- यमन में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है जो पेरिम द्वीप के करीब है
- पेरिम द्वीप बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से में है जो अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप को करीब लाता है
- हूतियों के नियंत्रण से इस समुद्री मार्ग को रोका जा सकता है जिससे तेल की कीमतों पर असर होगा, उसमें और आग लगेगी
अमेरिका ईरान जंग के बीच मिडिल ईस्ट का इक्वेशन फिर बदल रहा है. 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा तेल संकट और विकराल रूप ले सकता है. वजह है कि यमन में हूती विद्रोहियों ने बड़ा हाथ मार लिया है. हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा जमा लिया है. यह पोर्ट अहम पेरिम द्वीप से केवल 80 किमी दूर है.
यमन के पेरिम द्वीप को देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे हम कई साल पीछे के दौर में पहुंच गए हों. यहां चारों तरफ सूखी रेत और चट्टानें दिखाई देती हैं. लेकिन बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में इसकी बेहद अहम जगह होने की वजह से यह द्वीप लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बीच आ गया है. ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है. ऐसे में सऊदी अरब लाल सागर के रास्ते तेल का निर्यात कर रहा है. इस रास्ते में बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य एक संकरा रास्ता देता है, जिससे जहाज निकल सकते हैं.
लेकिन अब हूती विद्रोहियों के हालिया हमले से उन्हें पेरिम द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने का मौका मिल सकता है. अगर ऐसा हुआ तो वे इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को रोकने की क्षमता भी हासिल कर सकते हैं. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के लिए पेरिम को बचाने की चुनौती अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ी हो गई है.
पेरिम द्वीप इतना अहम क्यों है?
इतिहास में कई साम्राज्यों के लिए यह द्वीप बेहद महत्वपूर्ण रहा है. इसकी वजह इसकी खास भौगोलिक स्थिति है. मतलब इसकी लोकेशन ही इसे अहम बनाती है. पेरिम द्वीप बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से में स्थित है. इस जलडमरूमध्य की वजह से अफ्रीका का हॉर्न ऑफ अफ्रीका इलाका अरब प्रायद्वीप से सिर्फ करीब 19 किलोमीटर दूर रह जाता है.
गौरतलब है कि बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाद एक बेहद महत्वपूर्ण दूसरा रास्ता है. ईरान अपने सहयोगी हूती विद्रोहियों के जरिए इस समुद्री रास्ते को बंद करवाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है. ऐसा होने पर तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. इससे नवंबर में होने वाले अमेरिका के मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) से पहले रिपब्लिकन पार्टी को भी नुकसान पहुंच सकता है. ट्रंप ऐसे भी परेशान दिख रहे हैं. उनकी अप्रूवल रेटिंग सबसे खराब दौर से गुजर रही है. अमेरिका में रजिस्टर्ड 3 में एक सिर्फ एक वोटर ट्रंप के काम से खुश है.
संघर्ष का लंबा इतिहास
यमन का गृहयुद्ध 2014 में शुरू हुआ था. अगले साल यानी 2015 तक देश अलग-अलग गुटों में बंट गया. हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों पर कंट्रोल कर लिया. वहीं यमन की सरकार और उसके सहयोगी गुटों के पास देश के ज्यादातर दक्षिणी और पूर्वी हिस्से रहे. यमन की सरकार के खिलाफ हूतियों का हालिया बड़ा हमला जुलाई में शुरू हुआ. इसके साथ ही हूतियों और सऊदी अरब के बीच चार साल से चल रहा संघर्ष विराम (सीजफायर) खत्म हो गया.
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हूतियों का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान गया था. सऊदी अरब ने इस प्रतिनिधिमंडल के विमान को सना में उतरने की अनुमति नहीं दी. सऊदी अरब को शक था कि विमान में सैन्य सामान और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लोग हो सकते हैं.
हूतियों ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों, हवाई अड्डों और दूसरी नागरिक जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले भी किए. द गार्जियन के मुताबिक, हूतियों के हमले शुरू होने के बाद यमन के कई हिस्सों में लगातार लड़ाई हो रही है. ताइज, अद दाली, अल-बायदा, मारिब, शबवाह, अल-जौफ और होदेइदाह जैसे शहरों में फिर से लड़ाई तेज हो गई है. यमन की सरकार और हूती दोनों ही इलाके पर अपना नियंत्रण बढ़ाने और वर्चस्व हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
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