- ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर
- रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लग सकता है 100% टैरिफ
- यूक्रेन ने किया स्वागत, अमेरिकी संसद से पास होकर कानून बना बिल
अमेरिका ने रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया. यह कानून रूस के ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों, रक्षा नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के तरीकों को निशाना बनाता है. साथ ही रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भी 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है. इस कदम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है.
कानून बनने के बाद बढ़ी रूस पर दबाव की रणनीति
व्हाइट हाउस के अनुसार नए कानून से रूस पर पहले से लागू प्रतिबंधों को और सख्त किया गया है. इसके तहत रूस के सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, रक्षा क्षेत्र से जुड़े नेटवर्क और ऊर्जा परिवहन में इस्तेमाल होने वाले जहाजों पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य रूस की आर्थिक क्षमता को कमजोर करना और यूक्रेन युद्ध से जुड़े उसके संसाधनों पर दबाव बनाना है.

व्हाइट हाउस ने किया कंफर्म
100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार
कानून का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं. यह प्रावधान विशेष रूप से उन देशों को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं या प्रतिबंधों से बचने में सहायता करते हैं. हालांकि कानून में किसी विशेष देश पर स्वतः 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान नहीं है. अंतिम फैसला राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में रहेगा.
भारत और चीन पर भी नजर
इस कानून को भारत और चीन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों देश रूस से ऊर्जा आयात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं. कानून ऐसे देशों के खिलाफ भविष्य में टैरिफ लगाने की कानूनी व्यवस्था तैयार करता है, यदि अमेरिकी प्रशासन आवश्यक समझे. हालांकि यह तुरंत किसी देश पर प्रतिबंध लागू नहीं करता.
ईरान पर प्रतिबंध पांच साल और बढ़े
नया कानून केवल रूस तक सीमित नहीं है. इसके तहत ईरान प्रतिबंध अधिनियम को भी अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है. अमेरिका का मानना है कि ईरान और रूस दोनों के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के महत्वपूर्ण साधन हैं.
कांग्रेस में मिला व्यापक समर्थन
यह विधेयक अगस्त में अमेरिकी सीनेट में 86-11 के बड़े अंतर से पारित हुआ था. इसके बाद इस सप्ताह प्रतिनिधि सभा ने भी इसे 262-159 मतों से मंजूरी दे दी. विधेयक का नाम रिपब्लिकन नेता दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जो इस प्रस्ताव के प्रमुख समर्थकों में शामिल रहे थे.
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राष्ट्रपति को मिली विशेष छूट देने की शक्ति
कानून में राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में छूट देने का अधिकार भी दिया गया है. यदि राष्ट्रपति यह प्रमाणित करते हैं कि किसी मामले में छूट देना राष्ट्रीय हित में है, तो वह कुछ प्रतिबंधों या टैरिफ प्रावधानों को लागू न करने का निर्णय ले सकते हैं. इसके लिए कांग्रेस को औपचारिक सूचना देनी होगी.
यूक्रेन ने किया स्वागत
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इस कानून का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि रूस पर लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंध शांति स्थापित करने और मॉस्को पर दबाव बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं. यूक्रेन लंबे समय से अपने सहयोगी देशों से रूस पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग करता रहा है.
आलोचना भी शुरू
हालांकि कानून को व्यापक समर्थन मिला है, लेकिन कुछ अमेरिकी सांसदों ने इसके कुछ प्रावधानों पर चिंता भी जताई है. आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार देने से भविष्य में व्यापारिक तनाव बढ़ सकते हैं और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
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