भारत ने कहा कि वह अपने यहां कार्बन उत्सर्जन की सघनता को 2005 की तुलना में 2020 तक 20 से 25 प्रतिशत कम करने का प्रयास कर रहा है।
कार्बन सघनता एक पैमाना है जिसमें प्रति इकाई सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के हिसाब से काबर्न डाई आक्साइड उत्सर्जन की मात्रा को आंका जाता है। रियो 20 समिट के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ‘भारत में, पिछले दो दशकों से हमारे प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आए हैं। 1994-2007 के दौरान कृषि को छोड़कर हमारे यहां उत्सर्जन जीडीपी गहनता करीब 25 प्रतिशत घटी है।’
सिंह ने कहा कि भारत 2005 और 2020 के बीच कार्बन उत्सर्जन गहनता में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी लाने के लिए हर तरह के प्रयास कर रहा है।
टिकाऊ विकास पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन के रूप में आधिकारिक तौर पर जाने जाने वाले इस शिखर सम्मेलन में सिंह ने कहा, ‘आगे चलकर, हमने 2020 तक कार्बन उत्सर्जन की गहनता में 2005 की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी करने का लक्ष्य रखा है।’
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रमुख चुनौतियों में से एक चुनौती यह है कि हमारी धरती पर घटती जैव विविधता गहरी चिंता का कारण है और इस दिशा में वैश्विक स्तर पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
सिंह ने कहा कि भारत जैव विविधता पर अक्टूबर में एक सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। उन्होंने हैदराबाद में प्रस्तावित जैव विविधता संधि के सम्बद्ध पक्षों के इस 11वें महासम्मेलन की सफलता के लिए विश्व समुदाय से सहयोग की अपील की।
कार्बन सघनता एक पैमाना है जिसमें प्रति इकाई सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के हिसाब से काबर्न डाई आक्साइड उत्सर्जन की मात्रा को आंका जाता है। रियो 20 समिट के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ‘भारत में, पिछले दो दशकों से हमारे प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आए हैं। 1994-2007 के दौरान कृषि को छोड़कर हमारे यहां उत्सर्जन जीडीपी गहनता करीब 25 प्रतिशत घटी है।’
सिंह ने कहा कि भारत 2005 और 2020 के बीच कार्बन उत्सर्जन गहनता में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी लाने के लिए हर तरह के प्रयास कर रहा है।
टिकाऊ विकास पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन के रूप में आधिकारिक तौर पर जाने जाने वाले इस शिखर सम्मेलन में सिंह ने कहा, ‘आगे चलकर, हमने 2020 तक कार्बन उत्सर्जन की गहनता में 2005 की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी करने का लक्ष्य रखा है।’
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रमुख चुनौतियों में से एक चुनौती यह है कि हमारी धरती पर घटती जैव विविधता गहरी चिंता का कारण है और इस दिशा में वैश्विक स्तर पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
सिंह ने कहा कि भारत जैव विविधता पर अक्टूबर में एक सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। उन्होंने हैदराबाद में प्रस्तावित जैव विविधता संधि के सम्बद्ध पक्षों के इस 11वें महासम्मेलन की सफलता के लिए विश्व समुदाय से सहयोग की अपील की।
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