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पाकिस्तान में हटा पीरिएड टैक्स, भारत से यूरोप तक महिलाओं को इस बेसिक जरूरत के लिए लड़नी पड़ी लड़ाई

दुनिया की आधी आबादी के मासिक धर्म से जुड़े उत्पादों को लंबे समय तक लग्जरी माना गया. लेकिन जागरूकता और अलग-अलग आंदोलनों के बाद इस पर लगने वाले टैक्स को खत्म किया गया. अब पाकिस्तान में भी पीरियड टैक्स को खत्म किया जा रहा है.

पाकिस्तान में हटा पीरिएड टैक्स, भारत से यूरोप तक महिलाओं को इस बेसिक जरूरत के लिए लड़नी पड़ी लड़ाई
पाकिस्तान के पंजाब में लगे स्वास्थ्य शिविर की कतार में खड़ी लड़कियां और महिलाएं. अब यहां सरकार पीरियड टैक्स खत्म करने जा रही है.
सोशल मीडिया
  • महिलाएं अपने जीवन में करीब 450 बार पीरियड्स से गुजरती हैं. इसके लिए औसतन हर महीने 15-25 पैड की जरूरत पड़ती है.
  • लेकिन लंबे समय तक पैड सहित अन्य मासिक धर्म वाली उत्पादों को लग्जरी आइटम माना गया.
  • जिस कारण इस बेसिक जरूरत पर भी टैक्स था. पाकिस्तान में अब इस टैक्स को हटाने का फैसला हुआ है.

Pakistan Period Tax: महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़े उत्पाद जैसे सैनिटरी पैड्स, टैम्पोन, मेस्ट्रुअल कप पर लगने वाले टैक्स को पीरियड टैक्स कहा जाता है. शुरुआत में इन चीजों को विलासिता से जोड़कर भारी टैक्स की वसूली की जाती थी. अलग-अलग देशों में पैड्स और इससे जुड़े जुड़े अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां 60 फीसदी तक टैक्स वसूलती थी. बाद में लोगों की जागरूकता बढ़ी, अलग-अलग देशों में पीरियड टैक्स के खिलाफ आंदोलन हुए और धीरे-धीरे कई देशों ने इन उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को समाप्त कर दिया. आज के समय में कई देशों में पैड्स निशुल्क बांटे जाते हैं. लेकिन आपको जानकर यह हैरत होगी कि इस जमाने में भी पाकिस्तान में मासिक धर्म से जुड़े उत्पादों पर 18 फीसदी तक टैक्स वसूला जाता है. 

लेकिन एक लंबी कानूनी लड़ाई और दो युवा वकीलों के अभियान के बाद अब पाकिस्तान सरकार सैनिटरी प्रोडक्ट्स पर सेल्स टैक्स खत्म करने जा रही है. इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है. 

पाकिस्तान सरकार ने बजट में की घोषणा

पाकिस्तान में सैनिटरी आइटम और कॉन्ट्रासेप्टिव (गर्भनिरोधक) पर 18% सेल्स टैक्स हटाने का यह फैसला पिछले हफ्ते देश के बजट में घोषित किया गया था. यह फैसला कमर्शियल पीरियड प्रोडक्ट्स तक बेहतर पहुंच के लिए चलाए गए अभियान के बाद लिया गया है, क्योंकि देश में बहुत कम महिलाएं ही इनका इस्तेमाल करती हैं.

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब.

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब.
Photo Credit: सोशल मीडिया

वित्त मंत्री बोले- महिलाओं की सेहत और सम्मान के लिए जरूरी बातें

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा, 'ऐसी चीजें महिलाओं की सेहत, सम्मान और सामाजिक गतिविधियों में पूरी तरह से शामिल होने के लिए बहुत जरूरी हैं.' औरंगजेब ने कहा कि सरकार कॉन्ट्रासेप्टिव पर भी टैक्स खत्म करेगी, क्योंकि देश में आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है, जो चिंता की बात है.  उन्होंने कहा, 'आबादी के मामले में पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है. परिवार नियोजन सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है.'

दो युवा वकीलों की लड़ाई के बाद पाकिस्तान में खत्म हो रहा पीरियड टैक्स 

पाकिस्तान में पीरियड टैक्स को हटाने का श्रेय दो वकीलों को जाता है. वकील अहसान जहांगीर खान (29) और महनूर ओमर (25) ने पाकिस्तान में इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस पर ला दिया. उन्होंने एक अहम कानूनी मामले में सरकार को अदालत में चुनौती दी थी और कानून बनाने वालों से तथाकथित 'पीरियड टैक्स' हटाने और मासिक धर्म से जुड़े प्रोडक्ट्स को लग्ज़री आइटम के बजाय ज़रूरी सामान की श्रेणी में रखने की मांग की थी.

पाकिस्तान में पीरियड टैक्स समाप्त किए जाने को बड़ा कदम माना जा रहा है.

पाकिस्तान में पीरियड टैक्स समाप्त किए जाने को बड़ा कदम माना जा रहा है.

पाकिस्तान में मात्र 12 फीसदी लड़कियां सैनिटरी प्रोडक्ट्स का करती इस्तेमाल

संयुक्त राष्ट्र की बच्चों की एजेंसी UNICEF के अनुसार, अनुमान है कि पाकिस्तान में सिर्फ 12% महिलाएं और लड़कियां ही कमर्शियल सैनिटरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं. जानकारों का कहना है कि बाकी ज्यादातर महिलाएं कपड़े और घर पर बने दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल करती हैं.

अक्टूबर में खान और ओमर की तरफ़ से दायर कानूनी याचिका के अनुसार, इनके कम इस्तेमाल की एक वजह इनकी कीमत भी है; स्थानीय स्तर पर बने प्रोडक्ट्स पर अभी 18% सेल्स टैक्स लगता है, और बाहर से मंगाए गए प्रोडक्ट्स पर 25% अतिरिक्त कस्टम्स टैक्स लगता है.

UNICEF के अनुसार, दूसरे लोकल टैक्स के साथ मिलाकर पाकिस्तान में महिलाओं को पीरियड प्रोडक्ट्स पर कुल 40% सरचार्ज देना पड़ता है, जिससे सबसे कमज़ोर वर्ग के लिए ये चीज़ें खरीदना मुश्किल हो जाता है.

एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं अपने जीवनकाल में करीब 450 बार पीरियड्स से गुजरती हैं. इसके लिए औसतन उन्हें हर महीने 15 से 25 पैड की जरूरत पड़ती है.

पीरियड टैक्स का वैश्विक इतिहास, 2004 में कीनिया से हुई शुरआत

हाल के सालों में भारत, नेपाल, स्कॉटलैंड और अमेरिका के एक दर्जन से ज़्यादा राज्यों समेत कई सरकारों ने पीरियड प्रोडक्ट्स पर टैक्स कम करने या हटाने के लिए ऐसे ही सुधार किए हैं. पीरियड टैक्स को हटाने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम 2004 में कीनिया ने उठाया था. 

  • कीनिया (2004): कीनिया दुनिया का पहला देश बना जिसने सैनिटरी पैड और टैम्पोन पर से 60% वैट (VAT) को पूरी तरह खत्म कर ऐतिहासिक शुरुआत की.
  • कनाडा (2015): कनाडाई सरकार ने बड़े राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद जुलाई 2015 में मासिक धर्म उत्पादों पर से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) हटा दिया.
  • भारत (2018): भारत सरकार ने साल 2017 में लागू हुए नए GST ढांचे में सैनिटरी पैड्स पर 12% टैक्स लगा दिया था, जिसे कार्यकर्ताओं ने "ब्लड टैक्स" (खून पर कर) का नाम दिया. व्यापक अभियानों के बाद जुलाई 2018 में भारत ने सैनिटरी पैड्स को पूरी तरह टैक्स-मुक्त कर दिया.
  • यूनाइटेड किंगडम (2021): यूरोपीय संघ (EU) के नियमों के कारण ब्रिटेन पहले सैनिटरी उत्पादों पर 5% से कम टैक्स नहीं कर सकता था. ब्रेक्सिट (Brexit) प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद, 1 जनवरी 2021 को ब्रिटेन ने इस टैक्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया.
  • यूरोपीय संघ (2022): साल 2022 में यूरोपीय संघ ने अपने दशकों पुराने नियमों में ढील दी. इसके बाद सदस्य देशों (जैसे जर्मनी, फ्रांस, इटली) को सैनिटरी पैड्स पर लगने वाले वैट को न्यूनतम करने या पूरी तरह शून्य करने की कानूनी आजादी मिली.

स्कॉटलैंड दुनिया का पहला देश, जहां फ्री में बांटे जाते पैड्स

स्कॉटलैंड का ऐतिहासिक कानून टैक्स हटाने से भी एक कदम आगे बढ़कर, स्कॉटलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश बना जिसने 2021 में 'पीरियड प्रोडक्ट्स फ्री प्रोविज़न एक्ट' लागू किया. इस कानून के तहत सभी सरकारी स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर मासिक धर्म से जुड़े उत्पाद हर किसी के लिए पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं.

यह भी पढ़ें - 'पीरियड टैक्स' और पाकिस्तान पर केस! 25 साल की मेहनूर ओमर ने सरकार को क्‍यों घसीटा है कोर्ट में 

लेखक के बारे में
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प्रभांशु रंजन
चीफ सब एडिटर
2017 में राजस्थान पत्रिका से पेशेवर पत्रकारिता जीवन की शुरुआत. इसके बाद इंडिया न्यूज, दैनिक भास्कर होते हुए NDTV में कार्यरत. डिजिटल से करियर की शुरुआ... और पढ़ें
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