उत्तर प्रदेश का बलरामपुर जिला नेपाल राष्ट्र के साथ करीब 85 किलोमीटर लंबी खुली सीमा साझा करता है. यहां एसएसबी पहरे पर है. अब जिले के सीमावर्ती इलाके से जुड़ा एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने 'दोहरी नागरिकता' के संदेह में 27 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि नेपाल के इन नागरिकों ने न सिर्फ भारत की वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा लिया, बल्कि फर्जी तरीके से आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेज बनवाकर सरकारी योजनाओं का जमकर फायदा भी उठाया. जिला प्रशासन की जांच के बाद थाना जरवा पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की है. इसे सीमा सुरक्षा और नागरिकता सत्यापन के लिहाज से एक बेहद गंभीर प्रकरण माना जा रहा है.
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मामले के अधिकांश आरोपी मूल रूप से नेपाल के डांग जिले (कोइलाबास क्षेत्र) के रहने वाले हैं. लेकिन, इन्होंने भारत में भी फर्जी तरीके से अपना पता दर्ज करा लिया. बलरामपुर जिले के थाना जरवा क्षेत्र के ग्राम बालापुर (अनवरडीह) और थाना तुलसीपुर क्षेत्र के शीतलापुर में इनका भारतीय पता दर्ज मिला. जब पुलिस ने गोपनीय जांच की और दोनों देशों की मतदाता सूचियों का मिलान किया, तो बड़ा खुलासा हुआ. इन लोगों के नाम भारत और नेपाल, दोनों जगहों की वोटर लिस्ट में दर्ज मिले. इतना ही नहीं, भारतीय पहचान पत्रों के जरिए ये लोग विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी ले रहे थे.
डीएम के निर्देश पर कराई गई थी जांच
बताया जाता है कि यह पूरी कार्रवाई बलरामपुर के जिलाधिकारी के निर्देश पर 23 जून 2026 को कराई गई एक जांच के आधार पर की गई है. जांच रिपोर्ट के बाद उपनिरीक्षक शम्भू सिंह की विस्तृत तहरीर पर थाना जरवा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. जिन 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है, उनमें अब्दुल कादिर सिद्दीकी, सलीम सिद्दीकी, अब्दुल रहमान, खुतीजा खातून, फातिमा सिद्दीकी, रेशमा, कमाल अहमद, ओसामा और यासिर अराफात सहित अन्य नाम शामिल हैं.

दो बड़ी गड़बड़ियां आई सामने
जांच में दो बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं. पहली गायब आरोपी मिले हैं, ग्राम बालापुर निवासी अब्दुल रहमान नाम का व्यक्ति पुलिस जांच के दौरान अपने पते पर रहता हुआ नहीं मिला। दूसरी मृत व्यक्ति का नाम भी अभिलेखों में दर्ज: है. अब्दुल अजीज सिद्दीकी नाम के एक व्यक्ति की कुछ महीने पहले मौत हो चुकी है, इसके बावजूद उसका नाम दस्तावेजों में दर्ज पाया गया. पुलिस इन तथ्यों की अलग से जांच कर रही है.
जांच में निर्वाचन विभाग और यूआईडीएआई की भी मदद ली जाएगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और बैंक रिकॉर्ड्स का विस्तृत सत्यापन कर रही है. इसके लिए निर्वाचन विभाग और यूआईडीएआई की भी मदद ली जाएगी. यह भी जांच की जा रही है कि किन लोगों ने किस सरकारी योजना का कितना लाभ उठाया है. प्रशासन अब सीमावर्ती अन्य गांवों में भी ऐसे मामलों की जांच के लिए अभियान तेज करने की तैयारी में है.
27 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, "थाना जरवा में 27 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. इसमें प्रकरण कुछ इस प्रकार है कि ये 27 लोग जो भारत के वोटर आईडी भी रखे हुए हैं, भारत के इलेक्टोरल लिस्ट में भी इनका नाम है और साथ ही साथ गोपनीय जांच में यह तथ्य भी निकल के सामने आया है, जिसके सापेक्ष दस्तावेज भी हम लोगों ने प्राप्त किया है कि नेपाल के वोटर लिस्ट में भी इनका नाम है और ये यहां पर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।"
(बलरामपुर से योगेंद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट)
उन्होंने कहा, "इसी में पूरा जांच करके 27 लोगों के विरुद्ध थाना जरवा में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है. जिला निर्वाचन अधिकारी के द्वारा यह सूचना पुलिस को दी गई थी, जिस पर पूरा वेरीफाई करके इसमें नियमानुसार कार्रवाई की गई है और इसमें यह मुकदमा पंजीकृत किया गया है. इसमें सभी साक्ष्य इकट्ठा करके जल्द से जल्द विधिक कार्रवाई करके पूरे प्रकरण का निस्तारण किया जाएगा और बॉर्डर क्षेत्र में और भी ऐसे जितने भी प्रकरण हैं उन सबका पता लगाया जाएगा."
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