- यूक्रेन- रूस युद्ध 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ और यह यूरोप का सबसे घातक द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद का संघर्ष है
- रूस ने यूक्रेनी क्षेत्र के लगभग बीस प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है
- यूक्रेन में अब तक पंद्रह हजार से अधिक नागरिक मारे गए और लगभग पचास लाख लोग विस्थापित या शरणार्थी बने हैं
यूक्रेन और रूस के बीच जंग को शुरू हुए आज ठीक 4 साल हो गए हैं. 24 फरवरी 2022 को रूस के आक्रमण के साथ शुरू हुआ यह युद्ध दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यूरोप का सबसे घातक संघर्ष है. चार साल के इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए या घायल हुए हैं और करोड़ों लोग अपने घर छोड़कर शरणार्थी बन गए हैं. सबसे डरावनी बात यह है कि इस खूनी संघर्ष का तत्काल कोई अंत नहीं दिख रहा है. रूस ने वर्तमान में यूक्रेनी क्षेत्र के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है. यूक्रेन उसपर हर दिन नागरिक क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे पर बमबारी करने का आरोप लगाता है. हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि रूस अपने भविष्य, स्वतंत्रता, सच्चाई और न्याय के लिए लड़ रहा है.
चलिए आपको इन 4 सालों में युद्ध की पांच बड़ी घटनाओं की जानकारी यहां देते हैं:
24 फरवरी 2022: हमला शुरू
21 फरवरी 2022 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के पूर्वी डोनेट्स्क और लुगांस्क क्षेत्रों को स्वतंत्रता को मान्यता दी. इन इलाकों में 2014 से रूस समर्थक अलगाववादी यूक्रेनी सेना से लड़ रहे थे. इसके तीन दिन बाद सुबह-सुबह पुतिन ने यूक्रेन पर बड़े सैन्य हमले की घोषणा की. उन्होंने इसे “विशेष सैन्य अभियान” कहा, जिसका मकसद यूक्रेन को “नाजी प्रभाव से मुक्त” करना और “निरस्त्र” करना बताया.
2022 का वसंत: बुचा हत्याकांड
जब रूसी सेना कीव के आसपास के इलाकों से पीछे हटी, तो बुचा और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों आम नागरिकों के शव सड़कों पर मिले. इन लोगों को गोली मारकर हत्या की गई थी. यूक्रेन ने रूसी सेना पर आरोप लगाया, लेकिन रूस ने इन आरोपों से इनकार किया. इन भयानक घटनाओं से दुनिया भर में गुस्सा फैल गया और युद्ध अपराधों की जांच शुरू हुई. इसके एक साल बाद, 17 मार्च 2023 को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया. उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों से बच्चों को गैरकानूनी तरीके से रूस भेजा.

2022 की गर्मी से 2023 की सर्दी तक: यूक्रेन का पलटवार
2022 की गर्मियों से यूक्रेन ने जवाबी हमले शुरू किए. पश्चिमी देशों से मिले हथियारों की मदद से उसने उत्तर-पूर्व के खारकीव क्षेत्र और दक्षिण के खेरसोन शहर को फिर से अपने कब्जे में लिया. पूर्वी शहर बाखमुत में लंबी और खूनी लड़ाई हुई, जिससे शहर लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गया. जून 2023 में रूस को एक और झटका लगा, जब वैगनर नाम के भाड़े के सैनिकों के समूह (मर्सिनरी ग्रूप) ने बगावत कर दी और मॉस्को की ओर बढ़े, लेकिन बाद में लौट गए. खास बात थी कि वैगनर के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन की दो महीने बाद एक रहस्यमय विमान दुर्घटना में मौत हो गई।
2024: कुर्स्क और रूस की धीमी बढ़त
फरवरी 2024 से रूसी सेना ने फिर से मोर्चे पर बढ़त बनानी शुरू की. भारी नुकसान के बावजूद, रूस धीरे-धीरे पूर्वी इलाकों में आगे बढ़ता गया. बढ़ता भी क्यों नहीं, यूक्रेनी सेना के पास सैनिकों और हथियारों की कमी जो थी. अगस्त 2024 में यूक्रेनी सैनिक रूस की सीमा पार कर पश्चिमी कुर्स्क क्षेत्र में घुस गए और सैकड़ों वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा किया. मार्च 2025 में रूस ने, नॉर्थ कोरियाई सैनिकों की मदद से, यूक्रेन को वहां से बाहर कर दिया.
रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की श्रृंखला चलाई. अमेरिका द्वारा दिए गए पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और F-16 लड़ाकू विमान भी इन हमलों को पूरी तरह नहीं रोक पाए. 21 नवंबर 2024 को रूस ने “ओरेश्निक” नाम की नई मध्यम दूरी की परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल से यूक्रेन के एक सैन्य कारखाने को निशाना बनाया. 8 जनवरी 2026 को इसी मिसाइल का दोबारा इस्तेमाल एक विमान कारखाने पर किया गया.
2025-2026: फिर आई ट्रंप की कूटनीति
2025 की शुरूआत में ट्रंप वापस से अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठ चुके थे. उन्होंने व्हाइट हाउस में लौटने के बाद पुतिन के साथ सीधी बातचीत शुरू करने पर सहमति बनाई है. 28 फरवरी को व्हाइट हाउस में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच तीखी नोकझोंक हुई और इसे पूरी दुनिया ने देखा. ट्रंप ने यूक्रेन को सैन्य सहायता बंद करने की धमकी दी. यूक्रेन के पांव के नीचे से जैसे जमीन खिसक चुकी थी. सबसे बड़ा सहयोगी ही पलट रहा था.
बाद में ट्रंप कभी कीव तो कभी मॉस्को के प्रति नरम और सख्त रुख अपनाते रहे. नवंबर में उन्होंने यूक्रेन के लिए एक मसौदा योजना पेश की, जिसमें मॉस्को की मुख्य मांगें शामिल थीं, जैसे यूक्रेन के कुछ इलाकों को छोड़ना, बदले में सुरक्षा गारंटी देना. दबाव बनाए रखने के लिए रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा नेटवर्क पर हमले किए, जिससे सर्दियों में लाखों लोग अंधेरे और ठंड में रहने को मजबूर हुए. जवाब में यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमला किया.
कूटनीतिक प्रयास अभी भी जारी हैं. जनवरी और फरवरी 2026 में रूसी, यूक्रेनी और अमेरिकी प्रतिनिधि अबू धाबी और जेनेवा में मिले. रूस अब भी मांग कर रहा है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र से पूरी तरह हट जाए. जबकि यूक्रेन इसे बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट मानता है. कुल मिलाकर अभी बस जंग ही जंग है, शांति की उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आती.
मौतों और विस्थापन का आंकड़ां
- UN के अनुसार 2022 से अब तक यूक्रेन में 15,000 से ज्यादा आम नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि असली संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, खासकर रूसी कब्जे वाले मारियुपोल जैसे इलाकों में. यूक्रेन के जवाबी हमलों में भी रूस के सीमा क्षेत्रों में सैकड़ों लोगों की जान गई है.
- यूक्रेन के अनुमान के मुताबिक करीब 20,000 यूक्रेनी बच्चों को रूसी कब्जे वाले इलाकों से जबरन हटाया या अगवा किया गया. वहीं UNHCR के अनुसार लगभग 59 लाख यूक्रेनी शरणार्थी विदेशों में रह रहे हैं और 37 लाख लोग देश के भीतर ही विस्थापित हैं.
- दोनों देश सैनिकों की मौतों पर भरोसेमंद आंकड़ा जारी नहीं करते. यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने 55,000 यूक्रेनी सैनिकों की मौत बताई है, जिसको लेकर कहा जाता है कि यह आंकड़ें कम है. BBC और मेडियाजोना ने 1,77,000 रूसी सैनिकों की मौत की पुष्टि की है. Center for Strategic and International Studies ने अनुमान लगाया है कि 3,25,000 तक रूसी और 1 से 1.4 लाख यूक्रेनी सैनिक मारे गए हो सकते हैं.
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