श्रीलंका में जमीन के अंदर हुई खुदाई में महात्मा बुद्ध की सोने की परत चढ़ी 17 मूर्तियां मिली हैं. पुरातत्वविदों ने इन मुर्तियों को एक ऐसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर खोजा है, जिसके बारे में माना जाता है कि यहां 2,000 साल से भी पहले एक बौद्ध मठ हुआ करता था. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार यह दुर्लभ खोज मंगलवार, 18 अगस्त को श्रीलंका के प्राचीन शहर अनुराधापुरा में अबयागिरी मंदिर परिसर की एक पुरानी सुरक्षा दीवार की खुदाई के दौरान हुई. अनुराधापुरा श्रीलंका के मध्य-उत्तर हिस्से में स्थित है.
रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका सरकार के केंद्रीय सांस्कृतिक कोष के प्रोजेक्ट मैनेजर तुसिता हेराथ ने कहा कि पुरातत्व के लिहाज से सुरक्षित इस इलाके में 30 से ज्यादा सालों में यह सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खोज है. हेराथ ने खुदाई वाली जगह से एएफपी को बताया, “हमें पहले भी कई पुरानी चीजें मिली हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मूर्तियां पहली बार मिली हैं.”
कांसे के उपर चढ़ी सोने की परत
उन्होंने बताया कि मिली महात्मा बुद्ध की 17 मूर्तियां कांसे की हैं और उन पर सोने की परत चढ़ी हुई है. इन मूर्तियों की बनावट सातवीं और आठवीं सदी में मिली दूसरी पुरानी चीजों जैसी है. माना जा रहा है कि ये मूर्तियां करीब 1,200 से 1,300 साल पुरानी हैं. हेराथ ने कहा, “हमने इन पुरानी चीजों को आगे की जांच के लिए भेज दिया है. हमें उम्मीद है कि करीब एक महीने के अंदर इन्हें आम लोगों के देखने के लिए अभयगिरि म्यूजियम में प्रदर्शित किया जा सकेगा.”
श्रीलंका के एक न्यूज वेबसाइट मोनेटा ब्रीफ के अनुसार माना जाता है कि अभयगिरि मठ शहर की स्थापना पहली सदी में राजा वट्टागामनी अभय (जिन्हें वलागाम्बा के नाम से भी जाना जाता है) ने की थी और यह जल्द ही प्राचीन एशिया के सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली बौद्ध केंद्रों में से एक बन गया. अनुराधापुरा के उत्तरी हिस्से में स्थित यह परिसर 500 एकड़ से ज्यादा इलाके में फैला हुआ था और माना जाता है कि अपने चरम पर यहां 5,000 से ज्यादा भिक्षु रहते थे.
यह इलाका बौद्ध धर्म की थेरवाद, महायान और वज्रयान जैसी अलग-अलग परंपराओं के लिए जाना जाता है. सैकड़ों साल पहले यहां चीन और भारत से विद्वान और तीर्थयात्री भी आते थे.
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