विज्ञापन

एक ही महीने में दो पूर्णिमा! इस हफ्ते नजर आने वाला ब्लू मून स्पेशल क्यों? समझिए पीछे का साइंस

Blue Moon Date: चांद को धरती का एक चक्कर पूरा करने में तकरीबन 29.5 दिन लगता है. यानी अगर सिर्फ चांद की चाल यानी 12 चंद्र महीनों के भरोसे छोड़ दें, तो हमारा साल असली साल से करीब 11 दिन छोटा हो जाएगा.

एक ही महीने में दो पूर्णिमा! इस हफ्ते नजर आने वाला ब्लू मून स्पेशल क्यों? समझिए पीछे का साइंस
किसी साल 12 की जगह 13 पूर्णिमा हो जाती है, इसी 13वीं पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं.
Pixabay

आसमान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह हफ्ता बेहद शानदार होने वाला है. इस बार आसमान में एक अनोखा नजारा दिखने जा रहा है, जिसे 'ब्लू मून' कहा जाता है. जब एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा आ जाए, तो दूसरी पूर्णिमा के चांद को ब्लू मून का नाम दिया जाता है. इस महीने की पहली पूर्णिमा 1 मई को थी और अब 31 मई को इस महीने का दूसरा पूरा चांद आसमान को रोशन करेगा.

लेकिन ठहरिए! अगर आप यह सोच रहे हैं कि इस रात चांद नीले रंग का दिखेगा, तो आप थोड़े गलत हैं. इस नाम का चांद के रंग बदलने से कोई वास्ता नहीं है. दरअसल, यह पूरा माजरा चांद के दीदार का नहीं, बल्कि हमारे कैलेंडर और सितारों की चाल के बीच के तालमेल का है.समझते हैं कि इसके पीछे का असली विज्ञान आखिर है क्या?

कैलेंडर और चांद की चाल का पेच

देखा जाए तो चांद को धरती का एक चक्कर पूरा करने में तकरीबन 29.5 दिन का वक्त लगता है. इस हिसाब से अगर हम अपने कैलेंडर को सिर्फ चांद की चाल यानी 12 चंद्र महीनों (Lunar Months) के भरोसे छोड़ दें, तो हमारा साल असली साल से करीब 11 दिन छोटा हो जाएगा. नतीजा यह होगा कि कुछ ही वक्त में हमारे मौसम और महीनों का तालमेल पूरी तरह बिगड़ जाएगा.

इसी गड़बड़ी को ठीक करने के लिए इंसानों ने कैलेंडर को चांद के बजाय सूरज और सितारों की चाल से जोड़ा. हम साल को उस वक्त से नापते हैं जितने दिनों में सितारे आसमान में अपनी पुरानी जगह पर वापस लौट आते हैं. इसी वजह से कुछ सालों में 12 के बजाय 13 पूर्णिमा हो जाती हैं. इसी 13वीं पूर्णिमा को 'ब्लू मून' कहा जाता है.
Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: Pixabay

खगोल विज्ञान का दूसरा नजरिया

दिलचस्प बात यह है कि खगोल विज्ञान में ब्लू मून को तय करने का एक और सख्त पैमाना है, जिसे 'सीजनल मेथड' (मौसमी तरीका) कहा जाता है. अगर हम इसे वैज्ञानिक सोच की तराजू पर तौलें, तो इस हफ्ते दिखने वाला चांद तकनीकी रूप से ब्लू मून नहीं कहलाएगा. खगोल विज्ञान के मुताबिक, ब्लू मून देखने के लिए अगले साल यानी 20 मई 2027 तक का इंतजार करना होगा.

यह भी पढ़ें: ईरान युद्ध से इंडो-पैसिफिक की सप्लाई चेन पर हुआ असर, तो होर्मुज पर QUAD ने खींच दी लकीर; बैठक से क्या निकला?

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com