अमेरिका और ईरान फिर से खूनी जंग में कूद गए हैं. दोनों देशों के बीच का सीजफायर केवल 20-21 दिन टिक पाया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आदेश पर अमेरिकी सेना ने लगातार दो दिन ईरान पर हमला बोला है. जवाब में ईरान ने भी बहरीन, कतर और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से अटैक किया है. ऐसे में दोनों देशों की डील कराने में बिचौलिए की भूमिका निभाने वाला पाकिस्तान बैकफुट पर दिख रहा है. पाकिस्तान की चाहत थी कि वह इसी बहाने आतंकवादी देश के टैग के रूप में दामन पर लगा धब्बा धो सके (जो संभव नहीं) लेकिन नया संघर्ष उसके अरमानों पर पानी फेरता दिख रहा है.
पाकिस्तान ने क्या कहा?
पाकिस्तान ने बुधवार को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई और अमेरिका व ईरान से अपील की कि वे आपसी हमलों के बाद संयम बरतें. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि फिर से शुरू हुआ टकराव किसी के भी हित में नहीं है. पहले दिन के हमले के बाद आए इस बयान में आगे कहा गया, "पाकिस्तान सभी पक्षों से संयम बरतने और ऐसे किसी भी काम से बचने का आग्रह करता है जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता को और नुकसान पहुंच सकता है. क्षेत्र में शांति के साझा लक्ष्य को पाने के लिए लगातार बातचीत, संवाद और कूटनीति का कोई विकल्प नहीं है."
"पाकिस्तान सभी पक्षों से आग्रह करता है कि वे इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत अपनी-अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करें, जो इस क्षेत्र और उससे बाहर भी आपसी समझ, सम्मान और साझा समृद्धि के लिए एक मजबूत आधार बना हुआ है." पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस्लामाबाद, वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
सीजफायर खत्म
ट्रंप ने फिर से फुल स्केल की जंग की चिंता बढ़ा दी क्योंकि उन्होंने कहा है कि सीजफायर कराने वाला अंतरिम समझौता "खत्म" हो गया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह बातचीत जारी रहने देंगे. हमलों की वजह से पहले से ही नाजुक सीजफायर पर खतरा मंडरा रहा था, लेकिन ट्रंप के बयानों ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी और उनके बयान के बाद तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं. अगर फिर से संघर्ष शुरू होता है, तो यह पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले सकता है और इससे होर्मुज से होने वाली तेल-गैस की सप्लाई भी फिर से रुक सकती है.
ईरान का कहना है कि अंतरिम युद्धविराम समझौता उसे होर्मुज के ट्रैफिक को मैनेज करने का अधिकार देता है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी कलीबाफ, जो युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने की बातचीत में एक अहम वार्ताकार हैं, ने गुरुवार सुबह X पर एक पोस्ट में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा: "अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि दादागिरी करने और वादे तोड़ने की कीमत चुकानी पड़ती है. मैं साफ-साफ कहता हूं- अगर आप हमला करेंगे, तो आपको भी मार पड़ेगी."
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं