पाकिस्तान के मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन की जान पर खतरा को लेकर बड़ा चौंकाने वाला दावा किया गया है. यह दावा अल्ताफ हुसैन ने खुद किया है. उन्होंने दावा किया है कि दो नकाबपोश लोगों ने उनके घर में घुसने की कोशिश की. हुसैन की पार्टी की ओर से सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया गया है, जिसमें कथित तौर पर दो नकाबपोश लोग घर में दाखिल होने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं. यह घटना लंदन की है. अल्ताफ हुसैन अभी लंदन में रह रहे हैं. हालांकि, इस घटना के पीछे कौन है और इसका मकसद क्या था, यह अभी साफ नहीं है. अल्ताफ हुसैन का जन्म पाकिस्तान में हुआ था. उनके माता-पिता बंटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए थे.
हुसैन का बचपन कराची के अजीजाबाद इलाके में बीता. उन्होंने कराची विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और 1979 में फार्मेसी में स्नातक की डिग्री हासिल की. राजनीति में पूरी तरह आने से पहले उन्होंने अस्पताल और दवा क्षेत्र में भी काम किया.
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अल्ताफ हुसैन के लंदन वाले घर में घुसते दिखे दो नकाबपोश.
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
हुसैन ने 11 जून 1978 को कराची विश्वविद्यालय में ऑल पाकिस्तान मोहाजिर स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (APMSO) की स्थापना की. यह संगठन मोहाजिर छात्रों के राजनीतिक और शैक्षणिक अधिकारों को लेकर काम करता था. आगे चलकर यही संगठन MQM के लिए आधार बना.
1984 में मोहाजिर कौमी मूवमेंट (MQM) का गठन हुआ और अल्ताफ हुसैन इसके प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए. पार्टी ने जल्द ही कराची और हैदराबाद में अपना प्रभाव बढ़ा लिया. 1988 के आम चुनाव में MQM शहरी सिंध की बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और बाद में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार के साथ भी राजनीतिक समझौता किया.
MQM का कराची की राजनीति में बड़ा प्रभाव
1980 और 1990 के दशक में कराची की राजनीति में MQM का प्रभाव काफी बढ़ गया. इसी दौर में शहर में अलग-अलग राजनीतिक और हथियारबंद समूहों के बीच हिंसा भी हुई. MQM के शुरुआती दौर में पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया व्यवस्था के साथ उसके संबंधों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे. बाद में दोनों के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया.
1991 में हत्या की कोशिश के बाद चले गए थे लंदन
1991 के आखिर में कथित हत्या की कोशिश के बाद अल्ताफ हुसैन पाकिस्तान छोड़कर ब्रिटेन चले गए और वहां राजनीतिक शरण मांगी. जून 1992 में पाकिस्तान ने कराची में MQM के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया. इसके बाद हुसैन लंदन से ही MQM की गतिविधियों और संगठन को प्रभावित करते रहे.
करीब तीन दशक तक लंदन में रहते हुए भी कराची की राजनीति में उनका प्रभाव बना रहा. उनके समर्थक उन्हें मोहाजिर समुदाय का प्रमुख राजनीतिक नेता मानते रहे, जबकि पाकिस्तानी सरकार और विरोधियों ने MQM तथा उससे जुड़े लोगों पर हत्या, जबरन वसूली और हिंसा जैसे गंभीर आरोप लगाए.
हुसैन और MQM ने इन आरोपों से इनकार किया है. यही राजनीतिक प्रभाव और हिंसा से जुड़े आरोप अल्ताफ हुसैन की विवादित राजनीतिक विरासत का अहम हिस्सा रहे हैं.
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