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22 नवंबर के भारत दौरे से नेपाल के पीएम बालेन शाह क्या चाहते हैं-5 प्वाइंट

इस दौरे के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय वादों को ठोस प्रगति में बदलने की होगी. बालेन शाह 23 नवंबर को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे.

22 नवंबर के भारत दौरे से नेपाल के पीएम बालेन शाह क्या चाहते हैं-5 प्वाइंट
बालेन शाह की कोशिश भारत दौरे के दौरान संबंधों को मजबूत करने पर रहेगी. (फोटो-AFP)
  • नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह 22 से 25 नवंबर तक भारत का पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा करेंगे
  • नेपाल ने भारत से बाढ़ पुनर्निर्माण के लिए एक अरब डॉलर ऋण और एक अरब डॉलर अनुदान की मांग की है
  • भारत ने नेपाल के हवाई मार्ग विस्तार के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, लेकिन अंतिम समझौता बाकी है

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह 22 से 25 नवंबर तक भारत का दौरा करेंगे. यह उनकी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा होगी. नेपाल इस यात्रा के जरिए बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए भारत से मदद चाहता है और लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय मुद्दों पर प्रगति की उम्मीद कर रहा है. इस यात्रा से ठीक पहले भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी 4-5 नवंबर को काठमांडू पहुंचे. इस दौरान कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन सीमा विवाद जैसे कुछ मुद्दों को जानबूझकर चर्चा से बाहर रखा गया.

अपनी यात्रा के दौरान, शाह 23 नवंबर को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे. दोनों पक्षों के बीच कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर होने और आपदा प्रभावित नेपाल के लिए आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा किए जाने की भी उम्मीद है. इस यात्रा से काठमांडू की क्या अपेक्षाएं हैं और किन बातों से इसमें जटिलता आ सकती है, इसे पांच प्वाइंट में समझिए...

2 अरब डॉलर की सहायता

यह इस यात्रा के दौरान काठमांडू की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक होगी. नेपाल ने औपचारिक रूप से 1 अरब डॉलर के रियायती ऋण, 500 मिलियन डॉलर की अनुदान राशि, और पुनर्निर्माण व पुनर्वास के लिए 500 मिलियन डॉलर (जो संभवतः अनुदान के रूप में ही होगा) का प्रस्ताव रखा है. यह मांग 26 अगस्त को रसुवा-भोटेकोशी कॉरिडोर में आई बाढ़ के बाद की गई है.

इस बाढ़ में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हो गई, 9,000 से अधिक लोग घायल हुए, 5,000 से ज्यादा लोग लापता हैं, और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. इस आपदा ने चीन के साथ नेपाल के व्यापार संपर्क को भी बाधित कर दिया है. भारतीय अधिकारियों ने नेपाल के प्रस्तावों पर विचार करने की इच्छा जताई है, लेकिन सहायता की राशि और शर्तें अभी तय होनी बाकी हैं.

नेपाल के लिए और अधिक हवाई मार्ग

नेपाल 2014 से ही भारत से अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्गों की मांग कर रहा है, ताकि भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन आसान हो सके.

उपयुक्त मार्गों की कमी के कारण इन दोनों हवाई अड्डों के संचालन में बाधा आ रही है और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को आकर्षित करना मुश्किल हो गया है. खबरों के अनुसार, भारत ने नेपाल के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है. प्रधानमंत्री शाह की भारत यात्रा से पहले, दोनों देशों के नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के अधिकारियों के बीच इस मामले पर तकनीकी चर्चा होने की उम्मीद है.

पंचेश्वर परियोजना पर हो सकती है बात

1996 की महाकाली संधि के तहत परिकल्पित, लंबे समय से अटकी पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना भी एजेंडे में शामिल एक प्रमुख मुद्दा है. दशकों की बातचीत के बावजूद, इस परियोजना में बहुत कम प्रगति हुई है. इसका मुख्य कारण लागत साझा करने और जल संसाधनों से मिलने वाले फायदों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद होना है.

खबरों के अनुसार, निर्माण लागत को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम हुए हैं. चर्चाओं से संकेत मिलता है कि नेपाल 25 से 30 प्रतिशत लागत उठाएगा, जबकि बाकी खर्च भारत वहन करेगा. लेकिन पानी से मिलने वाले फायदों को साझा करने का अहम सवाल अभी भी अनसुलझा है. हवाई प्रवेश मार्ग (एयर-एंट्री रूट) के मुद्दे की तरह ही, प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले इस विषय पर भी और तकनीकी चर्चा होने की उम्मीद है.

भारत-नेपाल सीमा विवाद

कालापानी, लिम्पियाधुरा और सुस्ता से जुड़े सीमा विवाद उन एजेंडा बिंदुओं में शामिल हो सकते हैं. शाह ने अपने कार्यालय में 'ग्रेटर नेपाल' का नक्शा लगा दिया था. एक बार उन्होंने काठमांडू में भारतीय फिल्मों की स्क्रीनिंग पर भी रोक लगाने की कोशिश की थी. लेकिन अब ऐसा लगता है कि शाह का रुख कुछ नरम पड़ गया है. इस साल मई में उन्होंने कहा था कि जिस तरह भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, उसी तरह नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया है.

महत्वपूर्ण होने के बावजूद—कम से कम नेपाल के लिए—काठमांडू में मिसरी की बैठकों में सीमा विवाद का मुद्दा नहीं उठा. लेकिन नेपाली अधिकारियों को उम्मीद है कि इसे एजेंडा में शामिल किया जाएगा. अब यह देखना बाकी है कि इस दौरे में यह मुद्दा शामिल होता है या नहीं, और अगर होता है तो किस तरह.

भारत समर्थित कई परियोजनाओं की शुरुआत

इस दौरे से भारत समर्थित परियोजनाओं के उद्घाटन और शुरुआत के जरिए कुछ ठोस परिणाम मिलने की उम्मीद है. दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा कावरे के पनौती में नेपाल पुलिस अकादमी, दार्चुला में एक पुल, भैरहवा में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और महाकाली नदी पर एक मोटर योग्य पुल का उद्घाटन किए जाने की संभावना है.

इसके अलावा, उनके द्वारा संयुक्त रूप से दोधारा चांदनी में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना और भारत के सिलीगुड़ी को झापा के चारली से जोड़ने वाली पेट्रोलियम पाइपलाइन के निर्माण कार्य की शुरुआत किए जाने की भी उम्मीद है. भारत ने नेपाल को यह भी सूचित किया है कि अयोध्या और जनकपुर के बीच रेल सेवा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, और इस सप्ताह इसका ट्रायल रन भी किया गया है.

इन परियोजनाओं के अलावा, दोनों पक्षों के बीच ऊर्जा, सड़क, रेलवे, ट्रांसमिशन लाइनों और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है. इस दौरे के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय वादों को ठोस प्रगति में बदलने की होगी.

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