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क्या आपकी जमीन में भी दबा है अरबों का खजाना? ये नारंगी-पीली काई दिखे तो समझिए सुराग मिल गया

रेयर अर्थ मेटल्स क्या होते हैं, इसका भंडार मिलना खजाना हाथ लगने जैसा क्यों है? यहां समझिए

क्या आपकी जमीन में भी दबा है अरबों का खजाना? ये नारंगी-पीली काई दिखे तो समझिए सुराग मिल गया
Xanthoria elegans काई रेयर अर्थ खनिजों का पता लगाने में मदद कर सकती है

कहीं आपकी जमीन के नीचे भी तो अरबों का खजाना नहीं दबा पड़ा है? अगली बार अगर आपको अपने बगीचे की किसी चट्टान, गांव की दीवार या पहाड़ी रास्ते के किनारे चट्टान पर फैली चमकीली नारंगी-पीली काई की परत दिखाई दे, तो उसे एक बार ध्यान से देखें. हो सकता है कि आप ऐसे खजाने के ऊपर खड़े हों, जिसकी कीमत बहुत ज्यादा हो. चीनी वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि एक साधारण सी लाइकेन (काई जैसी चट्टान पर उगने वाली परत) दुनिया में जमीन के नीचे छिपे उन रेयर अर्थ खनिजों का पता लगाने में मदद कर सकती है, जिनके बारे में अभी जानकारी नहीं है.

यह रिपोर्ट साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने बताया कि इस काई का खास रंग इसे खुली चट्टानों पर आसानी से पहचानने में मदद करता है. चीन के वैज्ञानिक कई दशकों से ऐसे जैविक संकेतक (बायोलॉजिकल इंडिकेटर) खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी मदद से जमीन के नीचे छिपे खनिज भंडार का पता लगाया जा सके.

क्या होते हैं रेयर अर्थ मेटल्स?

रेयर अर्थ मेटल्स 17 खास धातुओं का एक समूह है, जो जमीन में बहुत कम मात्रा में मिलती हैं और इन्हें निकालना भी आसान नहीं होता. इनका इस्तेमाल मोबाइल, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक कार, बैटरी, पवन चक्की, मिसाइल और दूसरे आधुनिक उपकरणों में होता है. नाम के बावजूद ये धातुएं हमेशा बेहद दुर्लभ नहीं होतीं, लेकिन इनके अच्छे और आसानी से निकाले जा सकने वाले भंडार कम हैं. इसलिए ये दुनिया की टेक्नोलॉजी और कई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.

चीन के वैज्ञानिकों ने क्या पाया?

रिपोर्ट के अनुसार 17 अगस्त को पेकिंग यूनिवर्सिटी और चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज के प्रोफेसर ली यांग ने कहा, “यह दूसरी बार है जब चीनी वैज्ञानिकों ने ऐसा कोई संकेतक खोजा है. पहली बार 1950 के दशक में कॉपर ग्रास यानी तांबे की मौजूदगी का संकेत देने वाली घास की खोज हुई थी. दोनों ही खनिजों की खोज के क्षेत्र में चीनी वैज्ञानिकों की मूल वैज्ञानिक खोज हैं.”

इस स्टडी का नाम 'लाइकेन ऐज अ पोटेंशियल एक्सप्लोरेशन टूल फॉर रेयर अर्थ एलिमेंट-एनरिच्ड कार्बोनाटाइट्स' है. यह 27 जुलाई को इकोनॉमिक जियोलॉजी मैग्जीन में छपी थी. वैज्ञानिकों ने जिस लाइकेन की पहचान की है, उसका वैज्ञानिक नाम जैंथोरिया एलिगेंस (Xanthoria elegans) है. यह खास तौर पर उन कार्बोनेट चट्टानों पर उगता है, जिनमें रेयर अर्थ तत्व ज्यादा मात्रा में होते हैं.

ली ने कहा, “जब हमें यह लाइकेन मिल जाता है, तो हम उन जगहों से सैंपल्स लेने को प्राथमिकता दे सकते हैं. इससे बिना किसी खास संकेत के जगह-जगह खोजने की तुलना में रेयर अर्थ भंडार मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है.” केमिकल जांच से भी लाइकेन और रेयर अर्थ तत्वों के बीच संबंध के और सबूत मिले। लाइकेन में रेयर अर्थ तत्वों की कुल मात्रा 3,500 से 17,000 पीपीएम तक पाई गई. लाइकेन में रेयर अर्थ तत्वों की मात्रा उस चट्टान में मौजूद इन तत्वों की मात्रा के साथ बढ़ती भी पाई गई, जिस पर वह उगा था.

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