- रूस के वीडियोग्राफर पावेल तालानकिन को मार्च में बेस्ट डॉक्युमेंट्री का ऑस्कर अवॉर्ड मिला था
- लुफ्थांसा एयरलाइंस ने डिब्बे में ऑस्कर ट्रॉफी को पैक करके भेजा, जो रास्ते में ही कहीं गायब हो गई
- पावेल ने रूस में दो साल तक टीचर की नौकरी कर यूक्रेन युद्ध के प्रोपेगेंडा पर डॉक्युमेंट्री बनाई थी
ऑस्कर अवॉर्ड को दुनिया में फिल्म जगत का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है. लेकिन क्या हो कि कोई कहे कि ये गोल्डन ट्रॉफी कोई अवॉर्ड नहीं बल्कि 'घातक हथियार' है. रूस के वीडियोग्राफर पावेल तालानकिन के साथ न्यूयॉर्क के JFK एयरपोर्ट पर कुछ ऐसा ही हुआ है. चौंकाने वाली बात ये है कि एयरपोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने ऑस्कर ट्रॉफी को हथियार मानकर फ्लाइट में ले जाने से रोक दिया, और ये ट्रॉफी बीच रास्ते में गुम हो गई. हालांकि बड़े पैमाने पर तलाश के बाद ट्रॉफी अब मिल गई है.
जहां मिला पुरस्कार, वहीं मान लिया हथियार
हैरानी की बात ये भी है कि ऑस्कर ट्रॉफी को उसी देश में 'हथियार' करार दे दिया गया, जो खुद उसे दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्मकारों को बांटता है. ऑस्कर को आधिकारिक तौर पर अकादमी अवॉर्ड्स कहा जाता है और अमेरिका में कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस स्थित हॉलीवुड में आयोजित भव्य समारोह में इसे प्रदान किया जाता है. करीब पौने चार किलो वजनी इस ट्रॉफी को मिश्रित धातु के ऊपर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाकर बनाया जाता है.

मार्च में ही रूसी को मिला था ऑस्कर
35 वर्षीय रूसी वीडियोग्राफर पावेल टालानकिन को इस साल मार्च में ही हॉलीवुड में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया गया था. पावेल को Mr Nobody Against Putin" के लिए बेस्ट डॉक्युमेंट्री का ऑस्कर अवॉर्ड मिला था. ये डॉक्युमेंट्री उन्होंने अमेरिकी फिल्ममेकर डेविड बोरेस्टीन के साथ मिलकर बनाई थी.

पुतिन के वॉर प्रोपेगेंडा पर बनाई थी डॉक्युमेंट्री
ये डॉक्युमेंट्री भी कोई ऐसी वैसी नहीं है, इसमें युद्ध को लेकर रूसी राष्ट्रपति पुतिन की सनक और प्रोपेगेंडा को दिखाया गया है. इससे रूस इतना खफा हुआ कि पावेल को विदेशी एजेंट घोषित करके तमाम तरह के प्रतिबंध लगा दिए. रूसी अदालत ने इस डॉक्युमेंट्री को बैन कर रखा है.
2 साल तक रूसी स्कूल में नौकरी कर जुटाए सबूत
फिल्मी न्यूज पोर्टल डेडलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, पावेल ने इस डॉक्युमेंट्री पर रिसर्च के लिए रूस के पश्चिमी-मध्य इलाके चेल्याबिंस्क के एक स्कूल में दो साल तक टीचर की नौकरी की ताकि यूक्रेन युद्ध को लेकर चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा के सबूत इकट्ठा कर सकें. बाद में फुटेज लेकर 2024 में रूस से भाग आए और डॉक्युमेंट्री बनाई. लेकिन बेस्ट डॉक्युमेंट्री के लिए उन्हें मिली ऑस्कर ट्रॉफी गुम हो गई.

न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर ट्रॉफी को बताया हथियार
वाकया तब शुरू हुआ, जब पावेल मार्च में मिली अपनी सुनहरी ट्रॉफी को बैग में रखकर बुधवार को न्यूयॉर्क के जॉन एफ केनेडी एयरपोर्ट पहुंचे. उन्हें जर्मनी जाना था. पावेल का कहना है कि एयरपोर्ट पर अमेरिकी सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें विमान में ऑस्कर ट्रॉफी ले जाने की इजाजत नहीं दी. यूएस ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) के अधिकारियों का कहना था कि इस ट्रॉफी का इस्तेमाल घातक हथियार के तौर पर हो सकता है.
दर्जनों बार विमान में साथ ले गए थे ट्रॉफी
पावेल के मुताबिक, उन्होंने एयरपोर्ट अधिकारियों को बहुत समझाने की कोशिश की कि वो पहले भी दर्जनों बार इस ट्रॉफी को लेकर विमान में सफर कर चुके हैं, लेकिन कभी कोई दिक्कत नहीं हुई. फिर भी अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और साफ कह दिया कि वो इस गोल्डन ट्रॉफी को विमान में साथ नहीं ले जा सकते.

गत्ते के डिब्बे में पैक कर रखवा दी ट्रॉफी
लुफ्थांसा एयरलाइंस के कर्मचारियों ने भी एयरपोर्ट अधिकारियों से रिक्वेस्ट की और कहा कि वो चाहें तो एयरलाइंस का कर्मी वह खुद अपनी सुरक्षा में इस ट्रॉफी को विमान में ले जाएगा, चाहे तो सुरक्षाकर्मी खुद विमान के गेट तक साथ में चल सकते हैं. लेकिन अधिकारी थे कि कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए और एयरलाइंस कर्मी के जरिए ऑस्कर ट्रॉफी को गत्ते के डिब्बे में पैक करवाकर चेक-इन लगेज में भिजवा दिया.
फ्लाइट पहुंची, ट्रॉफी गुम, अब हो रही तलाश
लेकिन कहानी का असली क्लाइमेक्स अभी बाकी था. पावेल की फ्लाइट जब जर्मनी के फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर उतरी तो उन्हें न वो डिब्बा मिला और न ही उसमें रखी ऑस्कर ट्रॉफी. ऑस्कर विनर की ट्रॉफी गुम होने की खबर से हड़कंप मच गया. एयरलाइन और सुरक्षा एजेंसियां उस सुनहरी मूर्ति को ढूंढने में जुट गईं. लुफ्थांसा ने बयान में बताया कि गहन तलाशी में ट्रॉफी मिल गई है और अब उसे मालिक को लौटाया जा रहा है.
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