आसमान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह हफ्ता बेहद शानदार होने वाला है. इस बार आसमान में एक अनोखा नजारा दिखने जा रहा है, जिसे 'ब्लू मून' कहा जाता है. जब एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा आ जाए, तो दूसरी पूर्णिमा के चांद को ब्लू मून का नाम दिया जाता है. इस महीने की पहली पूर्णिमा 1 मई को थी और अब 31 मई को इस महीने का दूसरा पूरा चांद आसमान को रोशन करेगा.
लेकिन ठहरिए! अगर आप यह सोच रहे हैं कि इस रात चांद नीले रंग का दिखेगा, तो आप थोड़े गलत हैं. इस नाम का चांद के रंग बदलने से कोई वास्ता नहीं है. दरअसल, यह पूरा माजरा चांद के दीदार का नहीं, बल्कि हमारे कैलेंडर और सितारों की चाल के बीच के तालमेल का है.समझते हैं कि इसके पीछे का असली विज्ञान आखिर है क्या?
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कैलेंडर और चांद की चाल का पेच
देखा जाए तो चांद को धरती का एक चक्कर पूरा करने में तकरीबन 29.5 दिन का वक्त लगता है. इस हिसाब से अगर हम अपने कैलेंडर को सिर्फ चांद की चाल यानी 12 चंद्र महीनों (Lunar Months) के भरोसे छोड़ दें, तो हमारा साल असली साल से करीब 11 दिन छोटा हो जाएगा. नतीजा यह होगा कि कुछ ही वक्त में हमारे मौसम और महीनों का तालमेल पूरी तरह बिगड़ जाएगा.

Photo Credit: Pixabay
खगोल विज्ञान का दूसरा नजरिया
दिलचस्प बात यह है कि खगोल विज्ञान में ब्लू मून को तय करने का एक और सख्त पैमाना है, जिसे 'सीजनल मेथड' (मौसमी तरीका) कहा जाता है. अगर हम इसे वैज्ञानिक सोच की तराजू पर तौलें, तो इस हफ्ते दिखने वाला चांद तकनीकी रूप से ब्लू मून नहीं कहलाएगा. खगोल विज्ञान के मुताबिक, ब्लू मून देखने के लिए अगले साल यानी 20 मई 2027 तक का इंतजार करना होगा.
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