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मध्य पूर्व में फिर उठ सकती है जंग की लपटें, ईरान-US में नहीं बन रही बात; अगर युद्ध नहीं रुका तो क्या होगा?

मध्य पूर्व एक बार फिर से बारूद की ढेर पर बैठा है. ईरान और अमेरिका में सीजफायर नाजुक मोड़ पर है. कभी भी दोनों पक्ष एक दूसरे पर हमला कर सकते है. इससे ग्लोबल सप्लाई मार्केट में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है.

मध्य पूर्व में फिर उठ सकती है जंग की लपटें, ईरान-US में नहीं बन रही बात; अगर युद्ध नहीं रुका तो क्या होगा?

दुनिया की नजरें एक बार फिर खाड़ी देशों पर टिक गई हैं, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का रुख अब फिर से युद्ध की ओर जाता दिख रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को साफ कर दिया कि मिडिल ईस्ट में महीने भर से चला आ रहा युद्धविराम अब 'लाइफ सपोर्ट' पर है, यानी यह कभी भी टूट सकता है. ईरान की ओर से आए ताजा प्रस्ताव को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताते हुए ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका इस मामले में पूरी तरह जीत हासिल कर के ही दम लेगा.

ट्रंप का यह कड़ा रुख तब सामने आया है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के बदले अपनी कुछ कड़ी शर्तें रखी थीं. ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए एक डॉक्टर का उदाहरण दिया और कहा, "युद्धविराम की हालत उस मरीज जैसी है जिसका डॉक्टर आकर कहता है कि आपके प्रियजन के बचने की उम्मीद सिर्फ एक प्रतिशत है."

दुनिया भर में युद्ध का असर अब और गहरा रहा

इस तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिख रहा है. होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और गैस मंगवाता है. मौजूदा वक्त इस इलाके में अमेरिका और ईरान की दोहरी नाकेबंदी है. सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने आगाह किया है कि दुनिया अब तक के सबसे बड़े 'एनर्जी सप्लाई शॉक' से गुजर रही है. नासिर के मुताबिक, अगर यह रास्ता आज खुल भी जाए, तब भी बाजार को संभलने में महीनों लगेंगे और देरी होने पर हालात 2027 तक खराब रह सकते हैं.

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि खाद (Fertiliser) की आपूर्ति रुकने से दुनिया भर में खाद्य संकट का खतरा पैदा हो गया है. संयुक्त राष्ट्र (UNOPS) ने चेतावनी दी है कि अगर अगले कुछ हफ्तों में समाधान नहीं निकला, तो दुनिया को एक बड़े मानवीय संकट का सामना करना पड़ सकता है, जिससे लगभग 4.5 करोड़ लोग भुखमरी की कगार पर पहुँच सकते हैं.

ईरान की शर्तें क्या हैं?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे केवल अपने 'कानूनी अधिकारों' की मांग कर रहे हैं. ईरान चाहता है कि उसकी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की पाबंदी हटे और विदेशों में फंसे उसके अरबों डॉलर के एसेट्स (संपत्ति) को रिलीज किया जाए. इसके साथ ही ईरान पूरे क्षेत्र में युद्ध रोकने की बात कर रहा है, जिसमें लेबनान में हिजबुल्लाह पर होने वाले इजरायली हमले भी शामिल हैं.

दूसरी ओर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख कड़ा रखा है. उनका कहना है कि जब तक ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह तबाह नहीं कर दिया जाता, तब तक यह संघर्ष खत्म नहीं होगा. हालांकि 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को किसी तीसरे देश भेजने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अमेरिका फिलहाल किसी भी रियायत के मूड में नहीं दिख रहा है.

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