- नेपाल के पूर्व PM केपी ओली की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण बनी हुई है.
- बालेन शाह ने शपथ लेने के 24 घंटे में Gen-Z आंदोलन की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी के आदेश दिए.
- Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए सरकार ने एक और विस्तृत जांच आयोग गठित करने की घोषणा की है.
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के बाद देश की राजधानी काठमांडू समेत पूरे नेपाल में हालात सामान्य बने हुए हैं. गिरफ्तारी के बाद भी कहीं से बड़े विरोध-प्रदर्शन या सड़क पर उतरने की खबर नहीं है. खास बात यह है कि चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी ओली के समर्थन में आम जनता सामने आती नहीं दिखी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस कार्रवाई से संतुष्ट हैं. आम जनमानस नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के फैसले को साहसिक और जवाबदेही तय करने वाला कदम बता रहा है. सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक, बालेन शाह की कार्रवाई की खुलकर तारीफ हो रही है.
-
भारत और फ्रांस में प्रदर्शनों पर UN का दोहरा रवैया, आंदोलनों के पीछे अक्सर बाहरी ताकतें- एस जयशंकर -
S Jaishankar EXCLUSIVE | NDTV World Summit 2026: 26/11 के जिक्र पर अमेरिका को जयशंकर का जबरदस्त जवाब -
'लोग ट्रैवल करते रहेंगे, दुनिया घूमना मुश्किल नहीं' - NDTV World Summit 2026 में बोले जुबिन करकारिया -
S Jaishankar EXCLUSIVE | NDTV World Summit 2026: Semiconductor Mission पर एस जयशंकर क्या कुछ बोले? -
एलन मस्क की उड़ने वाली गाड़ी नहीं, इस कार को पसंद करते हैं रेमंड चीफ गौतम सिंघानिया, खुद बताया कारण -
कंपनी को बचाने में खो दिया परिवार का बड़ा हिस्सा, रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने बयां किया दर्द -
'2022 के संकट में भारत हमारे साथ खड़ा रहा'- NDTV World Summit में बोले श्रीलंका के मंत्री चतुरंगा अबेसिंघे -
NDTV World Summit 2026: महंगे तेल का कारोबार पर कितना असर? गौतम सिंघानिया ने बताया -
विदेश में 2-3 दिन बाद क्यों याद आने लगता है घर का खाना? संयुक्ता नायर ने बताई दिलचस्प वजह -
NDTV वर्ल्ड समिट 2026 | भारतीय एविएशन को नई ताकत, GE Aerospace अगले 9–10 साल में देगा 3,200 इंजन
शपथ के 24 घंटे के भीतर बड़ा फैसला
बता दें कि बालेन शाह ने शुक्रवार दोपहर नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. शपथ लेने के महज 24 घंटे के भीतर ही उन्होंने अपने चुनावी वादों को अमल में लाते हुए बड़ा कदम उठाया. उन्होंने पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन से जुड़ी जांच आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई के आदेश दिए, जिसके आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी की गई.
यह भी पढ़ें- नेपाल में केपी ओली की गिरफ्तारी के बाद CPN की आपात बैठक, पार्टी मुख्यालय में मंथन जारी
Gen-Z आंदोलन की दोबारा जांच
सरकार ने यह भी साफ किया है कि Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर एक और विस्तृत जांच बैठाई जाएगी. इस जांच में यह देखा जाएगा कि उस वक्त हिंसा के दौरान अधिकारियों की भूमिका क्या थी. क्या वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रहे थे या सिर्फ ऊपर से मिले आदेशों का पालन कर रहे थे, इस बिंदु पर विशेष फोकस रहेगा.
ओली की गिरफ्तारी से सियासी हलचल तेज
ओली की गिरफ्तारी के बाद उनकी पार्टी सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) में हलचल मच गई है. ललितपुर के च्यासल स्थित पार्टी मुख्यालय में पार्टी की अहम बैठक चल रही है. इसमें वरिष्ठ नेता, सांसद और संगठन के बड़े पदाधिकारी शामिल हैं. बैठक में आगे की राजनीतिक रणनीति, कानूनी लड़ाई और संभावित आंदोलन को लेकर मंथन किया जा रहा है.
यह भी पढ़ें- नेपाल के पूर्व PM केपी ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक गिरफ्तार, सत्ता संभालते ही एक्शन में बालेन
Gen-Z आंदोलन में 77 लोगों की मौत
जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में 77 लोगों की जान गई थी, जबकि करीब 85 अरब नेपाली रुपये से अधिक की संपत्ति को नुकसान हुआ था. इसी आंदोलन के दबाव में 9 सितंबर को केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और गृह मंत्री रमेश लेखक को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया था और उनके खिलाफ मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017) के तहत आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी.
यह भी पढ़ें- नेपाल के पूर्व पीएम केपी ओली को हो सकती है 15 साल की जेल, Gen Z हिंसा की इनक्वायरी रिपोर्ट पर एक्शन
ओली ने बताया बदले की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद केपी शर्मा ओली ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. उन्होंने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे. वहीं आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग की भूमिका भी संदिग्ध रही है.
15 साल तक की सजा की आशंका
कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो केपी ओली और रमेश लेखक को 15 साल तक की जेल हो सकती है. बालेन शाह को Gen-Z आंदोलन से जुड़ा नेता और समर्थक माना जाता है, ऐसे में उनकी सरकार की यह पहली बड़ी कार्रवाई व्यवस्था परिवर्तन और जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
जनता का समर्थन, युवाओं में उत्साह
बालेन शाह को हालिया चुनाव में बंपर जीत मिली थी, खास तौर पर युवाओं ने उन्हें खुलकर समर्थन दिया. अब उनकी इस सख्त कार्रवाई के बाद एक बार फिर युवाओं और आम जनता में नए नेतृत्व को लेकर उम्मीदें और भरोसा मजबूत होता दिख रहा है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं