- पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जमकर हिंसा हुई
- स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर मतदान का बहिष्कार किया, 'मुजफ़्फराबाद चलो' लॉन्ग मार्च बुलाया था
- इस मार्च पर पाकिस्तान रेंजर्स ने गोलियां चलाईं, कम से कम 5 की मौत- 35 घायल
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए सोमवार, 27 जुलाई को मतदान हुआ. इस दौरान कई जगह हिंसा हुई, चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगे, अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं और सुरक्षा बलों पर गोली फायरिंग करने के भी आरोप लगे. सूत्रों के अनुसार रावलाकोट में पाक रेंजर्स की फायरिंग में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई जबकि कई दर्जन घायल हुए. यहां के लोगों ने बड़े पैमाने पर चुनाव का बहिष्कार किया. इससे चुनाव पर सवाल खड़े हो गए, जिसे पहले से ही कानून-व्यवस्था की बड़ी परीक्षा माना जा रहा था.
बता दें कि इस चुनाव में करीब 38 लाख लोग वोट डालने के पात्र हैं. यह चुनाव पीओके की तथाकथित विधानसभा के लिए हो रहा है. पहली बार मतदान एक दिन की बजाय तीन चरणों में कराया जा रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में हुए हिंसक प्रदर्शन और अशांति के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी. पहले चरण का मतदान मीरपुर डिवीजन में कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ.
भींबर में मतपेटी में लगाई गई आग
सबसे बड़ी घटना भींबर में हुई, जहां एक मतदान केंद्र पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, एक मतपेटी को कथित तौर पर छीन लिया गया और बाद में उसमें आग लगा दी गई. इससे उसके अंदर रखे वोट जल गए. अधिकारियों ने कहा कि इस मामले की जांच चुनाव नियमों के अनुसार की जाएगी और बाद में तय किया जाएगा कि वहां दोबारा मतदान होगा या नहीं. इस घटना के बाद फिर आरोप लगे कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए बल का इस्तेमाल किया जा रहा है.
कोटली में पीपीपी कार्यकर्ता की मौत
कोटली जिले में भी हिंसा की खबर आई. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने कहा कि उसके कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की नकयाल में हुई झड़प के दौरान मौत हो गई. पार्टी ने इस हत्या के लिए अपने राजनीतिक विरोधियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि दूसरे पक्ष ने इन आरोपों से इनकार किया. अलग से, पीपीपी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई. पार्टी का आरोप है कि एलए-1 मीरपुर सीट पर कुछ हथियारबंद लोगों ने वोटों की गिनती में दखल दिया.
जेएएसी का आरोप- नागरिकों पर गोली चलाई गई
यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है, जब प्रशासन और जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के बीच टकराव जारी है. यह नागरिक संगठनों का एक समूह है, जिसने शासन, आर्थिक समस्याओं और राजनीतिक सुधारों को लेकर आंदोलन चलाया है. सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में जेएएसी ने आरोप लगाया कि रावलाकोट में सुरक्षा बलों ने आम लोगों पर गोली चलाई. रिपोर्ट्स के अनुसार पाक रेंजर्स की फायरिंग में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई जबकि कई दर्जनों के घायल हो गए हैं.
#BREAKING: Massive violence is being reported in Pakistan Occupied Jammu & Kashmir (PoJK) after firing by Pakistani security forces on the day of sham stage managed elections. Pakistani forces must be fuming with resistance shown by people by full scale boycott of polls. pic.twitter.com/u49itjAJD6
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) July 27, 2026
जेएएसी ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसे माहौल में चुनाव कराने को कैसे सही माना जा सकता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, रावलकोट में पाकिस्तान सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने की तैयारी कर रहे थे. पाक सरकार के साथ बातचीत नाकाम रहने के बाद जेएएसी ने सोमवार को 'मुजफ़्फराबाद चलो' लॉन्ग मार्च बुलाया था.
भारत का लगातार कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. भारत का यह भी कहना है कि इन इलाकों के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान का अवैध और जबरन कब्जा है. इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली ने कहा था कि पीओके में हुए प्रदर्शन वहां पाकिस्तान की ओर से कई दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा हैं. भारत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित बर्बरता की खबरों की भी आलोचना की है.
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