई है.
अल नीनो का मॉनसून पर असर
- आंध्र प्रदेश में 24 डिस्ट्रिक्ट्स ऐसे हैं, जहां बारिश कम हुई है.
- रायलसीमा में 50% तक कम बारिश हुई है.
- कर्नाटक में 27 डिस्ट्रिक्ट्स ऐसे हैं, जहां बारिश की कमी है
- केरलम के 8 जिलों में एवरेज से कम बारिश हुई है
- तमिलनाडु में 24 डिस्ट्रिक्ट्स हैं, तेलंगाना में 20 डिस्ट्रिक्ट्स ऐसे हैं जहां बारिश काफी कम हुई है
- पुडुचेरी में भी एक जिला ऐसा है
इस मॉनसून सीजन के दौरान बारिश की कमी के पीछे एक अहम वजह 'अल नीनो' है. भारत मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत अल-नीनो (El Niño) की स्थिति बनी हुई है और आने वाले महीनों में इन स्थितियों के और मजबूत होने की उम्मीद है. ग्लोबल वेदर पर नजर रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो आने वाले महीनों में एक अत्यंत शक्तिशाली घटना में तब्दील हो जाएगा. इसकी वजह से दुनियाभर में बारिश और तापमान के पैटर्न पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा और बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी का खतरा बढ़ेगा.
El NINO का बढ़ता खतरा
अल नीनो मजबूती से स्थापित हो चुका है और इसके और अधिक मजबूत होने की संभावना है. WMO के फोरकास्ट के अनुसार, फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की लगभग 100% संभावना है. प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में असाधारण रूप से गर्म परिस्थितियां इसके और अधिक तीव्र होने में सहायक हैं.एक अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो विश्व भर में वर्षा और तापमान के पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, और चरम मौसम की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है.
सम्मेलन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी के साथ-साथ तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के कृषि मंत्रियों ने भाग लिया. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिणी राज्यों की रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस में प्रभावित राज्यों के कृषि मंत्रियों से इसके असर से निपटने के लिए उनकी रणनीति और तैयारी की समीक्षा की. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने जिन ज़िलों में बारिश कम हुई है वहां अल नीनो के प्रभाव पर चर्चा की. इससे निपटने के लिए कंटिंजेंसी प्लान बनाए गए हैं. ग्राउंड वाटर का लेवल नीचे जा रहा है. जिन इलाकों में मोटर से पानी खींचके बोरवेल्स या कुओं से सिंचाई होती है, वहां अंडरग्राउंड वाटर की कमी के कारण दिक्कतें आ सकती हैं इसलिए प्रभावित राज्यों के साथ मिलके कंटिंजेंसी प्लान के तहत कम पानी में कौन सी फसल हो सकती है, कम दिनों की क्रॉप कौन सी हो सकती है जो कम समय में आ जाए, उसके बीज कौन से होंगे, वैरायटी कौन सी होंगी, सीड्स कौन से होंगे, ये चिन्हित करने का काम हमने किया है. भारत सरकार ने एक सीड बैंक भी बनाया है जिसका जरूरत पड़ने पर उपयोग किया जा सके. हम सब मिलके अल नीनो के संकट का भी, अगर उसका इफेक्ट ज्यादा हुआ, तो मुकाबला करेंगे"।
भारत मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में एक साइक्लोन आने की संभावना है. कृषि मंत्रालय का आकलन है कि इसकी वजह से मॉनसून के जाते-जाते दक्षिण भारत के राज्यों में अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे बारिश की कमी की स्थिति कुछ थोड़ी सुधरेगी.अब तैयारी रबी सीजन के दौरान भी अल नीनो के असर से निपटने पर है. कृषि मंत्रालय ने 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित किया है, जिसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री अपने-अपने रबी सीजन का पूरा प्लान पेश करेंगे. इस कांफ्रेंस में तय होगा कि रबी सीजन के दौरान कौन-कौन सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी. इसके आधार पर बीज की उपलब्धता, फर्टिलाइजर की आवश्यकता और अन्य जरूरी संसाधनों का आकलन किया जाएगा.
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