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सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा सऊदी पाइपलाइन की तबाही का मंजर, दुनिया को फिर सताने लगा तेल का डर

अगर सऊदी अरब रेड सी (लाल सागर) तक जाने वाली एक अहम पाइपलाइन को फिर से चालू नहीं करता है, तो कुछ ही दिनों में उसके पास एक्सपोर्ट के लिए तेल खत्म हो सकता है. इससे ग्लोबल सप्लाई में 4 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा सऊदी पाइपलाइन की तबाही का मंजर, दुनिया को फिर सताने लगा तेल का डर
सऊदी अरब से लाल सागर तक जाने वाली मुख्य पाइपाइन पर बना पंपिंग स्टेशन ड्रोन अटैक में तबाह हो चुका है
  • सऊदी अरब की प्रमुख ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर बने पंपिंग स्टेशन को ड्रोन हमले में भारी क्षति पहुंची है
  • अब इस पंपिंग स्टेशन की सैटेलाइट तस्वीर सामने आई है जिसमें तबाही का मंजर नजर आ रहा है
  • सऊदी अरब के तेल निर्यात में कमी आ सकती है जिससे वैश्विक तेल सप्लाई में 4% की गिरावट होने का खतरा है

मिडिल ईस्ट की जंग के बीच अभी सऊदी अरब झुलस रहा है. सऊदी अरब से रेड सी यानी लाल सागर तक जाने वाली मुख्य पाइपाइन पर बना पंपिंग स्टेशन ड्रोन अटैक में तबाह हो चुका है और इसकी सैटेलाइट तस्वीर सामने आई है. अब तो सऊदी के तेल खरीदारों और व्यापारियों का कहना है कि अगर इस मुख्य पाइपलाइन को फिर से चालू नहीं किया, तो सऊदी के पास एक्सपोर्ट के लिए तेल का स्टॉक ही खत्म हो जाएगा. इससे ग्लोबल सप्लाई में 4% तक की कमी आ सकती है.

सामने आई सैटेलाइट तस्वीर

रविवार रात जारी सैटेलाइट तस्वीरों में शुक्रवार को हुए ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब की अहम 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर बना एक पंपिंग स्टेशन बुरी तरह जला और क्षतिग्रस्त दिखाई दिया. इस सैटेलाइन तस्वीर को वैंटर ने जारी किया है जो अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी है और इसकी सैटेलाइट इमेजरी में एक्सपर्टीज है. इस फोटो को न्यूज एजेंसी एएफपी ने वैंटर से हासिल करके मुहैया कराया है.

वैंटर की ओर से जारी इस सैटेलाइट तस्वीर में 13 सितंबर, 2026 को मदीना के दक्षिण-पूर्व में अल-मेसाबाह में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के रास्ते पर बने एक पंपिंग स्टेशन का नजारा दिख रहा है. 11 सितंबर को हुए हमले और उसके बाद लगी आग से पाइपलाइन के पास मौजूद इस जगह को काफी नुकसान पहुंचा था.

वैंटर की ओर से जारी इस सैटेलाइट तस्वीर में 13 सितंबर, 2026 को मदीना के दक्षिण-पूर्व में अल-मेसाबाह में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के रास्ते पर बने एक पंपिंग स्टेशन का नजारा दिख रहा है. 11 सितंबर को हुए हमले और उसके बाद लगी आग से पाइपलाइन के पास मौजूद इस जगह को काफी नुकसान पहुंचा था.

सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इराक में मौजूद उग्रवादियों द्वारा छोड़े गए ड्रोनों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

वैंटर के सैटेलाइट तस्वीरों का यह सेट पंपिंग स्टेशन पर हमले के पहले और बाद की तस्वीरें दिखाता है. ये तस्वीरें 29 अक्टूबर, 2025 (ऊपर) और 13 सितंबर, 2026 (नीचे) की हैं. 11 सितंबर को हुए हमले और उसके बाद लगी आग से पाइपलाइन के पास मौजूद इस जगह को काफी नुकसान पहुंचा था.

वैंटर के सैटेलाइट तस्वीरों का यह सेट पंपिंग स्टेशन पर हमले के पहले और बाद की तस्वीरें दिखाता है. ये तस्वीरें 29 अक्टूबर, 2025 (ऊपर) और 13 सितंबर, 2026 (नीचे) की हैं. 11 सितंबर को हुए हमले और उसके बाद लगी आग से पाइपलाइन के पास मौजूद इस जगह को काफी नुकसान पहुंचा था.

ड्रोन अटैक की यह खबर ऐसे समय में आई है जब यमन में ईरान का समर्थन करने वाले हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब में ठिकानों पर हमले किए हैं और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में रणनीतिक रूप से अहम पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है. जिससे इस संकरे जलमार्ग पर उनका नियंत्रण बढ़ गया है.

सऊदी की परेशानी बढ़ने वाली है

दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब से तेल की सप्लाई में और कमी आने से ग्लोबल सप्लाई की दिक्कतें और बढ़ेंगी. इस कमी की वजह से पहले ही दुनिया भर में तेल-गैस की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं और महंगाई बढ़ी है.  रविवार को इंटरनेशनल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.4% से ज्यादा बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो मई के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है.

जंग शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव (ब्रेंट क्रूड फ़्यूचर्स)

ड्रोन हमलों की वजह से पाइपलाइन बंद करनी पड़ी, लेकिन सऊदी की सरकार ने अभी तक नुकसान के दायरे या यह रूट कितने समय तक बंद रहेगा, इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने इस पाइपलाइन की मरम्मत के काम में लगने वाले समय के बारे में अलग-अलग अनुमान लगाए हैं. एक अनुमान के मुताबिक इसमें पांच से छह हफ्ते लग सकते हैं, जबकि दूसरे अनुमान के अनुसार पाइपलाइन को जल्दी ठीक किया जा सकता है और मरम्मत का काम जारी रहने के दौरान ही आंशिक रूप से पंपिंग फिर से शुरू की जा सकती है.

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने शुक्रवार को बताया कि अगस्त में सऊदी अरब की तेल सप्लाई तीन दशकों से भी ज्यादा समय के निचले स्तर पर आ गई, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से तेल का प्रवाह कम हो गया था.

बता दें कि हूती विद्रोही हाल ही में घोषित नाकेबंदी के तहत सऊदी अरब के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर और शिपिंग को निशाना बना रहे हैं. ईरान के समर्थक इस गुट की हालिया बढ़त ने उन्हें जिबूती में मौजूद अमेरिका के एक बड़े बेस के और करीब पहुंचा दिया है. गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष अब सातवें महीने में है. यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए और डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि युद्ध चार से छह हफ्तों में खत्म हो जाएगा. 7 महीने बाद भी जंग जारी है और दुनिया तेल-गैस की महंगाई की मार झेल रही है.

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