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आखिर ट्रंप ने ऐसा क्या कह दिया कि पाकिस्तान में हो गया बवाल? लश्कर आतंकी कसूरी ने अपनी ही सरकार को ललकारा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील की. इसी बीच लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने खुले मंच से पाकिस्तान सरकार और सेना नेतृत्व को ललकारते हुए माहौल और गरमा दिया.

आखिर ट्रंप ने ऐसा क्या कह दिया कि पाकिस्तान में हो गया बवाल? लश्कर आतंकी कसूरी ने अपनी ही सरकार को ललकारा
  • डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की अपील की है.
  • सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तान सरकार और सेना प्रमुख को इजराइल से संबंध बनाने पर खुली धमकी दी है.
  • सैफुल्लाह कसूरी ने कहा कि कोई भी मुस्लिम देश इजराइल को मान्यता देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की अपील के बाद पाकिस्तान में सियासी और कट्टरपंथी हलकों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने खुले मंच से पाकिस्तान सरकार और सेना प्रमुख को धमकी देकर माहौल को और गरमा दिया है.

बताया जा रहा है कि बकरीद की नमाज के बाद आयोजित एक कार्यक्रम में सैफुल्लाह कसूरी ने भड़काऊ भाषण दिया. उसने कहा कि जो भी इजराइल को मान्यता देने की बात करेगा, उसे खत्म कर दिया जाएगा. उसके निशाने पर सीधे पाकिस्तान की सत्ता और सेना दिखाई दी. कसूरी ने इशारों-इशारों में पाकिस्तान सरकार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर को चेतावनी दी कि इजराइल के साथ रिश्ते बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा.

मुस्लिम देशों को मजबूर नहीं किया जा सकता: सैफुल्लाह कसूरी

अपने भाषण में सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया कि दुनिया की कोई भी ताकत मुस्लिम देशों को इजराइल को मान्यता देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. उसने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग मजबूत हो रहा है और पाकिस्तान की सैन्य ताकत अब इजराइल तक पहुंचने की क्षमता रखती है. भाषण के दौरान उसने जिहाद, शहादत और फिलिस्तीन जैसे मुद्दों का जिक्र कर समर्थकों को उकसाने की कोशिश भी की.

पाकिस्तान सरकार पहले ही कर चुकी है साफ इनकार

इस पूरे विवाद के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी साफ कर दिया है कि पाकिस्तान फिलहाल इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनता, तब तक पाकिस्तान इजराइल को मान्यता नहीं देगा.

देश की विचारधारा के खिलाफ है समझौता

ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की स्थापना एक खास विचारधारा के तहत हुई थी और इज़राइल के साथ किसी भी तरह का समझौता उस विचारधारा के खिलाफ माना जाएगा. उन्होंने इज़राइल पर भरोसा न किए जाने की बात भी कही और कहा कि फिलिस्तीन मुद्दे पर पाकिस्तान अपने पुराने रुख पर कायम रहेगा.

ट्रंप के बयान से बढ़ी हलचल

दरअसल, हाल के दिनों में Donald Trump ने मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील की थी. अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत कुछ अरब देशों ने पहले ही इजराइल के साथ राजनयिक रिश्ते स्थापित कर लिए हैं. लेकिन पाकिस्तान में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और कट्टरपंथी समूहों के बीच भारी विरोध देखने को मिल रहा है.

पाकिस्तान में बढ़ सकती है अंदरूनी टकराव की स्थिति

विशेषज्ञ मानते हैं कि इजराइल को लेकर पाकिस्तान में लंबे समय से बेहद संवेदनशील माहौल रहा है. ऐसे में अगर सरकार भविष्य में किसी भी स्तर पर रिश्ते सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाती है, तो उसे धार्मिक संगठनों और कट्टरपंथी समूहों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है. सैफुल्लाह कसूरी की खुली धमकी ने यह साफ कर दिया है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.

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