नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ के बाद 150 से ज्यादा लोगों की मौत होने की खबर है. इस बाढ़ के बाद से सैकड़ों लोग लापता हैं. लापता लोगों में कम से कम 142 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग शामिल हैं. इन लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल हैं. इन्हीं लापता भारतीयों में अमेरिका निवासी दीपक और मधु आहूजा भी शामिल है. घटना के समय यह दंपति तिब्बत के ग्यिरोंग इमिग्रेशन केंद्र में मौजूद थे. इस जगह पर अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. इस दंपति के दामाद आकाश महतानी ने लोगों से जानकारी देने की अपील की है.
नेपाल में अब तक कितने शव मिले हैं
नेपाल पुलिस ने अब तक 162 शव बरामद किए हैं. अधिकारी बाढ़ के खतरे वाले इलाकों में रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. भारी बारिश के कारण हिमालयी सीमा क्षेत्र में अचानक बाढ़, भूस्खलन और बड़े पैमाने पर मलबा गिरने की घटनाएं हुई हैं. इसका सबसे ज्यादा असर ग्यिरोंग (केरुंग) इमिग्रेशन पोर्ट के आसपास हुआ है. यह तिब्बत और नेपाल के बीच आने-जाने का एक प्रमुख रास्ता है.
सरकार और बचाव दल प्रभावित लोगों को बचाने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं. वहीं, अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है.ऐसे ही परिवारों में से एक आहूजा परिवार है. इस परिवार के 60 साल के दीपक आहूजा और 57 साल की उनकी पत्नी मधु आहूजा अचानक आई बाढ़ के बाद से लापता हैं. ये दोनों अमेरिकी नागरिक और भारत के ओसीआई (ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया) कार्डधारक हैं.

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यह दंपति ईशा फाउंडेशन के ईशा सेक्रेड वॉक्स के साथ यात्रा कर रहा था. इस संस्था ने पुष्टि की है कि बाढ़ आने के समय वे तिब्बत के ग्यिरोंग इमिग्रेशन केंद्र में मौजूद थे. यह दंपति कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अमेरिका से आई थी. ईशा सेक्रेड वॉक्स की ओर से आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा से वे वापस लौट रहे थे. वे एस3 ग्रुप में शामिल थे. इस तरह का यह 26वां यात्री दल था. वापसी के दौरान इलाके में अचानक से मौसम बेहद खराब हो गया.
इस घटना के बाद से आहूजा परिवार दीपक और मधु आहूजा से संपर्क करने और उनके बारे में पता लगाने के लिए मदद मांग रहा है. हालांकि, बाढ़ के कारण टेलीकॉम सेवाएं, बिजली और सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इससे सीमा के दोनों तरफ राहत और बचाव कार्य काफी मुश्किल हो गया है.
आखिरी बार कहां देखे गए?
परिवार और यात्रा से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, दीपक और मधु आहूजा को आखिरी बार तिब्बत के सागा में देखा गया था. वहां उन्होंने अपने यात्रा दल के साथ सद्गुरु से मुलाकात की थी. इसके बाद वे नेपाल सीमा की ओर रवाना हुए.आहूजा परिवार के मुताबिक, 26 अगस्त को स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे उनका फोन आखिरी बार तिब्बत के ग्यिरोंग इमिग्रेशन केंद्र के आसपास सक्रिय हुआ था. यात्रा की तय योजना के मुताबिक उन्हें ग्यिरोंग पोर्ट पर इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर नेपाल के तिमुरे में प्रवेश करना था. वहां से उन्हें सड़क के रास्ते रसुवा जिले से होते हुए नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचना था. वहां से उन्हें दिल्ली और फिर अमेरिका के लिए उड़ान पकड़नी थी.

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भारी बारिश की वजह से अचानक आई बाढ़ और मलबे ने सीमा क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया. इस बाढ़ में कई महत्वपूर्ण पुल बह गए और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. सीमा क्षेत्र में संचार व्यवस्था लगभग पूरी तरह ठप हो गई. इस दौरान दीपक और मधु का अपने परिवार से संपर्क टूट गया. दीपक और मधु आहूजा ने ट्रेकर्स सोसाइटी के जरिए यह यात्रा की थी.
आहूजा परिवार ने ग्यिरोंग, तिमुरे, स्याब्रुबेसी, रसुवा या नुवाकोट में काम कर रहे बचाव दल, अस्थायी अस्पताल, हेलीकॉप्टरों से लोगों को निकालने वाली टीमों और स्थानीय स्वयंसेवकों से अपील की है कि वे दीपक और मधु आहूजा का नाम आपातकालीन रजिस्टर, राहत शिविरों की सूची और अस्पतालों के रिकॉर्ड में खोजें. अगर किसी व्यक्ति को उनके बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो वह तुरंत परिवार या स्थानीय संपर्क अधिकारियों को जानकारी दे सकता है.
आहूजा परिवार के अनुसार दीपक और मधु आहूजा के पास अमेरिकी पासपोर्ट हैं. इसलिए अमेरिकी और भारतीय अधिकारियों के पास उनकी सुरक्षा और स्थिति की जानकारी लेने के लिए आधिकारिक अनुरोध भी किया गया है.
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