नेपाल में इस समय धान की रोपाई का सबसे अहम समय चल रहा है, लेकिन इस बार खेतों में हरियाली की जगह चिंता दिखाई दे रही है. किसान परेशान हैं क्योंकि कई इलाकों में बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जबकि किसानों को समय पर खाद भी नहीं मिल रही. ऐसे में मजबूरी में कई किसान भारत की सीमा से महंगी और घटिया तस्करी वाली खाद खरीदने को मजबूर हैं. ऐसी स्थिति में अब नेपाल सरकार की सबसे बड़ी उम्मीद भारत से आने वाली खाद की खेप पर टिकी है.
नेपाल की हालत
नेपाल सरकार हर साल 29 जून (नेपाली कैलेंडर से आषाढ़ 15) को राष्ट्रीय धान दिवस मनाती है. वैसे तो इस दिन को मनाने का मकसद नेपाल की मुख्य खाद्य फसल धान को बढ़ावा देना है लेकिन इस बार किसानों के चेहरों पर खुशी नहीं दिख रही है. नेपाली अखबार रातोपाटी की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में आषाढ़ महीने के बीच तक भी रोपाई उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाई है. एक तरफ मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं होने से देश के ज्यादातर हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं. दूसरी तरफ, धान की सबसे जरूरी रोपाई के समय रासायनिक खाद (केमिकल फर्टिलाइजर) की भारी कमी है.
इतना ही नहीं बाजार में सरकारी सब्सिडी वाली खाद नहीं मिलने के कारण कई नेपाली किसान कथित तौर पर भारत की सीमा के बाजारों से तस्करी करके लाई गई महंगी और खराब क्वालिटी वाली खाद खरीदने को मजबूर हैं.
भारत से उम्मीद लगाई बैठी नेपाल सरकार
इस रिपोर्ट के अनुसार इस समय नेपाल भर के खाद डिपो से हर दिन 2,500 से 3,000 टन खाद बांटी जा रही है. धान की रोपाई के सबसे बिजी समय में यह मात्रा बढ़कर 5,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच सकती है. सरकार ने अषाढ़ के अंत तक करीब 6 लाख टन खाद बांटने का टारगेट रखा है.
इस बीच नेपाल सरकार को उम्मीद है कि अगस्त के पहले हफ्ते तक खाद की उपलब्धता और बेहतर हो जाएगी. इसकी वजह यह है कि भारत के साथ सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत आने वाली खाद जुलाई के आखिरी सप्ताह तक नेपाल पहुंचने की उम्मीद है. इसके अलावा कोलकाता बंदरगाह पर पहुंच चुके छह जहाजों में मौजूद करीब 2.45 लाख टन खाद भी धीरे-धीरे नेपाल पहुंचना शुरू हो जाएगी.
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