- मलिक रियाज़ पर 700 अरब रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी भूमि के गलत उपयोग के आरोप हैं
- मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मलिक रियाज़ को 2024 में अपराधी घोषित किया गया था और भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं
- NAB प्रमुख नजीर अहमद बट ने IMF और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्टों को पक्षपाती और अविश्वसनीय बताया है
प्रॉपर्टी टायकून मलिक रियाज़ के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) के अनुरोध पर इंटरपोल ने प्रॉपर्टी टायकून मलिक रियाज हुसैन और उनके बेटे के खिलाफ रेड नोटिस जारी किए हैं. भ्रष्टाचार विरोधी संस्था के प्रमुख नजीर अहमद बट ने संकल्प लिया कि अधिकारी उन्हें 700 अरब रुपये (2.5 अरब डॉलर) से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों का सामना करने के लिए यूएई (UAE) से वापस लाएंगे. मलिक रियाज़ यूएई खासकर दुबई में टॉप‑5 निवेशकों में गिने जाते हैं. अरबों डॉलर की इन्वेस्टमेंट, बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और हजारों नौकरियों के चलते यूएई के लिए फैसला आसान नहीं होगा. हालांकि, मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियो‑पॉलिटिकल तनाव और हालिया हालात के बीच यह भी संभावना जताई जा रही है कि मलिक रियाज़ पाकिस्तान लौट सकते हैं या नैब के साथ डील कर सकते हैं.

क्या है मामला?
नैब (NAB) कई मामलों में हुसैन की जांच कर रहा है जिनमें उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और निजी हाउसिंग सोसायटियों के लिए सरकारी भूमि का उपयोग करने का आरोप है. हुसैन पाकिस्तान के सबसे अमीर और प्रभावशाली व्यवसायियों में से एक हैं, जिन्हें बहरिया टाउन लिमिटेड रियल एस्टेट फर्म के अध्यक्ष के रूप में जाना जाता है. हुसैन ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का लगातार खंडन किया है, उनका कहना है कि उन्हें "राजनीतिक उद्देश्यों" के कारण दबाव में लिया जा रहा है और पाकिस्तान भर में उनके प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के खिलाफ नब की कार्रवाई के कारण उन्हें वित्तीय नुकसान हो रहा है. हालांकि, हुसैन ने कभी यह नहीं बताया कि उन पर कौन दबाव बना रहा है. रियाज, जो वर्तमान में यूएई में रह रहे हैं, उन्हें 2024 में अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में घोषित अपराधी करार दिया गया था. इस मामले में आरोप हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी को, 2018 से 2022 तक खान के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान, अवैध लाभ के बदले रिश्वत के रूप में हुसैन द्वारा भूमि उपहार में दी गई थी. इसके साथ ही अधिकारियों और जजों को भी गिफ्ट में जमीन बांटी गई.

जज, अधिकारी, पत्रकार सब शामिल
इस्लामाबाद में कुल 18 हजार से ज्यादा प्लॉट सरकारी कर्मचारियों, जजों, पत्रकारों और कुछ प्राइवेट व्यक्तियों को आवंटित किए गए. केवल नाममात्र चार्ज लेकर कीमती सरकारी जमीन बांटी गई. 80% लाभार्थी रिटायर्ड अफसर हैं. ग्रेड‑22 के कई अफसरों को 3‑3 और 4‑4 प्लॉट मिले. सूत्रों के अनुसार, इनमें 40 से ज्यादा जज (हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट), 17 इंस्पेक्टर जनरल पुलिस, 18 कैबिनेट सेक्रेटरी, 10 चेयरमैन FBR दर्जनों फेडरल और प्रांतीय सेक्रेटरी शामिल हैं. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 24 सिविल सर्वेंट्स की पत्नियों को भी अलग‑अलग प्लॉट दिए गए. कुछ अफसर ऐसे हैं, जिनके पास देश के अलग‑अलग हिस्सों में चार तक सरकारी प्लॉट हैं – CDA, LDA, कराची और कोऑपरेटिव सोसायटीज़ से.
2006 में शुरू हुआ यह सिलसिला
2014 में हाउसिंग सेक्रेटरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को इसे नीति के खिलाफ बताया. इस्लामाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इसे “स्पिरिट ऑफ लॉ” के खिलाफ करार दिया. इसके बावजूद, कई सेक्टरों – E‑7, G‑11, G‑12, F‑14, F‑15 – में प्लॉट्स दिए जाते रहे.
आईएमएफ (IMF) रिपोर्ट 'अत्यधिक पक्षपाती'
नजीर अहमद बट ने प्रमुख सरकारी संस्थानों की आलोचना के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (TI) की आलोचना की और कहा कि वे पाकिस्तान को नकारात्मक रूप में चित्रित कर रहे हैं. पिछले साल प्रकाशित अपने गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट (GCDA) में, आईएमएफ ने प्रमुख पाकिस्तानी संस्थानों की कमजोरियों पर प्रकाश डाला था और देश में बढ़ते भ्रष्टाचार के जोखिमों से जुड़ी कमजोरियों को दूर करने के लिए 15-सूत्रीय सुधार एजेंडे को प्राथमिकता देने का आह्वान किया था. यह स्वीकार करते हुए कि नैब ने 2023-24 में 5.31 ट्रिलियन रुपये (18.8 अरब डॉलर) वसूल किए, रिपोर्ट में कहा गया कि भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था 2022 और 2024 के बीच केवल 31 भ्रष्टाचार दोषसिद्धि (convictions) सुरक्षित कर सकी, जिसमें नैब के अपने आंकड़ों का हवाला दिया गया. बट ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट अविश्वसनीय डेटा और "गलत मूल्यांकन" के साथ संकलित की गई थी. उन्होंने मीडिया से कहा, "आईएमएफ की रिपोर्ट अत्यधिक पक्षपाती है और यह आधारहीन डेटा पर आधारित है. मेरे लिए, इस रिपोर्ट का कोई महत्व नहीं है." बट ने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (TI) की भी आलोचना की, जिसने 2023 की एक रिपोर्ट में कहा था कि पुलिस और न्यायपालिका पाकिस्तान के सबसे भ्रष्ट संस्थानों में से हैं. उन्होंने टीआई के डेटा संग्रह को "संदिग्ध और अविश्वसनीय" बताया. बट ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में हमारे द्वारा की गई ऐतिहासिक प्रगति के बावजूद ये दो संस्थान पाकिस्तान के बारे में कुछ भी अच्छा नहीं कहेंगे."
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