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नेपाल में PM बालेन का नया फरमान, राजदूत बनना है तो परीक्षा दो, आम नेपाली युवा भी कंपटीशन में उतरेंगे

Nepal News: नेपाल के नए पीएम बालेन शाह ने मेरिट पर जोर दिया है और पहली बार राजदूतों की नियुक्ती खुले कॉम्पिटिशन के आधार पर होगी. यहां जानिए क्या पात्रता या एलिजिबिलिटी तय की गई है और पहले क्या नियम था.

नेपाल में PM बालेन का नया फरमान, राजदूत बनना है तो परीक्षा दो, आम नेपाली युवा भी कंपटीशन में उतरेंगे
Nepal News: नेपाल के नए पीएम बालेन शाह एक के बाद एक बड़े फैसले ले रहे हैं

Nepal News: नेपाली सरकार ने गुरुवार को अलग-अलग देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में नेपाल के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधियों के तौर पर नियुक्ति के लिए योग्य नेपाली नागरिकों से अप्लीकेशन मांगे हैं. यह पहली बार है कि नेपाल के विदेश मंत्रालय ने आम नेपालियों के बीच खुले कॉम्पिटिशन के जरिए देश का राजदूत नियुक्त करने की कोशिश की है. हालांकि, मंत्रालय ने यह नहीं बताया है कि किन देशों के लिए आवेदन मांगे गए हैं.

पहले, जिन पोस्ट के लिए कॉम्पिटिशन की बात कही जा रही थी, उनमें भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रिया, बहरीन, बांग्लादेश, मलेशिया, ओमान और सऊदी अरब वगैरह देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संगठनों में पोस्टिंग शामिल थीं. हालांकि, मंत्रालय ने अब वह पेज हटा दिया है, जिसमें पहले आवेदकों के लिए देश के हिसाब से नियुक्त की जगह बताई गई थी.

पहले कैसे चुने जाते थे राजदूत

नेपाल में राजनीतिक निष्ठा और राजनीतिक दलों के बीच पावर-शेयरिंग अरेंजमेंट के आधार पर राजदूत नियुक्त करने के लंबे समय से चले आ रहे तरीके की बहुत ज्यादा आलोचना हो रही थी. इस बीच, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार ने नेपाल के विदेशी मिशनों में राजदूत नियुक्त करने के लिए एक प्रतियोगी चयन प्रक्रिया शुरू की है.

परांपरिक तौर पर, नेपाल में राजदूत की नियुक्ति राजनीतिक नॉमिनी और विदेश सेवा के करियर डिप्लोमैट के बीच बराबर बंटे होते हैं.

गुरुवार को पब्लिश हुए 'नेपाल के राजदूत के लिए कार्यक्षेत्र की शर्तें (टीओआर)' में विदेशों में नेपाल का प्रतिनिधित्व करने वाले राजदूत के लिए क्वालिफिकेशन, जिम्मेदारियां, नियुक्ति प्रक्रिया, कार्यकाल और आचार संहिता के बारे में बताया गया है. पात्रता (एलिजिबिलिटी) मानदंड के तहत, आवेदक की उम्र कम से कम 35 साल होनी चाहिए, उनके पास कम से कम ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए, और उन्हें नेपाल की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध या कूटनीति की जानकारी या अनुभव होना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीतिक विज्ञान, कानून, अर्थशास्त्र, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन या इससे जुड़े फील्ड में पोस्टग्रेजुएट डिग्री (मास्टर या उससे ज्यादा) को प्राथमिकता दी जाएगी. डिप्लोमेसी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार या बहुपक्षीय नेगोशिएशन में स्पेशल प्रशिक्षण या सर्टिफिकेशन; नेपाल की विदेश नीति से जुड़े एकेडमिक पब्लिकेशन, रिसर्च, या अहम स्कॉलरली कंट्रीब्यूशन; और नेशनल या इंटरनेशनल स्तर पर सीनियर गवर्नमेंट, डिप्लोमैटिक, कॉर्पोरेट, नॉन-गवर्नमेंटल, या पब्लिक सर्विस रोल में अच्छा-खासा नेतृत्व अनुभव भी फायदे माने जाएंगे.

उम्मीदवारों के पास दूसरे देशों में स्थायी या अस्थायी रेजिडेंसी स्टेटस या इमिग्रेशन बेनिफिट्स नहीं होने चाहिए और उन्हें भ्रष्टाचार या अनैतिक आचरण के मामले में दोषी नहीं ठहराया गया हो. टीओआर के मुताबिक, उम्मीदवारों का अपनी पोस्टिंग वाले देश में कोई विवाद या निहित स्वार्थ नहीं होना चाहिए. साथ ही, वे अभी किसी ऐसे गैर-सरकारी संगठन में काम नहीं कर रहे होने चाहिए जिसे अंतरराष्ट्रीय या विदेशी मदद से फंड मिलता हो.

मंत्रालय ने अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़, कूटनीतिक प्रक्रियाओं की समझ और वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस की जानकारी को भी अहम बताया है. इसके अलावा, व्यापार संवर्धन, निवेश सुविधा, बहुपक्षीय वार्ताओं या अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ काम करने का अनुभव उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त लाभ माना जाएगा.

टीओआर के अनुसार, राजदूत मेजबानी करने वाले देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठन में नेपाल के सबसे ऊंचे डिप्लोमैटिक प्रतिनिधि के तौर पर काम करेंगे. उनकी जिम्मेदारियों में नेपाल के राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक हितों को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश और व्यापार को आसान बनाना, विदेश में नेपाली नागरिकों की सुरक्षा करना और उनके साथ संबंद मजबूत करना शामिल होगा.

टीओआर में आर्थिक डिप्लोमेसी, टूरिज्म प्रमोशन, क्लाइमेट डिप्लोमेसी और पब्लिक एंगेजमेंट पर भी काफी जोर दिया गया है. राजदूत से उम्मीद की जाती है कि वे नेपाल को एक निवेश डेस्टिनेशन के तौर पर प्रमोट करेंगे, विकास में मदद जुटाएंगे और कल्चरल और पब्लिक कूटनीतिक पहल के जरिए नेपाल की अंतरराष्ट्रीय तस्वीर को बेहतर करेंगे.

राजदूतों का कार्यकाल चार साल तय किया गया है. हालांकि सरकार के पास यह अधिकार है कि अगर जरूरी समझा जाए तो वह राजदूतों को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले वापस बुला सकती है. इच्छुक आवेदकों से 5 जून तक अपने आवेदन जमा करने को कहा गया है. मंत्रालय ने कहा कि नियुक्तियां राजदूत नियुक्ति दिशानिर्देश, 2018 के अनुसार की जाएंगी.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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Ashutosh Kumar Singh
Chief Sub Editor
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