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नेपाल में केपी ओली की गिरफ्तारी के बाद CPN की आपात बैठक, पार्टी मुख्यालय में मंथन जारी

केपी ओली की गिरफ्तारी के बाद सीपीएन-यूएमएल की आपात बैठक च्यासल मुख्यालय में चल रही है. Gen-Z आंदोलन हिंसा केस में बालेन शाह सरकार की कार्रवाई से नेपाल की राजनीति में बड़ा भूचाल पैदा हो गया है.

नेपाल में केपी ओली की गिरफ्तारी के बाद CPN की आपात बैठक, पार्टी मुख्यालय में मंथन जारी
नेपाल में केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी
PTI
नई दिल्ली:

नेपाल में सियासी हलचल तेज हो गई है. पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के बाद उनकी पार्टी सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) की अहम बैठक चल रही है. यह बैठक ललितपुर के च्यासल स्थित पार्टी मुख्यालय में हो रही है, जहां आगे की रणनीति पर मंथन किया जा रहा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद और संगठनात्मक पदाधिकारी बैठक में मौजूद हैं.

इससे पहले शनिवार सुबह नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया. ओली की गिरफ्तारी ऐसे वक्त हुई है, जब नए प्रधानमंत्री बने बालेन शाह ने शपथ लेने के 24 घंटे के भीतर ही कड़ा रुख अपनाते हुए जेन जी आंदोलन से जुड़े जांच आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई के आदेश दिए. इसी रिपोर्ट के आधार पर ओली के साथ-साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया है.

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Gen-Z आंदोलन पर कार्रवाई से मचा सियासी तूफान

बालेन शाह सरकार ने देश में पिछले साल हुए जेन जी आंदोलन की जांच कराने वाले उच्चस्तरीय आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए यह कदम उठाया है. जांच आयोग ने 8 सितंबर को हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौत के मामलों में तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और गृह मंत्री लेखक की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को जिम्मेदार ठहराया था. आयोग ने दोनों नेताओं के खिलाफ मुलुकी आपराधिक संहिता अधिनियम, 2074 (2017) के तहत आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी.

Gen-Z आंदोलन में 77 लोगों की गई जान

बताया जा रहा है कि जेन जी आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 77 लोगों की मौत हुई थी, जबकि सरकारी आकलन के मुताबिक करीब 85 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. इसी आंदोलन के दबाव में 9 सितंबर को केपी ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

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ओली ने बताया बदले की कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद केपी शर्मा ओली ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है. उन्होंने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. वहीं, आयोग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आदेश में तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग की भी जिम्मेदारी तय होती है.

आयोग के सामने अपने बयान में ओली ने कहा था कि उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को जान-माल के नुकसान को कम करने और प्रदर्शन में अवांछित तत्वों की घुसपैठ रोकने के निर्देश दिए थे. हालांकि जांच आयोग ने इन दावों को अपर्याप्त बताया.

15 साल तक की सजा का प्रावधान

कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो ओली और रमेश लेखक को 15 साल तक की जेल हो सकती है. नए प्रधानमंत्री बालेन शाह को जेन जी आंदोलन का नेता और समर्थक माना जाता है, ऐसे में उनकी सरकार की पहली ही कार्रवाई को व्यवस्था परिवर्तन और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

पार्टी मुख्यालय में रणनीति पर मंथन

ओली की गिरफ्तारी के बाद सीपीएन-यूएमएल खेमे में असंतोष और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं. च्यासल मुख्यालय में चल रही बैठक में पार्टी के अगले कदम, कानूनी लड़ाई, संभावित आंदोलन और राजनीतिक रणनीति पर विचार किया जा रहा है. माना जा रहा है कि बैठक के बाद पार्टी सरकार के फैसले के खिलाफ बड़ा राजनीतिक अभियान छेड़ सकती है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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