- दिल्ली के निहाल विहार थाना पुलिस ने 34 दिनों में पॉक्सो मामले में चार्जशीट दाखिल की
- इस मामले में कोर्ट ने 8 दिन में सुनवाई पूरी कर आरोपी को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास और जुर्माना सुनाया
- पीड़िता ने जुलाई 2025 में आरोपी द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई
दिल्ली के आउटर जिले के निहाल विहार थाना पुलिस ने एक बेहद संवेदनशील पॉक्सो मामले में तेज और प्रभावी जांच कर मिसाल पेश की है. महज 34 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई और अदालत ने सिर्फ 8 दिनों में सुनवाई पूरी कर आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जबकि पीड़िता को 16.5 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी मंजूरी दी गई है.
17 अप्रैल को दर्ज हुआ था मामला
यह मामला 17 अप्रैल 2026 को सामने आया था, जब एक नाबालिग पीड़िता अपने माता-पिता के साथ निहाल विहार थाने पहुंची और उसने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले आरोपी राम शंकर उसके घर के सामने रहता था और परिवार के साथ उसकी अच्छी जान-पहचान थी. इसी परिचय का फायदा उठाकर उसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया.
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता के अनुसार जुलाई 2025 में आरोपी उसके घर आया था. उस समय वह अपने छोटे भाई-बहनों के साथ घर पर मौजूद थी. आरोप है कि राम शंकर ने बच्चों को पैसे देकर खाने-पीने का सामान खरीदने के बहाने दुकान भेज दिया. इसके बाद उसने घर में अकेली मौजूद नाबालिग के साथ जबरन दुष्कर्म किया. घटना के बाद आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी कि यदि उसने किसी को इस बारे में बताया तो वह उसकी छोटी बहन के साथ भी ऐसा ही करेगा.
डर और धमकियों की वजह से पीड़िता लंबे समय तक चुप रही. आरोप है कि आरोपी ने इसी डर का फायदा उठाते हुए उसके साथ कई बार यौन शोषण किया. पुलिस जांच के अनुसार आरोपी ने पीड़िता के साथ 7 से 8 बार दुष्कर्म किया. बाद में जब पीड़िता गर्भवती हो गई तो मामला परिवार के सामने आया. इसके बाद उसने अपनी मां को पूरी घटना बताई और परिवार पुलिस के पास पहुंचा.
पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज
पीड़िता के बयान के आधार पर निहाल विहार थाने में भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया. इस टीम में महिला उपनिरीक्षक मनीषा, हेड कांस्टेबल देवेंद्र और कांस्टेबल देशराज को शामिल किया गया. पूरी जांच का नेतृत्व थाना प्रभारी इंस्पेक्टर शिश पाल ने किया, जबकि एसीपी पश्चिम विहार राजबीर लांबा इसकी निगरानी कर रहे थे.
मामला दर्ज होते ही पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया. मेडिकल जांच में यह पुष्टि हुई कि पीड़िता लगभग 32 सप्ताह और 4 दिन की गर्भवती थी. इसके साथ ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी. लगातार दबिश के बाद आरोपी राम शंकर को उसी दिन यानी 17 अप्रैल 2026 को निहाल विहार इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया. जांच के दौरान पुलिस ने सभी जरूरी साक्ष्य जुटाए, गवाहों के बयान दर्ज किए और वैज्ञानिक साक्ष्यों को मजबूत किया. डीएनए प्रोफाइलिंग समेत अन्य फॉरेंसिक सबूतों ने भी आरोपी के खिलाफ मामले को मजबूत बनाया. पुलिस ने रिकॉर्ड समय में जांच पूरी करते हुए केवल 34 दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी.
कोर्ट ने पुलिस को दिए सख्त निर्देश
अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि सभी गवाह समय पर पेश हों और किसी भी तरह की देरी न हो. गवाहों के लगातार एक जैसे बयान और डीएनए सहित वैज्ञानिक साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने महज 8 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर लिया.
29 मई 2026 को अदालत ने आरोपी राम शंकर को दोषी करार दिया. इसके अगले ही दिन 30 मई को सजा पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपी को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने अपने आदेश में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके अलावा उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.
पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए अदालत ने 16.5 लाख रुपये का मुआवजा भी मंजूर किया है. यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी है. आरोपी राम शंकर की उम्र 38 साल है. वह वर्तमान में नांगलोई, दिल्ली में रह रहा था, जबकि उसका स्थायी पता उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के प्रति उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है.
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